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यूके से आए पार्सल में MDMA आरोपी को 10 साल की सजा

Ratna Netam
4 Oct 2026 5:50 PM IST
यूके से आए पार्सल में MDMA आरोपी को 10 साल की सजा
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सोलन। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की चंडीगढ़ जोनल यूनिट को अंतरराष्ट्रीय पोस्टल पार्सल के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी के मामले में बड़ी सफलता मिली है। सोलन निवासी पंकज शर्मा को MDMA की कमर्शियल मात्रा रखने के मामले में दोषी ठहराया गया है। सोलन के स्पेशल जज-II ने 3 अक्टूबर 2026 को दिए फैसले में आरोपी को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 की धारा 22(c) के तहत दोषी माना।अदालत ने दोषी पंकज शर्मा को **10 साल की सश्रम कारावास** की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर **1 लाख रुपये का जुर्माना** भी लगाया गया है। यह मामला अंतरराष्ट्रीय पोस्टल पार्सल के जरिए साइकोट्रोपिक पदार्थों की कथित तस्करी से जुड़ा था और इसकी जांच NCB की चंडीगढ़ जोनल यूनिट ने की थी।
NCB की ओर से जारी प्रेस नोट के मुताबिक, मामले की शुरुआत 4 जुलाई 2023 को हुई थी। उस समय NCB चंडीगढ़ को एक अंतरराष्ट्रीय पोस्टल पार्सल के बारे में पुख्ता जानकारी मिली थी। यह पार्सल यूनाइटेड किंगडम से भारत पहुंचा था और एजेंसी को इसमें नशीले पदार्थ या साइकोट्रोपिक पदार्थ होने का संदेह था।सूचना मिलने के बाद NCB अधिकारियों ने पार्सल को लेकर कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान एजेंसी ने पार्सल की सामग्री की जांच की। इसके बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर मामले को आगे बढ़ाया गया। जांच में पंकज शर्मा की कथित भूमिका सामने आई और उसके खिलाफ NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।
यूके से आया था संदिग्ध पार्सल
NCB को 4 जुलाई 2023 को यूनाइटेड किंगडम से आए एक अंतरराष्ट्रीय पोस्टल पार्सल के बारे में जानकारी मिली थी। एजेंसी को संदेह था कि पार्सल के जरिए नशीले पदार्थ या साइकोट्रोपिक पदार्थ भारत भेजे गए हैं।अंतरराष्ट्रीय डाक सेवा के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी जांच एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती मानी जाती है। तस्कर कई बार सामान्य दिखने वाले पार्सल के जरिए प्रतिबंधित पदार्थों को एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में खुफिया सूचना, पार्सल की जांच और डिजिटल या दस्तावेजी साक्ष्य अहम भूमिका निभाते हैं।इस मामले में भी NCB को मिली जानकारी के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। एजेंसी ने संदिग्ध पार्सल की जांच की और मामले से जुड़े साक्ष्यों को जुटाया। जांच के बाद आरोपी के खिलाफ अदालत में मामला आगे बढ़ा।
MDMA की कमर्शियल मात्रा रखने का दोष
अदालत ने पंकज शर्मा को MDMA की कमर्शियल मात्रा रखने के आरोप में दोषी पाया। MDMA एक साइकोट्रोपिक पदार्थ है और NDPS एक्ट के तहत इसकी अवैध बरामदगी, कब्जा और तस्करी गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है।इस मामले में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर शर्मा को NDPS एक्ट की धारा 22(c) के तहत दोषी माना। कमर्शियल मात्रा से जुड़े मामलों में कानून के तहत सजा के प्रावधान अपेक्षाकृत कड़े हैं।स्पेशल जज-II, सोलन की अदालत ने मामले में दोषसिद्धि के बाद 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
NCB की जांच में सामने आई भूमिका
मामले की जांच NCB चंडीगढ़ जोनल यूनिट ने की। एजेंसी को मिली शुरुआती जानकारी अंतरराष्ट्रीय पोस्टल पार्सल से जुड़ी थी। जांच के दौरान एजेंसी ने पार्सल और उसमें मौजूद सामग्री से संबंधित तथ्यों को जुटाया।NCB की कार्रवाई का उद्देश्य यह पता लगाना था कि प्रतिबंधित पदार्थ कहां से आया, इसे किसके लिए भेजा गया और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पंकज शर्मा को मामले से जोड़ा गया।अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों पर विचार किया गया। इसके बाद अदालत ने शर्मा को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी पर एजेंसियों की नजर
अंतरराष्ट्रीय डाक और कूरियर नेटवर्क का इस्तेमाल मादक पदार्थों की तस्करी के लिए किए जाने के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में देश की सीमाओं के साथ-साथ पोस्टल और कूरियर नेटवर्क की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।NCB समेत विभिन्न जांच एजेंसियां विदेश से आने वाले संदिग्ध पार्सल की जानकारी मिलने पर उनकी जांच करती हैं। किसी पार्सल में प्रतिबंधित पदार्थ मिलने पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है।इस मामले में भी यूके से आए पार्सल को लेकर मिली जानकारी के बाद NCB ने कार्रवाई की और जांच को आगे बढ़ाया। अदालत द्वारा आरोपी को दोषी ठहराए जाने के बाद मामले में न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है।
NDPS एक्ट के तहत कड़ी सजा
नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत प्रतिबंधित मादक और साइकोट्रोपिक पदार्थों से जुड़े अपराधों के लिए कड़े प्रावधान हैं। पदार्थ की मात्रा के आधार पर अपराध की गंभीरता और सजा निर्धारित होती है।MDMA जैसे साइकोट्रोपिक पदार्थ की कमर्शियल मात्रा से जुड़े मामले में धारा 22(c) के तहत कार्रवाई की जाती है। इस मामले में अदालत ने दोषी को 10 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।NCB की कार्रवाई यह भी दर्शाती है कि एजेंसी अंतरराष्ट्रीय डाक मार्गों के जरिए होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी पर नजर रख रही है। विदेश से आने वाले पार्सल में संदिग्ध सामग्री मिलने पर एजेंसी सूचना के आधार पर जांच और कार्रवाई करती है।
2023 से चल रही थी कार्रवाई
यह मामला जुलाई 2023 में सामने आया था। 4 जुलाई को NCB चंडीगढ़ को यूके से आए एक संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय पोस्टल पार्सल की जानकारी मिली। इसके बाद शुरू हुई जांच और कानूनी प्रक्रिया करीब तीन साल बाद 3 अक्टूबर 2026 के अदालत के फैसले तक पहुंची।अदालत के फैसले के बाद पंकज शर्मा को दोषी ठहराया गया और उसे 10 साल की सश्रम कारावास की सजा दी गई। साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।मामले में सजा सुनाए जाने के बाद NCB की चंडीगढ़ जोनल यूनिट की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय पोस्टल माध्यम से होने वाली कथित ड्रग तस्करी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।कुल मिलाकर, यूके से आए संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय पोस्टल पार्सल से शुरू हुई जांच अब अदालत के फैसले तक पहुंच गई है। सोलन के स्पेशल जज-II ने पंकज शर्मा को MDMA की कमर्शियल मात्रा रखने के मामले में NDPS एक्ट की धारा 22(c) के तहत दोषी माना और 10 साल की सश्रम कारावास तथा एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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