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मॉस्को तेहरान की बढ़ा रहा ताकत सैन्य सप्लाई को लेकर बड़ा खुलासा

nidhi
19 Aug 2026 6:48 AM IST
मॉस्को तेहरान की बढ़ा रहा ताकत सैन्य सप्लाई को लेकर बड़ा खुलासा
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रूस से ईरान को सैन्य मदद ड्रोन पार्ट्स और विस्फोटकों की सप्लाई का दावा

मॉस्को/तेहरान: रूस और ईरान के बीच सैन्य सहयोग को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, मॉस्को कथित तौर पर कैस्पियन सागर के रास्ते ईरान को ड्रोन के पुर्जे, विस्फोटक सामग्री और सैन्य उपकरण भेज रहा है। यह आपूर्ति ऐसे समय में होने का दावा किया जा रहा है, जब ईरान अपने सैन्य भंडार को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, एक यूरोपीय सरकारी दस्तावेज और पश्चिमी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि रूस से ईरान भेजी जा रही सामग्री में विस्फोटक, गोला-बारूद और ड्रोन कंपोनेंट्स शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन सामानों को कैस्पियन सागर के समुद्री मार्ग से तेहरान तक पहुंचाया जा रहा है।
सैन्य क्षमता बढ़ाने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान लंबे समय से ड्रोन और मिसाइल कार्यक्रम पर काम कर रहा है। ऐसे में रूस से मिलने वाली कथित सैन्य सामग्री उसके रक्षा उत्पादन और हथियार भंडार को दोबारा मजबूत करने में मदद कर सकती है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ड्रोन निर्माण से जुड़े पुर्जे और विस्फोटक सामग्री ईरान की सैन्य क्षमताओं को बहाल करने के लिए भेजी जा रही है। ईरान के ड्रोन कार्यक्रम में शाहेद (Shahed) सीरीज के ड्रोन काफी चर्चित रहे हैं। रूस ने भी यूक्रेन युद्ध के दौरान ईरानी डिजाइन वाले ड्रोन का इस्तेमाल किया है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पर अंतरराष्ट्रीय नजर बनी हुई है।
कैस्पियन सागर मार्ग क्यों महत्वपूर्ण?
रिपोर्टों के अनुसार, रूस और ईरान के बीच कैस्पियन सागर का रास्ता रणनीतिक रूप से अहम है। यह समुद्री मार्ग दोनों देशों को सीधे जोड़ता है और यहां पश्चिमी देशों की सैन्य निगरानी सीमित मानी जाती है। इसी वजह से संवेदनशील सामानों की आवाजाही के लिए इस रास्ते के इस्तेमाल का दावा किया जा रहा है। कैस्पियन सागर रूस, ईरान सहित पांच देशों से घिरा हुआ है। इस क्षेत्र में पश्चिमी नौसैनिक गतिविधियां सीमित होने के कारण सैन्य परिवहन पर नजर रखना चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
रूस-ईरान संबंधों में बढ़ती नजदीकी
रूस और ईरान पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक रूप से करीब आए हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा और तकनीकी सहयोग को लेकर कई रिपोर्टें सामने आती रही हैं। वहीं, पश्चिमी देशों ने दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य संबंधों पर चिंता जताई है। हालांकि, रूस की ओर से इस तरह की सैन्य आपूर्ति को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रिपोर्टों में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
वैश्विक सुरक्षा पर असर
यदि रूस और ईरान के बीच सैन्य सहयोग बढ़ता है तो इसका असर मध्य पूर्व और वैश्विक सुरक्षा समीकरणों पर पड़ सकता है। अमेरिका और उसके सहयोगी पहले से ही ईरान के मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रमों को लेकर चिंता जताते रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, रूस की ओर से संभावित मदद ईरान की सैन्य तैयारियों को प्रभावित कर सकती है और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव ला सकती है।
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