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Nepal के पूर्व राजा पर जुर्माना, हिंसक हुआ विरोध प्रदर्शन – जानें पूरा मामला

Uma Verma
30 March 2025 9:06 AM IST
Nepal के पूर्व राजा पर जुर्माना, हिंसक हुआ विरोध प्रदर्शन – जानें पूरा मामला
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नेपाल | नेपाल में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह को हाल ही में जुर्माने का सामना करना पड़ा, जिससे देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस फैसले के बाद उनके समर्थकों में जबरदस्त गुस्सा देखा गया, जो देखते ही देखते हिंसक प्रदर्शन में बदल गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें कई लोग घायल हो गए।

ज्ञानेंद्र शाह पर जुर्माना क्यों लगा?

नेपाल सरकार ने पूर्व राजा पर कर चोरी और अवैध संपत्ति से जुड़े एक मामले में जुर्माना लगाया। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि शाह के कुछ व्यापारिक लेन-देन में अनियमितताएं पाई गई थीं, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई। हालांकि, उनके समर्थकों का दावा है कि यह राजनीतिक बदले की भावना से उठाया गया कदम है और शाह को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।

प्रदर्शन क्यों हुआ और कैसे हुआ हिंसक?

इस फैसले के बाद, राजशाही समर्थकों और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP) के कार्यकर्ताओं ने काठमांडू और अन्य शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वे सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए ज्ञानेंद्र शाह के खिलाफ की गई कार्रवाई को अन्यायपूर्ण और राजनीति से प्रेरित बता रहे थे।

प्रदर्शन शुरू में शांतिपूर्ण था, लेकिन जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। कई वाहनों और सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचाया गया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।

सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया

नेपाल सरकार का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह पूर्व राजा ही क्यों न हों। सरकार ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की और चेतावनी दी कि अगर हिंसा जारी रही तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, विपक्षी दलों और राजशाही समर्थकों ने सरकार पर लोकतंत्र के नाम पर दमन करने का आरोप लगाया। वे इस जुर्माने को शाह के खिलाफ राजनीतिक साजिश बता रहे हैं और इसे तुरंत वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

नेपाल में राजशाही की वापसी की मांग?

नेपाल में राजशाही 2008 में खत्म हो गई थी, लेकिन आज भी ज्ञानेंद्र शाह के समर्थकों की अच्छी खासी संख्या है। इस विवाद ने एक बार फिर नेपाल में राजशाही की वापसी पर बहस को हवा दे दी है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों को मानती है या स्थिति और गंभीर होती है। फिलहाल, नेपाल में माहौल गर्माया हुआ है और इस घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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