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नेपाल ने संभाला राहत अभियान, मदद से किया इनकार

Kavita2
28 Aug 2026 11:14 AM IST
नेपाल ने संभाला राहत अभियान, मदद से किया इनकार
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काठमांडू। नेपाल में बुधवार को आई भीषण फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) ने भारी तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 तक पहुंच गई है। वहीं, भोटे कोशी-त्रिशूली कॉरिडोर के आसपास पानी में बह गए या फंसे हुए सैकड़ों लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान लगातार जारी है।

बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल के कई हिस्सों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है और संचार व्यवस्था भी बाधित हुई है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं।

सैकड़ों लोगों की तलाश जारी

अधिकारियों के अनुसार, भोटे कोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों के आसपास बड़ी संख्या में लोग बाढ़ की चपेट में आए हैं। तेज बहाव के कारण कई लोग बह गए, जबकि कई अन्य दुर्गम इलाकों में फंस गए।

नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां, स्थानीय प्रशासन और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की तलाश कर रहे हैं। राहतकर्मी खराब मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद अभियान में जुटे हुए हैं।

भारत समेत कई देशों ने बढ़ाया मदद का हाथ

नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बाद भारत समेत कई देशों ने मदद की पेशकश की है। पड़ोसी देश होने के नाते भारत ने नेपाल को हरसंभव सहायता देने की इच्छा जताई है।

भारत पहले भी नेपाल में आई प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत और बचाव कार्यों में सहयोग करता रहा है। इस बार भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने नेपाल के साथ खड़े होने की बात कही है।

हालांकि, नेपाल सरकार ने फिलहाल विदेशी सहायता लेने से इनकार कर दिया है।

नेपाल ने विदेशी सहायता लेने से किया इनकार

नेपाल सरकार का कहना है कि देश की अपनी सुरक्षा एजेंसियां और राहत तंत्र इस आपदा से निपटने में सक्षम हैं। सरकार ने भरोसा जताया है कि स्थानीय संसाधनों और सुरक्षा बलों की मदद से बचाव अभियान को प्रभावी तरीके से चलाया जा रहा है।

नेपाल का मानना है कि वर्तमान स्थिति को संभालने के लिए उसके पास पर्याप्त क्षमता मौजूद है। इसलिए फिलहाल विदेशी बचाव दलों की जरूरत नहीं है।

हालांकि, नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय सहायता के प्रस्तावों को पूरी तरह खारिज नहीं किया है और भविष्य की परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।

सुरक्षा एजेंसियां संभाल रहीं मोर्चा

नेपाल सरकार ने सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया है। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने, शवों की तलाश और जरूरी सामान पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

कई क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर और अन्य माध्यमों से भी राहत पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना और राहत सामग्री उपलब्ध कराना है।

बाढ़ से बुनियादी ढांचे को नुकसान

फ्लैश फ्लड के कारण नेपाल के कई हिस्सों में भारी नुकसान हुआ है। सड़कें, पुल और स्थानीय ढांचे प्रभावित हुए हैं। कई गांवों का संपर्क मुख्य क्षेत्रों से टूट गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में अचानक आने वाली बाढ़ बेहद खतरनाक होती है, क्योंकि कम समय में पानी का बहाव बहुत तेज हो जाता है और लोगों को बचाव का मौका कम मिलता है।

भारत-नेपाल संबंधों पर नजर

नेपाल में आई आपदा के बीच भारत और नेपाल के संबंधों पर भी नजर बनी हुई है। दोनों देशों के बीच भौगोलिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत हैं। प्राकृतिक आपदाओं के समय दोनों देशों के बीच सहयोग का इतिहास रहा है।

भारत की ओर से सहायता की पेशकश को इसी सहयोग की भावना से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, नेपाल ने अपनी मौजूदा क्षमता के आधार पर राहत अभियान जारी रखने का फैसला किया है।

आपदा के बाद बढ़ी चुनौतियां

मृतकों की संख्या बढ़ने के साथ ही नेपाल के सामने राहत और पुनर्वास की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाना, लापता लोगों को तलाशना और क्षतिग्रस्त क्षेत्रों को दोबारा व्यवस्थित करना सरकार के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी।

फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही हैं और सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

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