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रमजान को लेकर बने नए नियम, अब मस्जिदों में रखना होगा इन बातों का ख्याल

Neha
9 April 2021 2:18 AM GMT
रमजान को लेकर बने नए नियम, अब मस्जिदों में रखना होगा इन बातों का ख्याल
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मस्जिदों में, लोगों से उम्मीद की जाती है कि वे स्मार्ट डिवाइसों से कुरान पढ़ें.

अगले हफ्ते से दुनियाभर में रमजान (Ramadan) के पाक महीने की शुरुआत होने वाली है. ऐसे में मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ बढ़ने से कोरोना के फैलने का खतरा भी है. इसी के मद्देनजर दुबई (Dubai) में सरकार ने रमजान के महीने में मस्जिदों में नमाज पढ़ने को लेकर नए नियम बनाए हैं. इन नियमों के तहत अजान के पांच मिनट बाद ही ईशा की नमाज पढ़ी जाएगी. वहीं, तरावीह की नमाज के पूरा होने के तुरंत बाद मस्जिदों को बंद कर दिया जाएगा. दुबई सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे इस पाक महीने में इन नियमों का पालन करें.

दुबई में इस्लामिक मामलों और चैरिटीबल कार्य विभाग (IACAD) ने कहा कि ईशा और तरावीह की नमाज मस्जिदों में पढाई जाएगी. लेकिन नमाजियों को एहतियाती दिशा निर्देशों का पालन करना होगा, जिसमें मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना शामिल है. मस्जिदों में दोनों नमाज की अधिकतम अवधि 30 मिनट की रखी गई है. नियमों के मुताबिक, मस्जिदों में नमाज पढ़ने आने वाले लोगों को अपनी चटाई लेकर आनी होगी. नमाजियों को एक-दूसरे से हाथ मिलाने से बचना होगा.
मस्जिदों में नमाज के लिए क्या हैं नियम, यहां जानें…
मस्जिद अजान के समय से लेकर नमाज के अंत तक खुली रहेगी.
मस्जिदों में ईशा और तरावीह की नमाज की अधिकतम अवधि 30 मिनट है.
ईशा की नमाज अजान के पांच मिनट बाद होगी.
मस्जिद के दरवाजे अजान के बाद खोले दिए जाएंगे और ये नमाज के पूरे होने तक खुले रहेंगे.
जमात के साथ नमाज की पढ़ने की इजाजत होगी. दूसरी जमात खड़ी कर नमाज पढ़ने या अकेले नमाज पढ़ने की मनाही है.
नमाज के तुरंत बाद मस्जिदों को बंद कर दिया जाएगा.
मस्जिद के प्रवेश द्वार पर भोजन या किसी भी अन्य सामान जैसे फेस मास्क का वितरण सख्त वर्जित है.
पहले से बीमार चल रहे लोग मस्जिदों में आने से बचें.
मस्जिदों का होगा सैनिटाइजेशन
IACAD के महानिदेशक डॉ हमाद अल शेख अल शैबानी ने कहा कि मस्जिदों में रमजान के महीने में हर दिन सैनिटाइजेशन किया जाएगा, ताकि लोगों को संक्रमण से जितना हो सके, उतना बचाया जा सके. उन्होंने कहा कि मस्जिदों में लेकचर्स और सेमिनार स्थगित रहेंगे. हालांकि, नमाजियों के पास ऑनलाइन लेकचर में भाग लेने का विकल्प होगा. मस्जिदों में, लोगों से उम्मीद की जाती है कि वे स्मार्ट डिवाइसों से कुरान पढ़ें.


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