
x
Jeddah : छोटे बच्चों में मस्जिद और धार्मिक संस्कृति के प्रति प्रेम और सम्मान पैदा करने के लिए “मेरी मस्जिद” नामक पहल शुरू की गई है। यह पहल अल-रहमा मस्जिद में एक कम्युनिटी द्वारा चलाई जा रही है और इसे स्थानीय लोग फ्लोटिंग मस्जिद के नाम से भी जानते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य छोटी उम्र से ही बच्चों को मस्जिद और इस्लामिक संस्कृति से जोड़ना और उनमें सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है।
पहल के अंतर्गत बच्चों को मस्जिद की गतिविधियों से परिचित कराया जाता है। इसमें बच्चों को मस्जिद के आंतरिक और बाहरी सौंदर्य के बारे में जानकारी दी जाती है, नमाज और वज़ू का महत्व समझाया जाता है और उन्हें सामूहिक प्रार्थना और कुरान की तालीम जैसी गतिविधियों में शामिल किया जाता है। रंगीन चित्र, कहानियाँ और इंटरैक्टिव सत्र बच्चों को यह समझाने में मदद करते हैं कि मस्जिद केवल पूजा का स्थल नहीं, बल्कि समाज और समुदाय का केंद्र भी है।
अल-रहमा मस्जिद के इमाम ने बताया कि “मेरी मस्जिद” पहल का उद्देश्य बच्चों में धार्मिक और नैतिक मूल्यों के साथ-साथ समाजिक समझ विकसित करना है। उन्होंने कहा कि छोटी उम्र में धार्मिक और सांस्कृतिक ज्ञान देने से बच्चों में अनुशासन, सम्मान और सहिष्णुता की भावना बढ़ती है।
पहल के आयोजक बताते हैं कि बच्चों के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिसमें उन्हें मस्जिद की गतिविधियों और समाजिक पहलुओं के महत्व के बारे में रोचक और सरल तरीके से बताया जाता है। इसमें बच्चों को फ्लोटिंग मस्जिद की कहानी और इसके समुदायिक योगदान के बारे में भी जानकारी दी जाती है।
शिक्षक और माता-पिता इस पहल की सराहना कर रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों में मस्जिद और धार्मिक गतिविधियों के प्रति लगाव पैदा करने के लिए यह पहल महत्वपूर्ण है। कई शिक्षकों ने इसे स्कूलों में भी शामिल करने की सिफारिश की है, ताकि बच्चे नियमित रूप से इस पहल के फायदे ले सकें।
समुदाय के सदस्यों का कहना है कि यह पहल केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं है। बच्चों को सामाजिक मूल्यों, सामुदायिक सहभागिता और दूसरों के प्रति सम्मान सिखाने का भी उद्देश्य इसमें शामिल है। इससे बच्चों में सहिष्णुता और सामूहिकता की भावना भी विकसित होती है।
फ्लोटिंग मस्जिद के आयोजक बताते हैं कि “मेरी मस्जिद” पहल बच्चों को मस्जिद और समुदाय से जोड़ने का स्थायी प्रयास है। उनका कहना है कि यदि बच्चे छोटी उम्र से ही मस्जिद और धार्मिक शिक्षा के प्रति आकर्षित होंगे, तो यह उनके व्यक्तित्व और सोच पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
इस पहल में बच्चों के लिए कई कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। इसमें चित्रकला, कहानी प्रतियोगिता और मस्जिद से जुड़ी अन्य रचनात्मक गतिविधियाँ शामिल हैं। बच्चों को भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और उनके प्रयासों की सराहना की जाती है।
Tagsमाई मस्जिदबच्चों की किताबइस्लामिक शिक्षामस्जिदधार्मिक शिक्षासांस्कृतिक ज्ञानMy MosqueChildren's BookIslamic EducationMosqueReligious EducationCultural Knowledgeजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





