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US इमिग्रेशन का नया प्रस्ताव: स्टूडेंट वर्क प्रोग्राम के लिए $70,000 फीस तय
Tara Tandi
8 Oct 2026 12:25 PM IST

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वॉशिंगटन: US के होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट ने 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) प्रोग्राम में पहली बार शामिल होने वाले इंटरनेशनल स्टूडेंट्स से $70,000 चार्ज करने का प्रस्ताव दिया है। यह एक बड़ा बदलाव है जिससे अमेरिका में पढ़ाई के बाद काम का अनुभव पाने का खर्च काफी बढ़ सकता है।
DHS ने बुधवार को कहा कि इस प्रस्तावित नियम के तहत OPT में बाद में किसी भी बार शामिल होने पर $30,000 की फीस भी लगेगी।
ये फीस अभी सिर्फ़ प्रस्तावित हैं और अभी लागू नहीं हैं। फाइनल नियम पर विचार करने से पहले DHS 8 अक्टूबर से 9 नवंबर तक लोगों की राय लेगा।
OPT, F-1 स्टेटस वाले योग्य इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को अपनी पढ़ाई के क्षेत्र से सीधे जुड़े काम के लिए अस्थायी रोज़गार की अनुमति पाने की सुविधा देता है। US कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ से ग्रेजुएट होने वाले विदेशी स्टूडेंट्स, जिनमें साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स (STEM) के स्टूडेंट्स भी शामिल हैं, इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं।
प्रस्ताव के तहत, SEVP-सर्टिफाइड स्कूलों को यह फीस तब चुकानी होगी जब उनके तय स्कूल अधिकारी 'स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर इंफॉर्मेशन सिस्टम' (SEVIS) में OPT के लिए स्टूडेंट्स की सिफारिश करेंगे।
DHS के अनुसार, अगर स्कूल ने ज़रूरी फीस नहीं चुकाई है, तो US सिटिज़नशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज़ रोज़गार की अनुमति नहीं देगा।
यह फीस किसी खास एम्प्लॉयर से जुड़ी नहीं होगी। यह तब लागू होगी जब कोई स्कूल किसी F-1 स्टूडेंट की किसी भी तरह के OPT के लिए सिफारिश करेगा।
DHS ने कहा कि इकट्ठा किया गया पैसा US ट्रेज़री में जमा किया जाएगा।
डिपार्टमेंट ने कहा कि वह धोखाधड़ी और गलत इस्तेमाल को रोकने, इमिग्रेशन सिस्टम की ईमानदारी को मज़बूत करने और US वर्कर्स की सुरक्षा के लिए ये बदलाव प्रस्तावित कर रहा है।
DHS के एक प्रवक्ता ने कहा, "ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का मकसद कभी भी अमेरिकी वर्कफोर्स में पिछले दरवाज़े से घुसना, सस्ते लेबर के लिए सब्सिडी देना या सिस्टम का गलत फायदा उठाने वालों को इनाम देना नहीं था।"
प्रवक्ता ने कहा, "DHS OPT को बेहतर बना रहा है ताकि विदेशी स्टूडेंट्स एम्प्लॉयर्स के सामने अपनी काबिलियत साबित कर सकें। अमेरिकी वर्कर्स को ऐसे प्रोग्राम का मुकाबला नहीं करना चाहिए जिसे सस्ते विदेशी लेबर के लिए एक ज़रिया बना दिया गया हो।"
DHS ने कहा कि 'स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम' को ऐसे स्कूल, तय स्कूल अधिकारी, एम्प्लॉयर्स और F-1 स्टूडेंट्स मिले हैं जो मौजूदा नियमों का गलत फायदा उठाने वाली स्कीम में शामिल थे, जिनमें समस्या वाले वर्कसाइट्स और "पे-टू-स्टे" (रहने के लिए पैसे देने वाली) वीज़ा स्कीम शामिल हैं। विभाग ने कहा कि प्रस्तावित फीस से स्कूलों को OPT के लिए छात्रों की सिफारिश करने से पहले ज़्यादा निगरानी और सावधानी बरतने के लिए बढ़ावा मिल सकता है।
मौजूदा नियमों के तहत, योग्य F-1 छात्र अपने एकेडमिक प्रोग्राम को पूरा करने से पहले या ग्रेजुएशन के बाद OPT के लिए आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते उनका काम सीधे उनके मुख्य पढ़ाई के विषय से जुड़ा हो।
छात्र हर एजुकेशनल लेवल पर 12 महीने तक का OPT पा सकते हैं।
साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग या मैथमेटिक्स में ज़रूरी डिग्री वाले ग्रेजुएट अतिरिक्त 24 महीने के STEM OPT एक्सटेंशन के लिए योग्य हो सकते हैं। इससे यह प्रोग्राम उन इंटरनेशनल ग्रेजुएट के लिए खास तौर पर अहम हो जाता है जो US टेक्नोलॉजी और दूसरे हाई-स्किल्ड इंडस्ट्रीज़ में प्रोफेशनल अनुभव पाना चाहते हैं।
इसमें शामिल होने के लिए, छात्रों को स्कूल के किसी तय अधिकारी से सिफारिश लेनी होगी और रोज़गार की मंज़ूरी के लिए USCIS में अलग से आवेदन करना होगा।
यह प्रस्ताव US प्रशासन की ओर से रोज़गार-आधारित इमिग्रेशन प्रोग्राम को सख़्त बनाने की व्यापक कोशिशों के बीच आया है। अधिकारियों का तर्क है कि धोखाधड़ी से निपटने और घरेलू कामगारों की सुरक्षा के लिए नियमों को सख़्ती से लागू करने की ज़रूरत है।
DHS ने कहा कि लोगों की राय जानने की अवधि खत्म होने के बाद, वह सही तरीके से भेजी गई राय और सहायक दस्तावेज़ों की समीक्षा करेगा और कोई भी अंतिम नियम जारी करने से पहले प्रस्ताव में बदलाव कर सकता है।
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