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Kathmandu काठमांडू। नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने सोमवार को हमास की कैद में मारे गए नेपाली नागरिक बिपिन जोशी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। राजधानी काठमांडू स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित राज्यस्तरीय श्रद्धांजलि समारोह में प्रधानमंत्री कार्की के साथ पूरा मंत्रिमंडल, वरिष्ठ नेता, राजनयिक और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। बिपिन जोशी उन 17 नेपाली छात्रों में शामिल थे जो पिछले साल इजराइल-हमास संघर्ष के दौरान इजराइल के दक्षिणी हिस्से में इंटर्नशिप कर रहे थे। 7 अक्टूबर को हमास के हमले में जोशी लापता हो गए थे और लंबे समय तक उनका कोई पता नहीं चल पाया था। हाल ही में इजराइली अधिकारियों ने डीएनए जांच के बाद पुष्टि की कि बिपिन जोशी की हत्या हमास की कैद में कर दी गई थी।
श्रद्धांजलि समारोह में प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने कहा, “बिपिन जोशी केवल नेपाल के नहीं बल्कि पूरी मानवता के बेटे थे। उनकी निर्मम हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया है। नेपाल सरकार उनके परिवार के साथ खड़ी है और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसे हादसों से हमारे नागरिक सुरक्षित रहें। प्रधानमंत्री कार्की ने इस मौके पर नेपाल में इजराइली दूतावास के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और दोनों देशों के बीच नागरिक सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि नेपाल सरकार विदेश में पढ़ने या काम करने वाले अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक “ग्लोबल प्रोटेक्शन प्रोटोकॉल” तैयार कर रही है, जिसमें संघर्षग्रस्त देशों में नेपाली नागरिकों की स्थिति की निगरानी की जाएगी।
बिपिन जोशी का पार्थिव शरीर रविवार देर रात विशेष विमान से काठमांडू लाया गया। सोमवार सुबह उनका अंतिम संस्कार नेपालगंज में राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस अवसर पर हजारों लोग “बिपिन अमर रहें” के नारे लगाते हुए शामिल हुए। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि सरकार इजराइल और संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से उन सभी नेपाली नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी जो अब भी संघर्षग्रस्त इलाकों में हैं। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बिपिन जोशी की हत्या के मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्याय की मांग उठाई जाएगी। इस घटना के बाद नेपाल में गुस्सा और शोक की लहर है। विश्वविद्यालयों में छात्रों ने मौन रैली निकालकर बिपिन जोशी को श्रद्धांजलि दी। कई स्थानों पर मोमबत्ती जलाकर उनके साहस और समर्पण को याद किया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना नेपाल की विदेश नीति और नागरिक सुरक्षा नीति पर गहरा असर डालेगी। प्रधानमंत्री कार्की की सरकार अब ऐसे नागरिकों के लिए आपात राहत और पुनर्वास कोष बनाने की तैयारी कर रही है, जो विदेश में संघर्ष या आपदाओं के कारण जान गंवा बैठते हैं।
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