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नेपाल बाढ़ में भारी तबाही 160 मौतें 844 लोग लापता

nidhi
27 Aug 2026 6:35 AM IST
नेपाल बाढ़ में भारी तबाही 160 मौतें 844 लोग लापता
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नेपाल में जलप्रलय का कहर

नई दिल्ली : नेपाल और तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। अचानक आई फ्लैश फ्लड और मलबे के सैलाब में अब तक 160 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 844 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। आपदा के बाद नेपाल में राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है।

बताया जा रहा है कि यह विनाशकारी बाढ़ नेपाल-तिब्बत बॉर्डर क्षेत्र में आई, जहां भोटेकोशी और
त्रिशूली नदी
में अचानक जलस्तर बढ़ गया। तेज बहाव के कारण कई गांव जलमग्न हो गए और बड़ी संख्या में घर, वाहन तथा सरकारी ढांचे बह गए। पानी का वेग इतना तेज था कि कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित निकलने का मौका तक नहीं मिला। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बाढ़ की वजह पहाड़ी क्षेत्र में हुए बड़े भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़े घटनाक्रम को माना जा रहा है। पहाड़ से भारी मात्रा में मलबा नदी में गिरने के बाद पानी का दबाव बढ़ गया और अचानक विनाशकारी बाढ़ आ गई। इस आपदा ने नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है।
इस त्रासदी में सबसे ज्यादा चिंता लापता लोगों को लेकर है। नेपाल सरकार के अनुसार, लापता लोगों की सूची में कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या भारतीयों की है। कई भारतीय श्रद्धालु और यात्री कैलाश मानसरोवर यात्रा तथा अन्य धार्मिक यात्राओं के लिए नेपाल पहुंचे थे, जो इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गए। बाढ़ से सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कई प्रमुख मार्ग टूट गए हैं, जिससे राहत दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के कारण बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
भारत ने नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत सरकार की ओर से राहत सामग्री और जरूरी सहायता भेजी गई है। दोनों देशों की एजेंसियां लापता भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और राहत कार्यों में सहयोग कर रही हैं।
नेपाल प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में लोगों को सतर्क रहने और नदियों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि बचाव अभियान लगातार जारी है और मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है। इस भीषण प्राकृतिक आपदा ने हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते जलवायु जोखिम और आपदा प्रबंधन की चुनौतियों को फिर सामने ला दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे संवेदनशील इलाकों में बेहतर चेतावनी प्रणाली और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं में जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।
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