
पोर्ट लुईस/नई दिल्ली: हिंद महासागर में स्थित मॉरीशस (Mauritius), जो लंबे समय से भारत का रणनीतिक और आर्थिक साझेदार रहा है, अब एक बार फिर भारत की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के आगामी दौरे से मॉरीशस को अपने आर्थिक समझौतों में नई जान फूंकने की उम्मीद है।
भारत से क्यों बढ़ रही हैं मॉरीशस की उम्मीदें?
मॉरीशस लंबे समय से भारत के साथ डबल टैक्सेशन एवॉयडेंस कन्वेंशन (DTAC) और व्यापक आर्थिक सहयोग और भागीदारी समझौते (CEPA) को लेकर संशोधन की मांग कर रहा है। इन समझौतों के तहत मॉरीशस को भारत के साथ निवेश और व्यापार में कई लाभ मिलते हैं, लेकिन 2016 में भारत द्वारा टैक्स नियमों में बदलाव किए जाने के बाद से मॉरीशस से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में भारी गिरावट आई है।
2016 से पहले मॉरीशस भारत में विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत था, लेकिन नए नियम लागू होने के बाद यह स्थिति कमजोर हो गई। अब, मॉरीशस चाहता है कि भारत अपने टैक्स समझौतों की शर्तों को फिर से लचीला बनाए, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सके।
FDI में गिरावट से क्यों परेशान है मॉरीशस?
2016 से पहले मॉरीशस भारत में FDI का प्रमुख केंद्र था, क्योंकि टैक्स नियम उसे अन्य देशों के मुकाबले अधिक छूट देते थे।
भारत द्वारा टैक्स सुधारों के कारण मॉरीशस से आने वाले निवेश में भारी गिरावट आई।
अब, मॉरीशस चाहता है कि भारत इस समझौते को दोबारा संशोधित करे ताकि निवेशकों के लिए यह फिर से आकर्षक बन सके।
मॉरीशस को क्या उम्मीदें हैं?
DTAC (Double Taxation Avoidance Agreement) में राहत – मॉरीशस चाहता है कि टैक्स समझौते को निवेशकों के लिए फिर से फायदेमंद बनाया जाए।
CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) का विस्तार – मॉरीशस को उम्मीद है कि यह समझौता भारत के साथ उसके व्यापार को नया बढ़ावा देगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और टूरिज्म में निवेश – भारत से मॉरीशस को पर्यटन, बंदरगाह और अन्य बुनियादी ढांचे में निवेश की भी उम्मीद है।
क्या मोदी का दौरा बदल सकता है हालात?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को लेकर मॉरीशस की सरकार और उद्योग जगत उत्साहित है। उन्हें उम्मीद है कि इस यात्रा के दौरान भारत FDI और टैक्स समझौतों को लेकर कोई सकारात्मक घोषणा कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत मॉरीशस को कुछ हद तक टैक्स रियायतें और व्यापारिक सहयोग देने पर सहमत होता है, तो यह दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा होगा।





