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वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ऐसे समय में की गई जब अर्थव्यवस्था पर बड़े झटके की आशंका थी, लेकिन परमाणु हथियार हासिल करने से तेहरान को रोकना ज्यादा जरूरी था।
फ्लोरिडा में वरिष्ठ नागरिकों के एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि इस कदम से शेयर बाजार में 25 फीसदी तक गिरावट आ सकती है और तेल की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं, “लेकिन हमारे पास कोई विकल्प नहीं था। हम उन्हें परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दे सकते।”
ट्रंप ने बताया कि इस ऑपरेशन में बी-2 स्पिरिट बमवर्षकों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई से ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान हुआ है—उसकी नौसेना, वायुसेना और एयर डिफेंस सिस्टम लगभग खत्म हो चुके हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान का परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ता, तो इजरायल, मध्य पूर्व और यहां तक कि यूरोप पर भी गंभीर खतरा मंडराता। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कार्रवाई से पहले आर्थिक मामलों से जुड़े अधिकारियों को स्थिति के बारे में बताया था। उन्होंने दावा किया कि शेयर बाजार मजबूत बना हुआ है और अर्थव्यवस्था पर तत्काल बड़ा असर नहीं पड़ा।
उन्होंने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का जिक्र करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को महत्वपूर्ण बताया, जहां से दुनिया को लगभग 20 फीसदी तेल की आपूर्ति होती है। ट्रंप के अनुसार, जब वहां से सप्लाई सामान्य होगी तो पेट्रोल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
ट्रंप ने मजबूत अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को साथ लेकर चलने की रणनीति पर जोर दिया और कहा कि अमेरिका ने पहले अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया और फिर सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए। उन्होंने नाटो सहयोगियों की आलोचना करते हुए कहा कि इस कार्रवाई में अमेरिका को कोई खास मदद नहीं मिली, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि “हमें इसकी जरूरत भी नहीं थी।”
अंत में ट्रंप ने कहा कि सैन्य अभियान अभी जारी है और अंतिम नतीजों पर पहुंचने में समय लगेगा। उन्होंने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और इसके वैश्विक तेल बाजार व सुरक्षा पर असर को भी रेखांकित किया।
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