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चीन सीमा पर मजबूत तैयारी
नई दिल्ली: भारत-चीन सीमा की सुरक्षा संभालने वाली भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी आईटीबीपी अपनी तैयारियों को आधुनिक तकनीक से मजबूत कर रही है। बल की सभी सीमा सुरक्षा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून गठित की गई हैं। इसके साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर भूमिगत आश्रय और बंकर विकसित करने पर काम हो रहा है। गलवां जैसी परिस्थितियों में जवानों की मुकाबला क्षमता बढ़ाने के लिए ‘स्ट्राइक’ नाम का विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी तैयार किया गया है।
आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने गुरुवार को राजस्थान के अलवर स्थित बल के एक केंद्र में आयोजित अलंकरण समारोह में इन तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बदलती युद्ध परिस्थितियों में केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। चीन सीमा की चुनौतियों को देखते हुए हथियारों, वाहनों, निगरानी संसाधनों और सीमा चौकियों को बेहतर बनाने की जरूरत है। उनका जोर तकनीक तथा प्रशिक्षण को साथ लेकर आगे बढ़ने पर रहा।
ड्रोन प्लाटून के गठन के साथ बल ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षण देने और ड्रोन निर्माण की दिशा में भी काम कर रहा है। महानिदेशक के अनुसार, सरकार से मिले 400 करोड़ रुपये में से 70 प्रतिशत राशि ड्रोन युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए निर्धारित की गई है। इसका अर्थ करीब 280 करोड़ रुपये है। यह आवंटन बताता है कि बल के आधुनिकीकरण में ड्रोन संबंधी क्षमताओं को प्रमुख स्थान दिया जा रहा है।
इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 4,000 करोड़ रुपये की व्यापक आधुनिकीकरण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। महानिदेशक ने बताया कि इसमें से 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन और ड्रोन रोधी प्रणालियों के लिए निर्धारित किए जाएंगे। यहां सैद्धांतिक मंजूरी और पूरी खरीद प्रक्रिया संपन्न होने में अंतर है। उपलब्ध जानकारी किसी निश्चित संख्या में नए उपकरणों की आपूर्ति पूरी हो जाने का विवरण नहीं देती।
जवानों की व्यक्तिगत और सामूहिक मुकाबला क्षमता बढ़ाने के लिए तैयार ‘स्ट्राइक’ पाठ्यक्रम का उद्देश्य गलवां जैसी स्थितियों से बेहतर तरीके से निपटना है। महानिदेशक के मुताबिक, वर्ष 2027 के अंत तक पूरे बल को इस प्रशिक्षण से जोड़ने का लक्ष्य है। इसके अतिरिक्त ‘शौर्य कमांडो’ नाम की लड़ाकू टीम बनाई गई है। ऐसे कमांडो को प्रत्येक सीमा बटालियन में तैनात करने की योजना भी बताई गई है।
सीमावर्ती ढांचे में भूमिगत सुरक्षा सुविधाओं का विस्तार दूसरा महत्वपूर्ण कदम है। महानिदेशक ने बताया कि इस दिशा में पायलट परियोजना चल रही है। भविष्य के आश्रय स्थलों में जमीन के ऊपर बने भवनों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका उद्देश्य जवानों को सुरक्षित स्थान देना है, क्योंकि आधुनिक संघर्ष में जमीन के ऊपर मौजूद इमारतें हमलों की चपेट में आ सकती हैं।
ऊंचाई वाले ठंडे इलाकों में जवानों के रहने की व्यवस्था सुधारने पर भी काम किया गया है। जानकारी के अनुसार, शून्य से नीचे तापमान वाले क्षेत्रों की 383 बैरकों में से 342 को इंसुलेट किया गया है। दूरस्थ चौकियों के लिए 141 जनरेटर खरीदे गए हैं। कई स्थानों पर सौर ऊर्जा से चलने वाले वॉटर हीटर लगाए गए हैं। वाहनों को अत्यधिक ठंड में चालू करने के लिए कोल्ड स्टार्ट किट भी उपलब्ध कराई गई हैं। इन कदमों का महत्व केवल नए उपकरण खरीदने तक सीमित नहीं है। ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में किसी तकनीक का उपयोग उसके रखरखाव, बिजली की उपलब्धता और प्रशिक्षित कर्मियों पर भी निर्भर करता है। इसी तरह सुरक्षित आवास और भरोसेमंद परिवहन जवानों की दैनिक कार्यक्षमता से जुड़े हैं। इसलिए निगरानी प्रणाली, प्रशिक्षण और बुनियादी सुविधाओं को एक साथ बेहतर करना तैयारी का व्यापक हिस्सा है।
ड्रोन और ड्रोन रोधी व्यवस्था की भूमिकाएं भी अलग हैं। एक ओर ड्रोन क्षेत्र की स्थिति समझने और निगरानी में मदद कर सकते हैं, वहीं दूसरी ओर विरोधी ड्रोन से उत्पन्न खतरे का सामना करने के लिए अलग संसाधन चाहिए। हालांकि, घोषित योजना में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की तकनीकी क्षमता, संख्या और तैनाती स्थानों का विस्तृत सार्वजनिक विवरण नहीं दिया गया है। भूमिगत बंकरों को लेकर भी निर्माण की योजना और सभी स्थानों पर निर्माण पूरा होने के बीच अंतर समझना जरूरी है। पायलट परियोजना से मिलने वाला अनुभव आगे के विस्तार में उपयोगी हो सकता है। उपलब्ध घोषणा में हर चौकी के लिए निर्माण की अंतिम समयसीमा या तैयार बंकरों की कुल संख्या नहीं बताई गई है। इसलिए पूरे सीमा क्षेत्र में एक जैसी व्यवस्था तैयार हो जाने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
करीब 95 हजार कर्मियों वाला आईटीबीपी 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा की सुरक्षा करता है। बल का घोषित लक्ष्य बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधनों और मजबूत ढांचे के माध्यम से विशिष्ट उच्च पर्वतीय युद्धक क्षमता विकसित करना है। नई घोषणाएं इसी दिशा में उठाए जा रहे कदमों का विवरण देती हैं।
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