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JEDDAH: यमन में मानवतावादी अभियान मसम प्रोजेक्ट ने हाल ही में युद्ध के दौरान छूटे हुए 1,696 विस्फोटक अवशेषों (Explosive Remnants of War) को सुरक्षित रूप से नष्ट कर दिया है, जिससे भारी संख्या में नागरिकों की जान और सुरक्षा बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस कार्रवाई का लक्ष्य यमन में रहने वाले आम लोगों को विस्फोटकों से होने वाले खतरों से बचाना और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित बनाना है।
मसम प्रोजेक्ट सऊदी अरब द्वारा समर्थित एक बहुपक्षीय मानवीय सहायता कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य यमन के मुक्त किए गए इलाकों से लैंडमाइन, अनविस्फोटित गोले, बम और अन्य विस्फोटक अवशेष हटाना है। यह पहल 2018 में शुरू की गई थी और तब से यह लगातार युद्ध के खतरनाक अवशेषों को खत्म करने में लगा हुआ है। प्रोजेक्ट की टीम स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित कर्मियों, विशेषज्ञों और उपकरणों की सहायता से जोखिमपूर्ण क्षेत्रों की पहचान कर वहां से विस्फोटकों को सुरक्षित रूप से निकालती और नष्ट करती है।
इस ताज़ा ऑपरेशन में शामिल 1,696 विस्फोटक अवशेषों में लैंडमाइन और युद्ध के दौरान प्रयोग किए गए अनविस्फोटित हथियार शामिल थे, जिन्हें ऊष्मायुद्ध निपटान के मानक प्रक्रियाओं के तहत निष्क्रिय किया गया और सुरक्षित तरीके से नष्ट किया गया। यह कार्रवाई यमन के ग़ैल बिन यामीन क्षेत्र में संपन्न हुई, जहां पहले भारी संघर्ष और खतरनाक विस्फोटकों की उपस्थिति से आम नागरिकों के लिए चलना‑फिरना बेहद जोखिमपूर्ण था।
मसम टीमों ने बताया कि इस तरह के ऑपरेशन से न केवल स्थानीय आबादी के लिए मौत और चोट का जोखिम कम होता है, बल्कि बच्चों, महिलाओं और वृद्ध नागरिकों के लिए सुरक्षित आवागमन, खेती, स्कूल और बुनियादी सेवाओं तक पहुंच भी सुगम होती है। अवशेषों का यह विनाश युद्ध के लम्बे समय बाद भी पैदा होने वाले खतरों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
यमन में फैले युद्ध के कारण सैकड़ों गाँव, रास्ते, खेत और आवासीय इलाके विस्फोटक अवशेषों से भरे रहे हैं, जो संघर्ष के बाद भी लोगों के जीवन में खतरे बनकर खड़े थे। मिसाइलों, बमों और लैंडमाइनों के अवशेषों के कारण यमन में सैकड़ों नागरिक घायल हुए हैं या अपनी जान गंवाई है, और कई गांवों के लोग अपने घरों में लौटने में असमर्थ रहे हैं। ऐसे में मसम प्रोजेक्ट की कार्रवाइयों ने यमन के मुक्त इलाकों को धीरे‑धीरे सुरक्षित बनाने में मदद की है।
मसम प्रोजेक्ट के संचालन में स्थानीय कर्मचारियों के साथ‑साथ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जो टीमों को प्रशिक्षित करते हैं और विस्फोटकों की पहचान, निकालने और सुरक्षित नष्ट करने के तकनीकी कौशल प्रदान करते हैं। यह टीम आईईडी (IED), अनविस्फोटित गोले (UXO) और अन्य खतरनाक अवशेषों को हटाने के लिए विशेष उपकरण और प्रक्रियाएँ अपनाती है, जो मानवीय मानकों के अनुरूप होती हैं।
प्रोजेक्ट के संचालकों के अनुसार, युद्ध के दौरान और बाद में यह अवशेष यमन की नागरिक आबादी के लिए सबसे बड़ा खतरा बने हुए थे, खासकर बच्चों और ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों के लिए। इन अवशेषों को हटाने से लोगों के लिए खेतों में काम करने, स्कूल जाने और सामान्य जीवन जीने की संभावनाएँ बेहतर होती हैं।
यह अभियान यमन में स्थिरता और पुनर्वास की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। मसम प्रोजेक्ट का मानना है कि युद्ध के अवशेषों को हटाकर ही लंबे समय तक संघर्ष प्रभावित समुदायों को स्थायी सुरक्षा और पुनर्निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
यमन के संघर्ष ने पिछले कई वर्षों से देश के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं और नागरिक जीवन को भारी नुकसान पहुँचाया है। ऐसे में युद्ध अवशेषों का यह विनाश यमनियों को भविष्य में होने वाले दुर्घटनाओं और चोटों से बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। मसम प्रोजेक्ट की टीमें आगे भी इसी तरह के ऑपरेशन जारी रखेंगी ताकि विस्फोटक खतरों को पूरी तरह खत्म किया जा सके और सुरक्षित जीवन सुनिश्चित किया जा सके।
समग्र रूप से देखा जाए तो यह कार्रवाई यमन में मानवीय राहत और सुरक्षा को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो युद्ध के खतरनाक अवशेषों से स्थानीय आबादी को समाधान प्रदान करने की दिशा में एक ठोस कदम साबित होती है।
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