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नेपाल की जलप्रलय बनी चेतावनी बंगाल के पहाड़ी इलाकों में बढ़ा खतरा
Ratna Netam
31 Aug 2026 2:38 PM IST

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नेपाल :आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने पूरे हिमालयी क्षेत्र को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। पड़ोसी देश में अचानक आई जल प्रलय के बाद अब भारत के कुछ इलाकों में भी संभावित खतरे को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। खासकर पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्सों को लेकर विशेषज्ञों की चिंता बढ़ी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में बदलते मौसम, ग्लेशियरों के पिघलने और अचानक आने वाली बाढ़ की घटनाएं आने वाले समय में बड़े खतरे का संकेत हो सकती हैं।
नेपाल में आई आपदा ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत में भी ऐसी स्थिति बन सकती है? विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में नेपाल जैसी स्थिति की संभावना हर जगह समान नहीं है, लेकिन हिमालय से निकलने वाली नदियों और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जोखिम जरूर बढ़ा है।
उत्तर बंगाल को लेकर क्यों बढ़ी चिंता
पश्चिम बंगाल का उत्तरी हिस्सा हिमालय की तलहटी में आता है। दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जैसे इलाके पहाड़ी नदियों और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों के करीब हैं। यहां अचानक तेज बारिश, बादल फटने जैसी घटनाएं और ग्लेशियर से जुड़ी आपदाएं नुकसान पहुंचा सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होने से नदियों में अचानक पानी बढ़ जाता है, जिससे फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति बन सकती है। नेपाल की घटना के बाद उत्तर बंगाल समेत हिमालय से जुड़े भारतीय क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
ग्लेशियर झीलों का बढ़ता खतरा
हिमालय क्षेत्र में सबसे बड़ी चिंता ग्लेशियर झीलों को लेकर है। जब ग्लेशियर तेजी से पिघलते हैं तो उनके पास पानी जमा होकर बड़ी झीलों का रूप ले सकता है। यदि किसी कारण से ऐसी झीलों की प्राकृतिक दीवार टूट जाती है तो अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर आ सकता है।
वैज्ञानिक इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF कहते हैं। इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) ने भी हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में भविष्य में इस तरह के जोखिम बढ़ने की चेतावनी दी है।
भारत के हिमालयी राज्यों और सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसी कई झीलें मौजूद हैं, जिनकी निगरानी जरूरी मानी जाती है। नेपाल की घटना ने इन जोखिमों को लेकर फिर से ध्यान आकर्षित किया है।
क्या भारत में नेपाल जैसी तबाही संभव है?
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आपदा की सटीक भविष्यवाणी करना मुश्किल होता है, लेकिन खतरे को कम करने के लिए तैयारी जरूरी है। भारत में कई नदियां नेपाल और हिमालयी क्षेत्रों से होकर आती हैं। नेपाल में भारी बारिश या पहाड़ी आपदा का असर सीमावर्ती भारतीय राज्यों तक पहुंच सकता है।
बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में नेपाल से आने वाली नदियों के कारण पहले भी बाढ़ की स्थिति बनती रही है। गंडक, कोसी और बागमती जैसी नदियां दोनों देशों के भूभाग से जुड़ी हुई हैं। इसलिए नेपाल में होने वाली बड़ी जल घटनाओं पर भारत लगातार नजर रखता है।
जलवायु परिवर्तन बढ़ा रहा जोखिम
वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालय दुनिया के सबसे संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में शामिल है। बढ़ता तापमान ग्लेशियरों को प्रभावित कर रहा है। इसके अलावा जंगलों की कटाई, अनियोजित निर्माण और पहाड़ी इलाकों में बढ़ती मानवीय गतिविधियां भी आपदा के प्रभाव को बढ़ा सकती हैं।
पहले जहां बारिश लंबे समय में होती थी, वहीं अब कम समय में अत्यधिक बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे पहाड़ों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
भारत में तैयारियों पर जोर
नेपाल की आपदा के बाद भारत में भी आपदा प्रबंधन एजेंसियां सतर्क रहती हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में नदियों के जलस्तर, मौसम की स्थिति और संभावित खतरे पर नजर रखी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल आपदा आने के बाद राहत कार्य करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए पहले से चेतावनी प्रणाली, सुरक्षित स्थानों की पहचान और स्थानीय लोगों को जागरूक करना जरूरी है।
उत्तर बंगाल के लिए चेतावनी क्यों महत्वपूर्ण
उत्तर बंगाल पर्यटन और आबादी दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां बड़ी संख्या में लोग पहाड़ी इलाकों में रहते हैं और हर साल हजारों पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाएं बड़े नुकसान का कारण बन सकती हैं।
नेपाल की त्रासदी ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि हिमालयी क्षेत्र में प्रकृति के बदलावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आने वाले समय में बेहतर निगरानी, वैज्ञानिक अध्ययन और पड़ोसी देशों के बीच सहयोग ही ऐसे खतरों से निपटने का सबसे बड़ा रास्ता होगा।
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