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ट्रेड टेक्नोलॉजी और टैलेंट पर भारत स्विट्जरलैंड की बड़ी बातचीत

Ratna Netam
5 Oct 2026 7:03 PM IST
ट्रेड टेक्नोलॉजी और टैलेंट पर भारत स्विट्जरलैंड की बड़ी बातचीत
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नई दिल्ली। भारत और स्विट्जरलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए व्यापार, तकनीक और प्रतिभा यानी ‘3Ts’ पर विशेष ध्यान देने की दिशा में बातचीत आगे बढ़ाई है। विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विस राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता के बाद इसकी जानकारी दी। भारत के विदेश नीति प्रशिक्षण ढांचे में भी Trade, Technology और Talent को विकास-कूटनीति के महत्वपूर्ण आयामों के रूप में रेखांकित किया गया है।हैदराबाद हाउस में दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई। इसके बाद प्रेस को जानकारी देते हुए सिबी जॉर्ज ने कहा कि स्विस राष्ट्रपति की यह यात्रा भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों में उच्च स्तरीय संपर्कों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि करीब एक दशक बाद स्विट्जरलैंड के किसी राष्ट्रपति की भारत की यह पहली द्विपक्षीय यात्रा है। इससे पहले अगस्त 2017 में तत्कालीन स्विस राष्ट्रपति डोरिस ल्यूथार्ड ने भारत का दौरा किया था।
ट्रेड, टेक्नोलॉजी और टैलेंट पर फोकस
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच बातचीत में ‘3Ts’ यानी ट्रेड, टेक्नोलॉजी और टैलेंट को प्रमुख आधार के रूप में सामने रखा गया। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के साथ नई तकनीकों और कुशल प्रतिभाओं से जुड़े अवसरों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।व्यापार और निवेश भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों का पहले से महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच मार्च 2024 में व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौता (TEPA) हुआ था। EFTA में स्विट्जरलैंड के अलावा नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार TEPA में 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजन की प्रतिबद्धता शामिल है।ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदा बातचीत में व्यापार के साथ तकनीक और प्रतिभा पर दिया गया जोर आर्थिक साझेदारी को व्यापक बनाने की दिशा में देखा जा रहा है।
लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रपति की द्विपक्षीय यात्रा
सिबी जॉर्ज ने स्विस राष्ट्रपति की यात्रा को दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के ऐतिहासिक संदर्भ से भी जोड़ा। उन्होंने बताया कि राष्ट्राध्यक्ष स्तर की द्विपक्षीय यात्राओं में लंबे अंतराल के बाद अब दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय संपर्कों को नई गति मिल रही है।हालांकि इस दौरान दोनों देशों के नेताओं और मंत्रियों के बीच विभिन्न मंचों पर मुलाकातें होती रही हैं। विदेश मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने दिसंबर 2023 में COP28 के दौरान तत्कालीन स्विस राष्ट्रपति एलेन बेर्सेट से मुलाकात की थी। उस बैठक में व्यापार, निवेश, तकनीक, स्वास्थ्य, शिक्षा, आईटी, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।
दावोस भी संबंधों की अहम कड़ी
भारत और स्विट्जरलैंड के उच्च स्तरीय संपर्कों में दावोस में आयोजित होने वाला वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम भी अहम मंच रहा है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल नियमित रूप से इस वैश्विक मंच में भाग लेता रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार जनवरी 2025 में दावोस की वार्षिक बैठक में भारत का उस समय तक का सबसे बड़ा आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ था।स्विट्जरलैंड वैश्विक वित्त, तकनीक, इनोवेशन और अनुसंधान के महत्वपूर्ण केंद्रों में शामिल है। ऐसे में दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय राजनीतिक संपर्कों के साथ आर्थिक और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर लगातार बातचीत होती रही है।
पहले भी कई क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच द्विपक्षीय बातचीत के लिए कई संस्थागत व्यवस्थाएं भी मौजूद हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों के बीच विदेश कार्यालय परामर्श की व्यवस्था 1996 में स्थापित हुई थी। इसका नवीनतम दौर फरवरी 2025 में नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। इसके अलावा संयुक्त आर्थिक आयोग और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर संयुक्त समिति जैसे मंच भी दोनों देशों के सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए काम करते हैं।दोनों देशों के बीच विज्ञान एवं तकनीक, शिक्षा, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में लंबे समय से संपर्क बना हुआ है। अब ‘3Ts’ के जरिए इन्हीं क्षेत्रों को एक व्यापक ढांचे में आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने की कोशिश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन के बीच हुई बातचीत को भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों में उच्च स्तरीय राजनीतिक संपर्कों की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है। व्यापार और निवेश के अलावा तकनीक तथा प्रतिभा पर फोकस से दोनों देशों के बीच आर्थिक और ज्ञान आधारित साझेदारी के नए अवसर खुल सकते हैं।विदेश मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच मंत्री स्तर के संपर्क भी लगातार बने रहे हैं। गाइ पार्मेलिन ने अक्टूबर 2022 में भारत का दौरा किया था और मार्च 2024 में वह भारत-EFTA TEPA पर हस्ताक्षर के लिए भी भारत आए थे।अब राष्ट्रपति स्तर की यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत से दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय संवाद को और आगे बढ़ाने पर जोर है। ट्रेड, टेक्नोलॉजी और टैलेंट के तीन प्रमुख स्तंभों के जरिए भारत और स्विट्जरलैंड आने वाले समय में अपने आर्थिक, तकनीकी और लोगों के बीच संबंधों को विस्तार देने की दिशा में काम कर सकते हैं।
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