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Washington वॉशिंगटन। कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथ की मुखर आलोचक और कनाडाई नागरिक नैंसी ग्रेवाल की निर्मम हत्या के बाद पूरे देश में महिलाओं की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चिंताएं उठने लगी हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस घटना ने कनाडा और उत्तरी अमेरिका में सक्रिय चरमपंथी नेटवर्क के प्रभाव को भी उजागर किया है।
वॉशिंगटन स्थित ‘ग्लोबल स्ट्रैट व्यू’ के लिए लिखते हुए वकील और लेखक संजय लजार ने कहा कि कई राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों ने खालिस्तानी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने, हिंसक गतिविधियों में शामिल तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और धार्मिक स्थलों से संचालित आतंकी गतिविधियों पर सख्ती की मांग की है। रिपोर्ट के अनुसार, इन संगठनों का प्रभाव कनाडा में गुरुद्वारों के नेटवर्क पर भी माना जाता है, जिन्हें कथित तौर पर अवैध हथियारों, मादक पदार्थों और मानव तस्करी जैसे अपराधों के लिए माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
रिपोर्ट में 3 मार्च की शाम कनाडा में हुई नैन्सी ग्रेवाल की हत्या का जिक्र करते हुए कहा गया है कि वह विंडसर गुरुद्वारा और कनाडा के अन्य हिस्सों में प्रभावशाली लोगों के खिलाफ खुलकर बोलती थीं। उन्होंने पंजाब के कुछ लोगों पर भी खालिस्तानी ताकतों की मदद करने का आरोप लगाया था। बताया गया है कि नैंसी ग्रेवाल को उनके स्थानीय गुरुद्वारे में कई लोगों ने चुप रहने की चेतावनी भी दी थी। वह स्वयं सिख समुदाय से थीं और गुरुद्वारों को कथित रूप से खालिस्तानी आतंकवाद के अड्डों में बदलने के प्रयासों का विरोध करती थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें लगभग 40 बार जान से मारने की धमकियां मिली थीं। नवंबर 2025 में उनके घर पर आगजनी का हमला भी हुआ था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पुलिस सुरक्षा नहीं दी गई। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि विंडसर पुलिस और रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) ने मामले में पर्याप्त कार्रवाई नहीं की, जबकि हमले से जुड़े वीडियो फुटेज और सड़क के कैमरे की रिकॉर्डिंग भी मौजूद थी।
रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि नवंबर 2025 में आगजनी की घटना के बावजूद पुलिस ने मामले में कोई ठोस प्रगति क्यों नहीं की। नैन्सी की मां शिंदर पाल ग्रेवाल ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के घर पर पहले हुए आगजनी हमले के पीछे जो लोग थे, वही हत्या के लिए भी जिम्मेदार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी को मिलने वाली धमकियों की जानकारी पुलिस को बार-बार दी जाती थी, लेकिन इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
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