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Pakistan पाकिस्तान: एचआईवी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी एक ऐसा सिस्टम फेलियर है जो अभी सामने आ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे और कम जोखिम वाले लोग भी एचआईवी से संक्रमित हो रहे हैं। इसका कारण वह स्वास्थ्य व्यवस्था है जो उन्हें सुरक्षित रखने के लिए होती है। एक रिपोर्ट और पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन के संपादकीय में कहा गया है कि इसके पीछे दो बड़ी समस्याएं हैं। पहली समस्या है देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में संक्रमण रोकने की बुनियादी व्यवस्था का टूट जाना। दूसरी समस्या है इंजेक्शन को बार-बार इस्तेमाल करना, जबकि 2021 में पूरे देश में सामान्य डिस्पोजेबल सीरिंज पर प्रतिबंध लगाया गया था। इन दोनों वजहों ने मिलकर एक 'मानव-निर्मित महामारी' जैसी स्थिति बना दी है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि लरकाना, मुल्तान, कराची और टांडा जैसे इलाकों में अस्पतालों और क्लीनिकों से जुड़े एचआईवी के मामले सामने आए हैं। कुछ मामलों में तो सिर्फ एक साल की उम्र के बच्चे भी संक्रमित पाए गए हैं, जो क्लीनिक में इलाज कराने गए थे। विशेषज्ञों के अनुसार, गंदे इंजेक्शन और असुरक्षित मेडिकल प्रैक्टिस एचआईवी के बढ़ने की मुख्य वजह हैं और ये दोनों ही रोकी जा सकती हैं। समस्या यह है कि इन पर ठीक से लागू करने और निगरानी करने की कमी है।
पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि नकली या गलत तरीके से लेबल की गई 'ऑटो-डिसेबल' सीरिंज भी सप्लाई चेन में आ रही हैं। इसके बाद ड्रग रेगुलेटरी अथॉरिटी और प्रांतीय स्वास्थ्य विभागों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही डेटा और पारदर्शिता की कमी को भी बड़ी समस्या बताया गया है। वहीं, पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीआईएमएस) के एचआईवी सेंटर के डॉक्टरों ने भी चिंता जताई है कि मरीजों की संख्या बढ़ रही है और बच्चों में एचआईवी मिलना खास तौर पर बहुत चिंताजनक है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि बीमारी को छिपाना और टेस्ट न कराना स्थिति को और खतरनाक बना रहा है।
एड्स कंट्रोल प्रोग्राम के मैनेजर जुबैर अब्दुल्ला ने कहा कि पीआईएमएस एचआईवी सेंटर में मरीजों की बढ़ती संख्या का एक कारण यह भी है कि अब ज्यादा लोग टेस्ट कराने के लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को एचआईवी से बचाव के बारे में जागरूक करना बहुत जरूरी है और टेस्टिंग बढ़ना एक अच्छी बात है।
पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2025 से अब तक 189 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। अप्रैल के पहले 20 दिनों में 11 नए मामले सामने आए। इनमें पुरुषों की संख्या महिलाओं से ज्यादा है, और ट्रांसजेंडर लोगों में भी मामले मिले हैं। बच्चों में एचआईवी के मामले सामने आना अभी भी बहुत गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
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