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ईरान का बड़ा बयान अमेरिकी बेस क्षेत्रीय सुरक्षा में नाकाम

Ratna Netam
29 Sept 2026 4:40 PM IST
ईरान का बड़ा बयान अमेरिकी बेस क्षेत्रीय सुरक्षा में नाकाम
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तेहरान। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल होसैन मोहेब्बी ने मंगलवार को पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मौजूदगी को लेकर कड़ा बयान दिया। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक मोहेब्बी ने दावा किया कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे मेजबान देशों को सुरक्षा देने में नाकाम रहे हैं और इसके बजाय अस्थिरता तथा असुरक्षा का कारण बने हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों और दबाव के बावजूद ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध बनाए रखने और उन्हें मजबूत करने की नीति पर आगे बढ़ता रहेगा।
मोहेब्बी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पड़ोसी देशों को संबोधित करते हुए कहा कि क्षेत्र की सरकारों और लोगों ने हाल की परिस्थितियों से यह समझ लिया है कि विदेशी सैन्य अड्डों की मौजूदगी सुरक्षा की गारंटी नहीं है। उनका कहना था कि अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को लंबे समय तक क्षेत्रीय सुरक्षा से जोड़कर पेश किया गया, लेकिन ईरान के नजरिए में हालिया संघर्षों ने इस धारणा पर सवाल खड़े किए हैं।IRGC प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों ने उन देशों को वह सुरक्षा नहीं दी, जिसकी अपेक्षा की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके विपरीत इन सैन्य ठिकानों की मौजूदगी ने संबंधित देशों को क्षेत्रीय तनाव का हिस्सा बना दिया है। यह ईरान और IRGC का आकलन है। अमेरिका अपनी क्षेत्रीय सैन्य मौजूदगी को लंबे समय से सहयोगी देशों की रक्षा, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय खतरों से निपटने की व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत करता रहा है।
मोहेब्बी ने कहा कि ईरान पड़ोसी देशों को अपना दुश्मन नहीं मानता। उनका कहना था कि तेहरान और आसपास के देशों के बीच ऐतिहासिक, धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध हैं और ईरान इन रिश्तों को बनाए रखना चाहता है। इससे पहले भी मोहेब्बी ने कहा था कि ईरान अपने पड़ोसी देशों और उनकी जमीन पर मौजूद अमेरिकी सैन्य सुविधाओं के बीच अंतर करता है। उन्होंने दावा किया था कि ईरान का टकराव क्षेत्रीय देशों के बजाय अमेरिकी सैन्य मौजूदगी से है।IRGC प्रवक्ता के हालिया बयानों में अमेरिका की सैन्य भूमिका पर लगातार सवाल उठाए गए हैं। 22 सितंबर को IRNA को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया था कि हाल के संघर्ष ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों, खुफिया क्षमताओं और फारस की खाड़ी में अमेरिकी मौजूदगी की कमजोरियां उजागर की हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि ईरान युद्ध की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है, हालांकि राष्ट्रीय हितों की जरूरत होने पर बातचीत का विकल्प भी खुला रखा जा सकता है।
अमेरिकी सैन्य शक्ति को लेकर मोहेब्बी के दावों का स्वतंत्र सत्यापन हर मामले में संभव नहीं है। अमेरिकी और ईरानी अधिकारी हाल के महीनों में सैन्य अभियानों, नुकसान और रणनीतिक नियंत्रण को लेकर एक-दूसरे से अलग दावे करते रहे हैं। मंगलवार को भी मोहेब्बी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान और क्षेत्रीय संघर्ष को लेकर की गई टिप्पणियों की आलोचना की। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी दावों को खारिज किया।आर्थिक प्रतिबंधों पर मोहेब्बी ने कहा कि अमेरिकी दबाव के बावजूद ईरान पड़ोसी देशों के साथ संपर्क और व्यापारिक संबंध खत्म नहीं करेगा। ईरानी नेतृत्व पिछले कुछ सप्ताह से इसी तरह की नीति पर जोर देता रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने 14 सितंबर को कहा था कि तेहरान अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध बनाए हुए है और अमेरिका की ओर से व्यापारिक साझेदारों पर प्रतिबंध लागू करने का दबाव डाला जा रहा है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी सितंबर में पड़ोसी और मुस्लिम देशों के साथ संबंध मजबूत करने की बात कह चुके हैं। उन्होंने कहा था कि तेहरान क्षेत्रीय देशों के साथ रिश्तों को और आगे बढ़ाना चाहता है।दूसरी तरफ अमेरिका ने हाल के महीनों में ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ाया है। अगस्त में वॉशिंगटन ने ईरान से जुड़े दर्जनों व्यक्तियों, कंपनियों और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का कहना है कि प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरानी सरकार की आय और उसकी सैन्य गतिविधियों के लिए उपलब्ध आर्थिक संसाधनों को सीमित करना है। ईरान इन कदमों को आर्थिक युद्ध और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ दबाव की नीति बताता है।पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की भूमिका लंबे समय से ईरान और अमेरिका के बीच विवाद का विषय रही है। अमेरिका के कई क्षेत्रीय साझेदारों के यहां अमेरिकी सैनिक और सैन्य सुविधाएं मौजूद हैं। वॉशिंगटन इन्हें क्षेत्रीय रक्षा और अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताता है, जबकि ईरान लगातार विदेशी सैन्य उपस्थिति कम करने और क्षेत्रीय देशों द्वारा खुद की सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने की वकालत करता रहा है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अगस्त में इसी तरह का तर्क देते हुए कहा था कि हालिया युद्ध ने विदेशी सैन्य मौजूदगी पर निर्भर सुरक्षा मॉडल की सीमाएं उजागर की हैं। उन्होंने दावा किया था कि अमेरिकी ठिकानों की मौजूदगी वाले देश संघर्ष से ज्यादा प्रभावित हुए। यह भी ईरानी सरकार का दावा है और अमेरिका इससे अलग आकलन रखता है।मोहेब्बी के ताजा बयान से साफ है कि ईरान अपनी सुरक्षा नीति में दो संदेश साथ-साथ आगे बढ़ा रहा है। एक तरफ वह क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को चुनौती दे रहा है, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी देशों के साथ राजनीतिक और आर्थिक संबंध जारी रखने पर जोर दे रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों, क्षेत्रीय सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी विवाद के बीच आने वाले समय में ईरान-अमेरिका संबंधों के साथ तेहरान के खाड़ी देशों से रिश्ते भी क्षेत्रीय राजनीति के प्रमुख मुद्दे बने रहेंगे।
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