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नावी पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार, जानिए वजह
jantaserishta.com
9 Oct 2026 4:16 PM IST

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नई दिल्ली: भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नावी पिल्लै को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया है। नावी पिल्लै दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय में पहली गैर-श्वेत महिला जज रही हैं। उनका करियर रंगभेद के खिलाफ संघर्ष और मानवाधिकारों की रक्षा से जुड़ा रहा है।
शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए मिला सम्मान
नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने नावी पिल्लै के प्रयासों को असाधारण बताते हुए उन्हें 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया है। उनके काम का मुख्य उद्देश्य शांति को बढ़ावा देना और अंतरराष्ट्रीय कानून के महत्व को मजबूत करना रहा है।
समिति के मुताबिक, नावी पिल्लै का काम उनके शुरुआती कानूनी संघर्षों से लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालतों में जज के रूप में दी गई सेवाओं तक फैला हुआ है। उनके पूरे करियर में न्याय और अधिकारों की रक्षा का संदेश दिखाई देता है।
उनका योगदान केवल अदालतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने ऐसे लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी काम किया, जिन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई थी। इसी भूमिका को उनके सम्मान का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है।
नावी पिल्लै ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ लंबा संघर्ष किया। उन्होंने वकील के रूप में उन लोगों का बचाव किया, जो नस्लीय भेदभाव के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। इस दौरान उन्होंने नेल्सन मंडेला सहित कई राजनीतिक बंदियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी।
रंगभेद की व्यवस्था में लोगों के साथ नस्ल के आधार पर भेदभाव किया जाता था। ऐसे माहौल में नावी पिल्लै ने कानून के माध्यम से न्याय और समान अधिकारों की पैरवी की। नोबेल समिति ने उनके शुरुआती कानूनी काम और बाद में अंतरराष्ट्रीय अदालतों में जज के रूप में निभाई गई जिम्मेदारियों को एक महत्वपूर्ण संदेश से जोड़ा है। उनके काम को इस बात के उदाहरण के रूप में देखा गया है कि कानून और न्याय के जरिए मानवाधिकारों की रक्षा की जा सकती है।
दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय में रचा इतिहास
नावी पिल्लै के कानूनी करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय में पहली गैर-श्वेत महिला जज बनना शामिल है। उनकी इस उपलब्धि ने न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी तथा समान अवसरों की दिशा में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया।
वकील के रूप में रंगभेद के खिलाफ संघर्ष करने के बाद न्यायपालिका में उनकी भूमिका ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई। उन्होंने अपने पेशेवर जीवन में कानून और न्याय से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया।
उनका अनुभव दक्षिण अफ्रीका की अदालतों से लेकर अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था तक फैला रहा है। नोबेल समिति ने भी उनके शुरुआती संघर्ष और बाद की न्यायिक सेवाओं को उनके योगदान का अहम हिस्सा माना है।
नावी पिल्लै अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मानवाधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण पद पर काम कर चुकी हैं। वह वर्ष 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त रही थीं। इस पद पर रहते हुए उनका काम मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों के साथ था। उनकी यह भूमिका उनके लंबे कानूनी और न्यायिक अनुभव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
23 दिसंबर 1941 को भारतीय तमिल परिवार में जन्मीं नावी पिल्लै ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ लड़ाई से अपने करियर की पहचान बनाई। वकील, जज और संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में उनकी अलग-अलग भूमिकाएं उनके अनुभव को दर्शाती हैं।
कितनी मिलेगी पुरस्कार राशि और कब होगा समारोह?
2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के साथ नावी पिल्लै को 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना की राशि भी मिलेगी। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 11.66 करोड़ रुपये बताई गई है। उन्हें यह पुरस्कार 10 दिसंबर को ओस्लो में प्रदान किया जाएगा। साहित्य, रसायन विज्ञान, भौतिकी और चिकित्सा के पुरस्कारों के बाद शांति का नोबेल इस सप्ताह घोषित किए जाने वाले पांच प्रमुख पुरस्कारों में पांचवां है।
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