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हूती हमलों के बाद मक्का डिफेंस पैक्ट सक्रिय, सऊदी में तैनात होगी सेना

nidhi
6 Oct 2026 6:35 AM IST
हूती हमलों के बाद मक्का डिफेंस पैक्ट सक्रिय, सऊदी में तैनात होगी सेना
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सऊदी में तेजी से होगी सैन्य तैनाती
रियाद: यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों और क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने अपने संयुक्त रक्षा समझौते के तहत बड़ा कदम उठाया है। तीनों देशों ने सऊदी अरब में सैन्य बलों और क्षमताओं की तेजी से तैनाती की दिशा में तत्काल कदम उठाने पर सहमति जताई है। यह फैसला 5 अक्टूबर को रियाद में हुई आपात बैठक के बाद सामने आया। तीनों देशों ने अगस्त 2026 में मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के मुताबिक सऊदी अरब, पाकिस्तान या तुर्किए में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला तीनों देशों के खिलाफ हमला माना जाएगा। समझौते का उद्देश्य संयुक्त प्रतिरोध क्षमता मजबूत करने और रक्षा सहयोग को बढ़ाना है।
अब हूती हमलों के बीच इस समझौते के तहत सैन्य सहयोग को तेजी से आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के संयुक्त बयान के मुताबिक तीनों देश अपनी सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धताओं को तत्काल लागू करेंगे और सऊदी अरब में सैन्य बलों तथा आवश्यक क्षमताओं की तेजी से तैनाती सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएंगे। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कितने सैनिक तैनात किए जाएंगे और उनकी तैनाती कब तक पूरी होगी।
रिपोर्टों के अनुसार हाल के सप्ताहों में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले तेज किए हैं। इसके साथ ही यमन और लाल सागर से जुड़े रणनीतिक क्षेत्रों में संघर्ष बढ़ने से क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता गहराई है।
इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने कहा था कि सऊदी अरब की रक्षा के लिए पाकिस्तान के पास उपलब्ध क्षमतियां समझौते के तहत इस्तेमाल की जा सकती हैं। हालांकि उस समय उन्होंने यह पुष्टि नहीं की थी कि पाकिस्तानी सेना हूतियों के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई में सीधे शामिल हुई है। सऊदी अरब में सैनिकों की तैनाती पर बनी सहमति पश्चिम एशिया के मौजूदा सुरक्षा समीकरणों में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। तुर्किए नाटो का सदस्य है, जबकि पाकिस्तान परमाणु हथियार संपन्न देश है। ऐसे में दोनों देशों की सैन्य क्षमताओं को सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने वाला यह समझौता क्षेत्र में एक नए रक्षा ढांचे के रूप में सामने आया है।
फिलहाल सबसे अहम सवाल सैनिकों की संख्या, तैनाती की जगह और उनकी भूमिका को लेकर है। संयुक्त बयान में इनका विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। इसलिए यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि तैनात सैनिक हूतियों के खिलाफ सीधे युद्ध में उतरेंगे या उनकी भूमिका मुख्य रूप से सऊदी अरब की सुरक्षा और प्रतिरोध क्षमता मजबूत करने तक सीमित रहेगी।
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