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नए शोध में आया सामने: हृदय की संरचना से प्रभावित होती है सोच

Rounak Dey
2 Feb 2022 1:37 PM IST
नए शोध में आया सामने: हृदय की संरचना से प्रभावित होती है सोच
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यह किस प्रकार से शरीर के अन्य हिस्सों में ब्लड की पं¨पग (मात्रत्मक प्रतिशत में) को मापने के लिए किया।

शोधकर्ताओं ने पाया है कि वयस्क होने के शुरुआती दिनों और मध्य वय में हृदय की संरचना तथा डायलोस्टिक फंक्शन में हल्का सा बदलाव होता है और उसका संबंध सोच (थिंकिंग) व स्मृति कौशल में कमी से हो सकता है। यह शोध अमेरिकन एकेडमी आफ न्यूरोलाजी के आनलाइन जर्नल 'न्यूरोलाजी' में प्रकाशित हुआ है।

डायलोस्टिक फंक्शन का आशय हृदय के चैंबरों में रक्त भरने और बिट्स के बीच रेस्ट से है। शोध के लेखक यूनिवर्सिटी आफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को से संबद्ध लार रौच ने बताया कि कार्डियोवस्कुलर रोगों से होने वाले खतरे को हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्राल तथा डायबिटीज से जोड़कर देखा जाता रहा है। लेकिन हृदय की संरचना और उसके फंक्शन से संज्ञानात्मक जोखिम के बारे में बहुत कम जानकारी है।
उन्होंने बताया कि हमने युवाओं के मध्य वय तक पहुंचने में 25 वर्षों तक अध्ययन किया और पाया कि सोच और स्मृति कौशल में ह्रास उपरोक्त कारकों से अलग या स्वतंत्र हैं। हमारे इस निष्कर्ष की अहमियत जिंदगी के बाद के दिनों में संज्ञानात्मक ह्रास के जोखिम के संदर्भ में हृदय में मार्कर से जुड़ा है। ऐसी विसंगतियां आमतौर पर सामान्य होती हैं और अक्सर उनकी पहचान इसलिए भी नहीं हो पाती है कि उनके कोई स्वाभाविक लक्षण नहीं होते हैं।
25 साल बाद क्या पाया: शोधकर्ताओं 25 साल बाद पाया कि लेफ्ट वेंट्रीकल का औसत वजन 0.27 ग्राम प्रति वर्ग मीटर प्रति साल (जी/एम2) बढ़ गया। इसमें पहले साल में औसत वजन 81 जी/एम2 तथा अंतिम वर्ष में 86 जी/एम2 की औसत बढ़ोतरी थी। लेफ्ट आर्टियल ब्लड वाल्यूम में भी 0.42 मिलीलीटर प्रति वर्ग मीटर (एमएल/एम2) की वृद्धि हुई। इसमें पहले साल की औसत वृद्धि 16 एमएल/एम2 तथा अंतिम वर्ष में 26 एमएल/एम2 की रही। अध्ययन के अंतिम वर्ष में प्रतिभागियों के छह संज्ञानात्मक टेस्ट किए गए। इसके जरिये सोच (थिंकिंग) तथा स्मृति कौशल जिसमें ग्लोबल काग्निशन, प्रोसेसिंग स्पीड, एग्जीक्यूटिव फंक्शन, विलंबित मौखिक स्मृति और प्रवाह का आकलन किया गया। उन्हें शब्दों की एक सूची दिखाकर उसके 10 मिनट बाद उसे याद करने को कहा गया।
शोधकर्ताओं ने पाया कि उम्र, लिंग तथा शिक्षा जैसे कारकों को समायोजित करने के बाद युवावस्था के शुरुआती दिनों से लेकर मध्य वय तक पहुंचने के दौरान लेफ्ट वेंट्रीकल के वजन में वृद्धि का संबंध व्यक्ति के मध्य वय में अधिकांश काग्निटिव टेस्ट में कम स्तर से था।
डिमेंशिया की सामान्य जांच में प्रतिभागियों को लाइन खींचने और अक्षरों को जोड़ने, पांच शब्दों को दोहराने की एक्टिविटी कराई गई। इस टेस्ट का स्कोर शून्य से 30 तक रखा गया और उच्चतम सामान्य काग्निटिव स्कोर 26 माना गया। जिन मध्य वय प्रतिभागियों में लेफ्ट वेंट्रीकल का वजन औसत रूप से बढ़ा था, उनका इन टेस्टों में औसत स्कोर 22.7 रहा, जबकि औसत से ज्यादा वजन नहीं बढ़ने वालों का स्कोर 24 रहा।
लेफ्ट आर्टियल वाल्यूम में वृद्धि भी मध्य वय में काग्निशन में कमी से जुड़ा था। हालांकि लेफ्ट वेंट्रीकल से ब्लड पं¨पग की प्रतिशतता में औसत से ज्यादा गिरावट का संबंध काग्निशन से नहीं था। रौच ने बताया कि यह बड़ा ही दिलचस्प रहा कि कार्डियोवस्कुलर डिजीज के कारकों- जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूमपान तथा मोटापा के असर को समायोजित करने के बाद भी परिणाम समान ही था।
कैसे किया अध्ययन
अध्ययन में 30 वर्ष औसत उम्र वाले 2,653 लोगों को शामिल किया गया। अध्ययन की शुरुआत में सभी प्रतिभागियों के इकोकार्डियोग्राम, अल्ट्रासाउंड इमेज लिए गए। उसके 20 और 25 वर्ष बाद भी यह प्रक्रिया दोहराई गई। शोधकर्ताओं ने इनका इस्तेमाल लेफ्ट वेंट्रीकल (बायां निलय- दिल का बायां निचला भाग) का वजन, पंप करने के लिए इसमें भरने वाले ब्लड का आयतन और यह किस प्रकार से शरीर के अन्य हिस्सों में ब्लड की पं¨पग (मात्रत्मक प्रतिशत में) को मापने के लिए किया।


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