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यमन में हूती का दबदबा बढ़ा
सना: यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने एक तेज सैन्य अभियान के दौरान लाल सागर के तटीय इलाकों में बड़ी बढ़त हासिल की है। हूती लड़ाकों ने 48 घंटे से भी कम समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार से जुड़े बलों को पीछे धकेलते हुए रणनीतिक बंदरगाह मोखा, धुबाब और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास स्थित महत्वपूर्ण द्वीपों पर कब्जा कर लिया। इस घटनाक्रम ने यमन के लंबे गृहयुद्ध के साथ वैश्विक समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इस अभियान की योजना और युद्धक्षेत्र से जुड़ी खुफिया जानकारी के विश्लेषण में ईरानी सलाहकारों की भूमिका रही। रॉयटर्स ने भी यमनी, ईरानी और क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरानी हथियार और सैन्य सलाह ने हूतियों के मोखा पर कब्जे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि ईरान लंबे समय से हूतियों को समर्थन देने की बात स्वीकार करता है, लेकिन वह सीधे सैन्य अभियानों को नियंत्रित करने के आरोपों से इनकार करता रहा है। इसलिए अभियान में ईरान की प्रत्यक्ष भूमिका से जुड़े दावों को संबंधित सूत्रों के हवाले से ही देखा जा रहा है।
हूती लड़ाकों ने 10 सितंबर को रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा किया। इसके बाद उनकी सेनाएं दक्षिण की ओर बढ़ीं और धुबाब तक पहुंच गईं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक हूतियों ने इसके बाद मईयून यानी पेरिम द्वीप की ओर भी बढ़त बनाई। यह द्वीप बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बीच स्थित है और लाल सागर में प्रवेश करने वाले जहाजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थान रखता है।
रिपोर्टों में पेरिम के साथ जुक़र और हनीश द्वीप समूह के आसपास भी हूती गतिविधियों का जिक्र किया गया है। यमनी सरकारी बलों के कुछ ठिकानों से पीछे हटने के बाद हूती लड़ाकों के लिए इन क्षेत्रों में आगे बढ़ना आसान हुआ। हालांकि शुरुआती चरण में सभी द्वीपों पर हूतियों के पूर्ण नियंत्रण की स्वतंत्र पुष्टि स्पष्ट नहीं थी। बाद की रिपोर्टों में पेरिम सहित महत्वपूर्ण तटीय इलाकों पर उनके नियंत्रण की जानकारी सामने आई।
इस पूरे सैन्य अभियान में हूतियों की तेज बढ़त ने यमनी सरकार समर्थक बलों की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक सरकार समर्थक अलग-अलग सैन्य गुटों के बीच समन्वय की कमी और आंतरिक मतभेदों ने हूतियों को फायदा पहुंचाया। सरकारी पक्ष से जुड़े हजारों लड़ाकों को कई स्थानों से पीछे हटना पड़ा। बाद में यमन के हूती-विरोधी बलों ने अचानक हुए इस सैन्य पतन की जांच भी शुरू की।
हूतियों ने दावा किया कि उनके अभियान के दौरान छह जिलों में लगभग 5,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र से सऊदी समर्थित बलों को पीछे हटाया गया। संघर्ष के बाद यमनी सरकारी बलों ने दोबारा मोखा और आसपास के इलाकों में हूती ठिकानों पर हमले किए। सऊदी अरब ने भी सरकारी बलों के समर्थन में हवाई कार्रवाई की। इसके बावजूद लाल सागर के तटीय क्षेत्र में हूतियों की स्थिति पहले के मुकाबले मजबूत हुई है।
सबसे ज्यादा चिंता बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। यूरोप और एशिया के बीच समुद्री व्यापार के लिए यह प्रमुख मार्ग है। पेरिम द्वीप और आसपास के तटीय क्षेत्रों में सैन्य मौजूदगी किसी भी पक्ष को इस मार्ग पर दबाव बनाने की क्षमता दे सकती है। हूती नेतृत्व ने हालांकि कहा है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री आवागमन को उनसे कोई खतरा नहीं है।
यमन में ताजा संघर्ष का असर आम नागरिकों पर भी पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक हाल की लड़ाई के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। 21 सितंबर तक की एक रिपोर्ट में हालिया हिंसा से लगभग 700 मौतों और 1.30 लाख से अधिक लोगों के विस्थापन का उल्लेख किया गया। हूतियों की यह बढ़त ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। लाल सागर के तट और बाब अल-मंदेब के आसपास हूतियों की मजबूत मौजूदगी यमन के गृहयुद्ध को और जटिल बनाने के साथ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गई है।
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