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सरकार बनाने की अंतिम समय-सीमा से चूके नेतन्याहू, विपक्ष में बैठने की आई नौबत

Neha
5 May 2021 8:48 AM GMT
सरकार बनाने की अंतिम समय-सीमा से चूके नेतन्याहू, विपक्ष में बैठने की आई नौबत
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नेतन्याहू सरकार गठन को लेकर समझौता नहीं कर पाए.

इजरायल (Israel) के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) नई सरकार को गठित करने के लिए बनाए जाने वाले गठबंधन (New governing coalition) की डेडलाइन से चूक गए हैं. उनके पास गठबंधन वाली नई सरकार बनाने के लिए आधी रात तक का समय था. लेकिन वह इस दौरान इसे गठित करने में विफल रहे. ऐसे में इस बात की संभावना बढ़ गई है कि उनकी लिकुड पार्टी (Likud party) को 12 सालों में पहली बार विपक्ष में बैठना पड़ सकता है. इसके अलावा नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं.

राष्ट्रपति रुवन रिवलिन (Reuven Rivlin) ने नेतन्याहू को सरकार गठित करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया था, जिसकी अवधि मंगलवार आधी रात खत्म हो गई. इस तरह ये मामला एक बार फिर राष्ट्रपति को हाथों में आ गया है. राष्ट्रपति रुवन रिवलिन ने कहा है कि वह बुधवार को संसद में सीटें हासिल करने वालीं 13 पार्टियों से सरकार गठन को लेकर चर्चा करेंगे. माना जा रहा है कि रिवलिन आने वाले दिनों में नेतन्याहू के विरोधियों को गठबंधन वाली सरकार बनाने का मौका दे सकते हैं.
अगर नहीं हुआ सरकार का गठन तो दो साल में पांचवीं बार होगा चुनाव
राष्ट्रपति रिवलिन के पास शक्ति है कि वह संसद से मांग कर सकते हैं कि वह अपने किसी एक सदस्य को देश का प्रधानमंत्री चुन ले. वहीं, अगर इन सबके बावजूद भी देश में सरकार का गठन नहीं हो पाता है तो इजरायल में एक बार फिर चुनाव होंगे. अगर फिर चुनाव हुआ तो ये दो साल के वक्त में पांचवा चुनाव होगा. इस राजनीतिक उठापटक का ये मतलब नहीं है कि नेतन्याहू को तुरंत अपने प्रधानमंत्री पद से हाथ धोना पड़ सकता है. हालांकि, ये जरूर है कि अब उनके इतने लंबे कार्यकाल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.
सरकार गठन के लिए हर दर पर पहुंचे नेतन्याहू लेकिन नहीं मिली सफलता
राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद नेतन्याहू के विरोधियों ने हाल के सप्ताह में उनसे अनौपचारिक बातचीत शुरू कर दी है. विपक्षियों को उम्मीद है कि इसके जरिए ही देश में सरकार का गठन हो सकता है. 23 मार्च को खत्म हुए चुनाव में नेतन्याहू को संसद में बहुमत हासिल नहीं हुआ. दो साल से भी कम समय में ये देश में चौथा चुनाव था. अपने कई प्रतिद्वंद्वियों के साथ बार-बार बैठकें करने और एक छोटे इस्लामी अरब पार्टी के नेता से चर्चा करने के बाद भी नेतन्याहू सरकार गठन को लेकर समझौता नहीं कर पाए.


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