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डोकलाम और गलवान के कमांडर झाओ जोंगकी पर चीन में बड़ी कार्रवाई

Ratna Netam
30 Aug 2026 3:57 PM IST
डोकलाम और गलवान के कमांडर झाओ जोंगकी पर चीन में बड़ी कार्रवाई
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चीन : राजनीति और सेना में एक बड़ा बदलाव इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के कई वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई की है। इसी कड़ी में पूर्व चीनी जनरल झाओ जोंगकी का नाम भी सुर्खियों में आया है। झाओ जोंगकी वही सैन्य अधिकारी हैं, जो चीन के पश्चिमी थिएटर कमांड के प्रमुख रह चुके हैं और भारत-चीन सीमा से जुड़े कई अहम घटनाक्रमों के दौरान उनकी भूमिका रही थी।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले चीन में सेना से जुड़े इस घटनाक्रम को काफी अहम माना जा रहा है। भारत और चीन के रिश्तों में सीमा विवाद लंबे समय से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। ऐसे समय में झाओ जोंगकी पर हुई कार्रवाई ने रणनीतिक विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है।
कौन हैं जनरल झाओ जोंगकी?
झाओ जोंगकी चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के एक वरिष्ठ जनरल रहे हैं। उन्होंने चीन के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य कमानों में से एक वेस्टर्न थिएटर कमांड का नेतृत्व किया था। यह कमांड चीन की भारत से लगी लंबी सीमा, खासकर तिब्बत क्षेत्र की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार मानी जाती है।
झाओ का सैन्य करियर कई दशकों तक फैला रहा। उन्होंने 1970 के दशक में चीनी सेना में प्रवेश किया था और धीरे-धीरे उच्च पदों तक पहुंचे। वह चीन की सैन्य रणनीति में एक प्रभावशाली चेहरा माने जाते थे। साल 2016 में उन्हें वेस्टर्न थिएटर कमांड की जिम्मेदारी दी गई थी।
भारत से क्या है झाओ जोंगकी का संबंध?
भारत के लिए झाओ जोंगकी का नाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह उस समय चीन के पश्चिमी थिएटर कमांड के प्रमुख थे, जब भारत और चीन के बीच कई बड़े सैन्य तनाव हुए।
साल 2017 में डोकलाम विवाद के दौरान और साल 2020 में गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष के समय झाओ जोंगकी की भूमिका चर्चा में रही थी। गलवान संघर्ष के दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारत और चीन दोनों पक्षों को नुकसान उठाना पड़ा था।
डोकलाम विवाद भी भारत-चीन संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। उस समय दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं और कई हफ्तों तक तनाव बना रहा था। झाओ उस समय चीन की सैन्य रणनीति से जुड़े प्रमुख अधिकारियों में शामिल थे। ([The )
शी जिनपिंग ने क्यों लिया एक्शन?
चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग पिछले कई वर्षों से सेना में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। इस अभियान के तहत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है।
झाओ जोंगकी को लेकर सामने आई कार्रवाई को भी इसी व्यापक सैन्य पुनर्गठन और जांच प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि चीन की ओर से हर मामले में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की सेना में वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक और रणनीतिक कारण भी हो सकते हैं। शी जिनपिंग लंबे समय से PLA पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करते रहे हैं।
BRICS समिट से पहले क्यों बढ़ी चर्चा?
भारत 2026 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इस सम्मेलन में चीन समेत कई बड़े देशों के नेताओं के शामिल होने की संभावना है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है।
ऐसे समय में चीन की सेना के एक ऐसे पूर्व कमांडर पर कार्रवाई होना, जो भारत सीमा से जुड़े मामलों में अहम भूमिका निभा चुके हैं, कूटनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत और चीन के बीच हाल के वर्षों में सीमा विवाद के कारण रिश्तों में तनाव रहा है। हालांकि दोनों देश बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए संबंधों को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
चीन की सेना में बदलाव का क्या असर?
चीन की सेना दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक है और PLA में होने वाले बदलावों पर पूरी दुनिया की नजर रहती है। वरिष्ठ अधिकारियों में बदलाव चीन की रक्षा नीति और भविष्य की सैन्य रणनीति का संकेत दे सकते हैं।
झाओ जोंगकी जैसे अधिकारी, जिन्होंने भारत सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण सैन्य फैसलों के दौर में नेतृत्व किया, उनके हटने को चीन की सैन्य व्यवस्था में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई चीन के भीतर सत्ता संतुलन और सेना पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नियंत्रण को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
भारत के लिए चीन की सैन्य गतिविधियां हमेशा महत्वपूर्ण रही हैं क्योंकि दोनों देशों के बीच हजारों किलोमीटर लंबी विवादित सीमा है। सीमा पर सैन्य तैनाती, रणनीति और नेतृत्व में होने वाले बदलावों का सीधा असर क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
झाओ जोंगकी का नाम भारत में इसलिए भी जाना जाता है क्योंकि वह गलवान और डोकलाम जैसे संवेदनशील घटनाक्रमों के समय चीन के प्रमुख सैन्य अधिकारियों में शामिल थे।
फिलहाल झाओ जोंगकी पर कार्रवाई चीन की आंतरिक राजनीति और सैन्य व्यवस्था से जुड़ा मामला है, लेकिन भारत-चीन संबंधों के संदर्भ में इसका रणनीतिक महत्व जरूर है। ब्रिक्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच से पहले चीन की सेना में हो रहे बदलाव आने वाले समय की कूटनीतिक दिशा के संकेत दे सकते हैं।
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