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इस्लामाबाद। पाकिस्तान में गरीबी और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की नई रिपोर्ट में महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। 12 अक्टूबर 2026 को जारी ग्लोबल मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI) के अनुसार, पाकिस्तान की 38.3 प्रतिशत आबादी बहुआयामी गरीबी का सामना कर रही है। इसका मतलब है कि देश की बड़ी आबादी स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर जैसी आवश्यक सुविधाओं से जुड़ी कई तरह की कमियों से प्रभावित है। रिपोर्ट में पाकिस्तान की स्थिति बांग्लादेश की तुलना में अधिक चिंताजनक दिखाई गई है। हालांकि, दोनों देशों के आंकड़े अलग-अलग वर्षों के सर्वेक्षणों पर आधारित हैं।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की ओर से न्यूयॉर्क में जारी आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में बहुआयामी गरीबी की दर 38.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। वहीं बांग्लादेश के लिए यह आंकड़ा 14.9 प्रतिशत बताया गया है। इससे पता चलता है कि उपलब्ध सर्वेक्षणों के आधार पर पाकिस्तान में बहुआयामी गरीबी का स्तर अधिक है।रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इन आंकड़ों को वर्तमान समय में दोनों देशों की स्थिति की सीधी तुलना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका कारण यह है कि संबंधित घरेलू सर्वेक्षण अलग-अलग वर्षों में किए गए थे।
गरीबी के साथ बुनियादी सुविधाओं की कमी
बहुआयामी गरीबी सूचकांक केवल लोगों की आय के आधार पर गरीबी का आकलन नहीं करता। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर से जुड़े विभिन्न संकेतकों को शामिल किया जाता है।इस सूचकांक के तहत पोषण, बच्चों की मृत्यु दर, स्कूली शिक्षा, स्कूल में उपस्थिति, पेयजल, स्वच्छता, बिजली, आवास और खाना पकाने के ईंधन जैसी सुविधाओं की उपलब्धता का मूल्यांकन किया जाता है।पाकिस्तान में 38.3 प्रतिशत आबादी का बहुआयामी गरीबी की श्रेणी में होना यह दर्शाता है कि बड़ी संख्या में लोग एक साथ कई आवश्यक सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।
गरीबी की तीव्रता 51.7 प्रतिशत
रिपोर्ट में पाकिस्तान के लिए गरीबी की तीव्रता 51.7 प्रतिशत दर्ज की गई है। इसका अर्थ है कि बहुआयामी गरीब माने गए लोग सूचकांक में शामिल कुल भारित संकेतकों में औसतन 51.7 प्रतिशत अभाव का सामना कर रहे हैं।यह आंकड़ा केवल गरीब आबादी की संख्या ही नहीं, बल्कि उनकी कठिनाइयों की गंभीरता को भी सामने लाता है।इसके अलावा पाकिस्तान की 12.9 प्रतिशत आबादी को बहुआयामी गरीबी के प्रति संवेदनशील माना गया है। इसका अर्थ है कि यह आबादी गरीबी की निर्धारित सीमा से ऊपर होने के बावजूद कई अभावों का सामना कर रही है और उसकी स्थिति असुरक्षित बनी हुई है।
बांग्लादेश से काफी अधिक गरीबी
रिपोर्ट में पाकिस्तान और बांग्लादेश के आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। पाकिस्तान की 38.3 प्रतिशत आबादी बहुआयामी गरीब है, जबकि बांग्लादेश के लिए यह दर 14.9 प्रतिशत दर्ज की गई है।इन आंकड़ों के आधार पर दोनों देशों के बीच 23.4 प्रतिशत अंकों का अंतर सामने आता है।हालांकि, अलग-अलग समय पर किए गए सर्वेक्षणों के कारण इन आंकड़ों को सीधे वर्तमान हालात की तुलना नहीं माना जा सकता। यह अंतर उपलब्ध डेटा के आधार पर विकास संबंधी चुनौतियों को समझने में मदद करता है।
दुनिया में 1.2 अरब लोग बहुआयामी गरीब
UNDP की 2026 की रिपोर्ट में दुनिया भर की गरीबी की स्थिति भी सामने आई है। इस रिपोर्ट में 108 देशों को शामिल किया गया है।इन देशों की लगभग 6.3 अरब आबादी में से 1.2 अरब लोग बहुआयामी गरीबी का सामना कर रहे हैं। यह कुल आबादी का लगभग 18.9 प्रतिशत है।रिपोर्ट के अनुसार, बहुआयामी गरीबी में रहने वाले लोगों में बड़ी संख्या बच्चों की है। करीब 61.7 करोड़ बच्चे इस श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा दुनिया के बहुआयामी गरीब लोगों का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है।
पाकिस्तान के सामने विकास की चुनौती
पाकिस्तान के आंकड़े बताते हैं कि गरीबी से निपटने के लिए केवल लोगों की आय बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच में सुधार भी आवश्यक है।बहुआयामी गरीबी सूचकांक ऐसी कमियों की पहचान करने में मदद करता है, जिनके कारण लोगों का जीवन स्तर प्रभावित होता है।रिपोर्ट में सामने आया 38.3 प्रतिशत का आंकड़ा पाकिस्तान में विकास से जुड़ी चुनौतियों को रेखांकित करता है। वहीं 12.9 प्रतिशत आबादी का गरीबी के प्रति संवेदनशील होना यह संकेत देता है कि बड़ी संख्या में लोगों को अतिरिक्त सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की आवश्यकता है।UNDP की रिपोर्ट ने पाकिस्तान के सामने स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर में सुधार की जरूरत को एक बार फिर प्रमुखता से सामने रखा है।
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