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बीजिंग। चीन की विश्व प्रसिद्ध टेराकोटा आर्मी को लेकर एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि करीब 2,200 साल पहले चीन के पहले सम्राट किन शी हुआंग के लिए बनाई गई मिट्टी के योद्धाओं की विशाल सेना के निर्माण में महिलाओं और बच्चों की भी महत्वपूर्ण भागीदारी रही होगी। अब तक आम धारणा थी कि इन विशाल मूर्तियों का निर्माण मुख्य रूप से वयस्क पुरुष कारीगरों ने किया था, लेकिन नए अध्ययन ने इस मान्यता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।'जर्नल ऑफ कल्चरल हेरिटेज' में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, जांचे गए प्राचीन उंगलियों के निशानों में लगभग 32.7 प्रतिशत वयस्क महिलाओं, 22.3 प्रतिशत 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और 45 प्रतिशत वयस्क पुरुषों की भागीदारी का अनुमान मिला है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े पूरी टेराकोटा आर्मी बनाने वाले मजदूरों का निश्चित अनुपात नहीं, बल्कि अध्ययन किए गए उंगलियों के निशानों पर आधारित सांख्यिकीय अनुमान हैं।
1974 में किसानों ने खोजी थी मिट्टी की रहस्यमयी सेना
टेराकोटा आर्मी की खोज 29 मार्च 1974 को चीन के शानक्सी प्रांत में स्थित शियान शहर के पास स्थानीय किसानों ने की थी। जमीन के नीचे मिली इंसानों के आकार की हजारों मिट्टी की मूर्तियों ने दुनिया भर के पुरातत्वविदों को हैरान कर दिया था।यह विशाल सेना चीन के पहले सम्राट किन शी हुआंग के मकबरे से संबंधित है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, इन मूर्तियों को सम्राट की मृत्यु के बाद परलोक में उनकी रक्षा करने के उद्देश्य से बनाया गया था।टेराकोटा आर्मी में सैनिकों, घोड़ों और सैन्य संरचनाओं की मूर्तियां शामिल हैं। हजारों मूर्तियों की बनावट और उनकी कलात्मक विशेषताएं प्राचीन चीनी सभ्यता की तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करती हैं।
उंगलियों के निशानों से सामने आया चौंकाने वाला सच
नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने टेराकोटा मूर्तियों पर सुरक्षित प्राचीन उंगलियों के निशानों का विश्लेषण किया। शोधकर्ताओं ने मकबरा परिसर के पहले गड्ढे के एक सीमित क्षेत्र से 36 मूर्तियों पर मौजूद 79 स्पष्ट निशानों का अध्ययन किया।इसके लिए बायेजियन सांख्यिकीय मॉडल का इस्तेमाल किया गया। उंगलियों की रेखाओं की चौड़ाई के आधार पर निशान छोड़ने वाले लोगों की संभावित उम्र और लिंग का अनुमान लगाया गया।नतीजों से संकेत मिला कि मूर्तियों के निर्माण में वयस्क पुरुषों के अलावा महिलाओं और किशोर उम्र से कम बच्चों की भी भागीदारी रही होगी।
क्या प्राचीन चीन में बच्चों से भी कराया जाता था काम?
अध्ययन के निष्कर्षों ने प्राचीन चीन की श्रम व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। यदि इन अनुमानों की पुष्टि आगे के शोध में होती है, तो यह संकेत मिलेगा कि विशाल शाही निर्माण परियोजनाओं में समाज के विभिन्न आयु वर्गों के लोग शामिल होते थे।शोधकर्ताओं के अनुसार, प्राचीन चीनी दस्तावेजों और वस्तुओं पर मिले कुछ अभिलेख भी महिलाओं और बच्चों की उत्पादन कार्यों में भागीदारी की ओर संकेत करते हैं।हालांकि, अध्ययन से यह निर्धारित नहीं होता कि बच्चों ने स्वेच्छा से काम किया था या उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया था। इसलिए इसे बाल श्रम की परिस्थितियों का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता।
वैज्ञानिकों ने अध्ययन की सीमाएं भी बताईं
शोधकर्ताओं ने स्वीकार किया है कि अध्ययन के लिए इस्तेमाल किए गए उंगलियों के निशानों की संख्या सीमित थी। इसके अलावा सभी निशान टेराकोटा आर्मी के एक ही हिस्से से प्राप्त किए गए थे।संभव है कि कुछ निशान एक ही व्यक्ति ने छोड़े हों। आधुनिक आबादी के आंकड़ों के आधार पर प्राचीन व्यक्तियों की उम्र और लिंग का अनुमान लगाने में भी त्रुटि की संभावना रहती है।इसी कारण वैज्ञानिकों ने महिलाओं और बच्चों की भागीदारी संबंधी प्रतिशत को अंतिम ऐतिहासिक तथ्य मानने के बजाय आगे जांच की आवश्यकता बताई है।
इतिहास के सबसे बड़े पुरातात्विक रहस्यों में शामिल
टेराकोटा आर्मी दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजों में गिनी जाती है। इस विशाल निर्माण में हजारों मूर्तियों को तैयार करने, मिट्टी को आकार देने और उन्हें पकाने जैसी जटिल प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया गया थानया शोध इस बात को समझने में मदद कर सकता है कि प्राचीन चीन में इतने बड़े निर्माण कार्य के लिए श्रमिकों का संगठन किस तरह किया जाता था।वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में अधिक मूर्तियों और उंगलियों के निशानों का अध्ययन करने से निर्माण में शामिल लोगों की पहचान तथा उनकी भूमिका के बारे में नई जानकारियां सामने आ सकती हैं।फिलहाल इस अध्ययन ने यह महत्वपूर्ण संभावना सामने रखी है कि चीन की प्रसिद्ध टेराकोटा आर्मी केवल पुरुष कारीगरों की उपलब्धि नहीं थी, बल्कि इसके निर्माण में महिलाओं और बच्चों का भी योगदान रहा होगा।
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