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चुनाव से पहले नेतन्याहू की पोस्ट से घमासान, ईरान के परमाणु खतरे की दी चेतावनी

nidhi
26 Oct 2026 9:48 AM IST
चुनाव से पहले नेतन्याहू की पोस्ट से घमासान, ईरान के परमाणु खतरे की दी चेतावनी
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ईरान को परमाणु हथियार मिले तो कुछ मायने नहीं रखेगा

यरुशलम : इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने मतदान से ठीक पहले राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने रविवार, 25 अक्टूबर को कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से तैयार ऐसी तस्वीर साझा की, जिसमें तेल अवीव जैसे दिखाई देने वाले शहर के ऊपर परमाणु विस्फोट और तबाही दिखाई गई है। इसके साथ ईरान से इजराइल के अस्तित्व को खतरा होने की चेतावनी वाला संदेश साझा किया गया। हालांकि, पोस्ट में नेतन्याहू ने तेल अवीव पर हमला करने की धमकी नहीं दी है। उन्होंने ईरान के संभावित परमाणु खतरे का डर दिखाया है।

यह तस्वीर किसी वास्तविक परमाणु हमले की नहीं है। इसमें घनी आबादी वाले शहर की इमारतों के ऊपर विस्फोट के बाद उठने वाला विशाल, मशरूम के आकार का धुएं का गुबार दिखाई देता है। नीचे इमारतों को आग और धमाके की चपेट में दिखाया गया है। प्रकाशित विवरण के मुताबिक, पोस्ट में शहर का नाम स्पष्ट नहीं लिखा गया था, लेकिन तस्वीर को तेल अवीव का काल्पनिक दृश्य माना गया। चुनाव से दो दिन पहले ऐसी तस्वीर साझा किए जाने पर विपक्ष ने प्रधानमंत्री की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
नेतन्याहू ने लेखक और राजनीतिक टिप्पणीकार युवाल ब्लूमबर्ग के विचार साझा किए। संदेश का मुख्य तर्क था कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल होने की स्थिति में इजराइल के सामने इतना बड़ा संकट खड़ा हो सकता है कि घरेलू राजनीतिक विवाद महत्वहीन हो जाएंगे। पोस्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा को बाकी मुद्दों से ऊपर रखने की अपील की गई। इसमें सरकार से जुड़े विवादों और सैन्य भर्ती जैसे प्रश्नों को उस बड़े खतरे से ध्यान भटकाने वाला बताया गया, जिसे संदेश में ईरान से जोड़कर पेश किया गया है।
साझा संदेश में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के शेष दो वर्षों को भी अहम बताया गया। इसमें तर्क दिया गया कि इजराइल को इसी अवधि में ईरान से जुड़े खतरे का सामना करने के अवसर का इस्तेमाल करना चाहिए। संदेश ने भविष्य की पीढ़ियों का उल्लेख करते हुए अवसर गंवाने के परिणामों को लेकर चेताया। इस तरह पोस्ट में परमाणु खतरे, अमेरिकी समर्थन और इजराइल के राजनीतिक नेतृत्व को एक साथ जोड़ा गया। यह संदेश ऐसे समय सामने आया है, जब देश में चुनाव प्रचार अपने अंतिम चरण में है।
इजराइल में 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव होने हैं। नेतन्याहू अपने प्रचार में ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं और सुरक्षा संबंधी खतरों को प्रमुखता दे रहे हैं। उनके साझा किए गए संदेश में मतदाताओं से ऐसे नेतृत्व के चयन की बात की गई, जो ईरान का सामना करने में सक्षम हो। संदेश में अक्षम नेतृत्व चुने जाने पर परिवारों के लिए दूसरे होलोकॉस्ट जैसे खतरे का उल्लेख भी था। विपक्ष ने इसी भाषा और तस्वीर के इस्तेमाल को मतदाताओं पर भय के जरिए असर डालने की कोशिश बताया है।
डेमोक्रेट्स पार्टी के नेता यायर गोलान ने पोस्ट की तीखी आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि देश का प्रधानमंत्री अपने ही प्रमुख शहर के ऊपर परमाणु बम की तस्वीर क्यों प्रकाशित कर रहा है। गोलान ने नेतन्याहू और उनके आसपास के लोगों पर चुनावी दबाव में नियंत्रण खोने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रधानमंत्री को सोशल मीडिया से दूर रखने तक की बात कही। आगामी मतदान का उल्लेख करते हुए गोलान ने दावा किया कि उनकी ओर से देश में सुरक्षा और विवेकपूर्ण नेतृत्व बहाल करने का प्रयास किया जाएगा।
पूर्व सेना प्रमुख और याशार पार्टी के नेता गादी आइजनकोट ने भी नेतन्याहू पर डर फैलाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री चुनाव अभियानों में बार-बार भय का सहारा लेते हैं। आइजनकोट ने ईरान के खिलाफ युद्ध के घोषित उद्देश्यों को हासिल करने में सरकार की सफलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब नागरिकों को व्यापक विनाश का डर दिखाया जा रहा है। उन्होंने नेतन्याहू के पिछले विजय संबंधी दावों और मौजूदा चेतावनी के बीच अंतर को भी राजनीतिक बहस का मुद्दा बनाया।
इस विवाद की एक अहम वजह नेतन्याहू के पुराने बयान भी हैं। वह पहले इजराइल और अमेरिका की कार्रवाई से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचने की बात कह चुके हैं। ऐसे में अब अस्तित्व पर मंडराते खतरे की चेतावनी देने पर उनके आकलन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, किसी परमाणु कार्यक्रम को नुकसान पहुंचने और भविष्य में उससे खतरा बने रहने के दावे अलग विषय हैं। मौजूदा पोस्ट अपने आप में किसी आसन्न परमाणु हमले का प्रमाण पेश नहीं करती।
विपक्ष की आपत्ति का केंद्र सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा के साथ उसके चुनावी इस्तेमाल का आरोप है। आइजनकोट ने एक साक्षात्कार में कहा कि उन्हें चुनाव से पहले ईरान पर सैन्य हमला उचित ठहराने वाला तत्काल और प्रत्यक्ष खतरा नहीं दिखाई देता। यह उनका राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी आकलन है। फिलहाल सामने आए घटनाक्रम में परमाणु विस्फोट की काल्पनिक तस्वीर, नेतन्याहू द्वारा साझा चेतावनी और विपक्ष की प्रतिक्रियाएं शामिल हैं। तेल अवीव पर वास्तविक परमाणु हमला होने या नेतन्याहू द्वारा वहां हमला करने की धमकी देने का निष्कर्ष इससे नहीं निकलता।
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