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नई दिल्ली/नैरोबी। पूर्वी अफ्रीकी देश केन्या में इबोला संक्रमण से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने के लिए भारत ने एक बार फिर महत्वपूर्ण मानवीय सहायता प्रदान की है। सोमवार, 19 अक्टूबर को भारत सरकार ने केन्या को 11 टन चिकित्सा सामग्री की दूसरी खेप सौंपी। इस सहायता का उद्देश्य केन्या की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाना, स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संक्रमण की पहचान तथा रोकथाम के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है।केन्या में भारत के उच्चायुक्त डॉ. आदर्श स्वैका ने नैरोबी स्थित केन्या मेडिकल सप्लाइज अथॉरिटी के एम्बाकासी परिसर में चिकित्सा सहायता की खेप केन्या के जन स्वास्थ्य एवं व्यावसायिक मानक विभाग की प्रधान सचिव मैरी मुथोनी मुरियुकी को सौंपी। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य सहयोग और संक्रामक बीमारियों से निपटने की तैयारियों को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
विदेश मंत्रालय ने साझा की जानकारी
भारत के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर चिकित्सा सहायता की दूसरी खेप सौंपे जाने की जानकारी साझा की।मंत्रालय ने अपने संदेश में कहा, "भारत ने इबोला से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने के लिए केन्या को 11 टन चिकित्सा सहायता की दूसरी खेप सौंपी है।"केन्या स्थित भारतीय उच्चायोग ने भी इस सहायता की पुष्टि करते हुए कहा कि भारत सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने में केन्या के साथ सहयोग जारी रखेगा।इससे पहले जुलाई 2026 में भारत ने केन्या को चिकित्सा सहायता की पहली खेप प्रदान की थी।
11 टन की खेप में शामिल हैं महत्वपूर्ण उपकरण
भारत द्वारा भेजी गई चिकित्सा सहायता में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाने वाले उपकरण शामिल हैं।खेप में 6,000 व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) किट, 60 पावर्ड एयर-प्यूरिफाइंग रेस्पिरेटर, 30,000 एन-95 मास्क और 86,000 से अधिक नमूना परिवहन किट शामिल हैं।इसके अलावा चिकित्सा गाउन, दस्ताने, फेस शील्ड, सुरक्षात्मक जूते, इन्फ्रारेड थर्मामीटर, बायोसेफ्टी कैबिनेट और कोल्ड-चेन रेफ्रिजरेटर भी उपलब्ध कराए गए हैं।इन उपकरणों से स्वास्थ्यकर्मियों को संक्रमण से बचाने, संदिग्ध मरीजों के नमूनों को सुरक्षित रखने और प्रयोगशालाओं में जांच की व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर विशेष जोर
इबोला जैसी गंभीर संक्रामक बीमारियों से निपटने में डॉक्टरों, नर्सों, प्रयोगशाला कर्मचारियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।संक्रमित मरीजों की देखभाल और जैविक नमूनों की जांच के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को संक्रमण का खतरा रहता है। ऐसे में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों और संक्रमण नियंत्रण सुविधाओं की उपलब्धता आवश्यक है।भारत की ओर से उपलब्ध कराए गए उपकरणों का उपयोग उपचार केंद्रों, आइसोलेशन सुविधाओं, प्रयोगशालाओं और स्वास्थ्य जांच केंद्रों में किया जा सकेगा।
जुलाई में भी भारत ने भेजी थी सहायता
भारत ने इससे पहले 22 जुलाई 2026 को केन्या को लगभग 4.5 टन चिकित्सा सामग्री की पहली खेप सौंपी थी।इस खेप में पीपीई किट, नमूना परिवहन किट, इन्फ्रारेड थर्मामीटर, फेस शील्ड और अन्य संक्रमण रोकथाम सामग्री शामिल थी।पहली खेप के बाद दूसरी खेप भेजना भारत और केन्या के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में जारी सहयोग को दर्शाता है।
केन्या में इबोला को लेकर बढ़ी सतर्कता
केन्या में हाल ही में बुंडिबुग्यो वायरस रोग का एक आयातित मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने निगरानी और संक्रमण रोकथाम के उपाय तेज किए हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी 12 अक्टूबर को केन्या को आवश्यक चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराई थी। इसके तहत स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और संदिग्ध मामलों की जांच में सहायता देने पर जोर दिया गया।केन्या के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, संक्रमण की जल्द पहचान, संपर्क में आए लोगों की निगरानी और समय पर मरीजों को अलग रखना बीमारी के प्रसार को रोकने के प्रमुख उपाय हैं।
करीब 83 लाख केन्याई शिलिंग की सहायता
केन्या के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, भारत द्वारा उपलब्ध कराई गई इस चिकित्सा सहायता का मूल्य लगभग 83.39 मिलियन केन्याई शिलिंग है।इस सहायता से अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में संक्रमण नियंत्रण की तैयारियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।प्रधान सचिव मैरी मुथोनी ने लोगों से सतर्क रहने और स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की।
भारत-केन्या के स्वास्थ्य संबंधों को मिलेगी मजबूती
भारत और केन्या लंबे समय से स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार और विकास सहयोग के क्षेत्रों में साझेदारी कर रहे हैं।चिकित्सा सामग्री की यह दूसरी खेप दोनों देशों के बीच मानवीय सहयोग का एक और उदाहरण है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रामक बीमारियों से मुकाबले के लिए समय पर उपकरण उपलब्ध होना, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और मजबूत प्रयोगशाला व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।भारत की यह पहल केन्या की इबोला से निपटने की तैयारियों को बेहतर बनाने के साथ पूर्वी अफ्रीका में सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने में भी योगदान दे सकती है।
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