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नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो गुरुवार को अपना भारत दौरा समाप्त कर स्वदेश के लिए रवाना हो गए। भारत से रवाना होने के बाद उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बातचीत हुई है। रुबियो ने अपने दौरे को सकारात्मक बताते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग का संकेत दिया।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अमेरिकी विदेश मंत्री ने लिखा, "अभी भारत से रवाना हुआ हूं; इस क्षेत्र में हमारी आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाया है।"उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भारत और अमेरिका व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर लगातार बातचीत कर रहे हैं।
भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने पर जोर
मार्को रुबियो की भारत यात्रा का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाना था। इस दौरान उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की।मुंबई में हुई बैठक के दौरान व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, नई तकनीक और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
एस. जयशंकर के साथ अहम बैठक
भारत दौरे के दौरान मार्को रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत की। बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया।रुबियो ने इस मुलाकात के बाद कहा था कि दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग को लेकर बातचीत की है। साथ ही भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के महत्व पर भी सहमति जताई गई।जयशंकर ने भी बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा कि व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार समझौते पर चर्चा
मार्को रुबियो की यात्रा के दौरान ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय रहा। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ाने और आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने पर जोर दे रहा है।रुबियो ने गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस के विशाल तेल शोधन परिसर का भी दौरा किया। इस दौरान वेनेजुएला से कच्चे तेल की आपूर्ति और रिफाइनिंग की संभावनाओं पर चर्चा हुई।दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ी है। हालांकि, समझौते को अंतिम रूप देने की औपचारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
भारत, अमेरिका और यूएई के बीच त्रिपक्षीय चर्चा
मुंबई में मार्को रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ भी बैठक की।इस त्रिपक्षीय बातचीत में क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श किया गया।रुबियो ने बैठक के बाद कहा कि तीनों देशों के बीच साझा आर्थिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए उपयोगी चर्चा हुई है।
रक्षा और नई तकनीक में सहयोग बढ़ाने की कोशिश
भारत और अमेरिका के संबंधों में रक्षा तथा प्रौद्योगिकी सहयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। दोनों देश रक्षा उपकरणों, अत्याधुनिक तकनीक, नागरिक परमाणु सहयोग और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।बातचीत के दौरान अमेरिकी पक्ष ने भारत द्वारा अमेरिकी तकनीक और रक्षा प्रणालियों की खरीद बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया।इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर भी रुचि दिखाई गई।
भारत दौरे से रणनीतिक साझेदारी को नई गति
मार्को रुबियो का यह दौरा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्कों की निरंतरता का हिस्सा रहा। हालांकि व्यापार और ऊर्जा से जुड़े कुछ मुद्दों पर मतभेद मौजूद हैं, लेकिन दोनों पक्ष बातचीत के माध्यम से सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।रुबियो के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन भारत के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को अपनी क्षेत्रीय प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण स्थान दे रहा है।अब आने वाले समय में प्रस्तावित व्यापार समझौते, ऊर्जा सहयोग और रक्षा संबंधी चर्चाओं के ठोस परिणामों पर दोनों देशों की नजर रहेगी।
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