
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग मोबाइल ऐप के जरिए एटीएम मशीन को बंद करने का दावा कर रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोगों में चिंता बढ़ गई है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, अभी तक इस वीडियो के असली होने की पुष्टि नहीं हुई है और किसी बैंक या सरकारी एजेंसी की ओर से भी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा मोबाइल ऐप देखने में उसी BAT-BMS ऐप जैसा नजर आ रहा है, जिसका नाम कुछ दिन पहले ई-रिक्शा को रिमोट से बंद करने वाले वायरल वीडियो में सामने आया था। वीडियो बनाने वाले लोगों ने अपने चेहरे छिपा रखे हैं, जिससे इसकी सत्यता पर और सवाल उठ रहे हैं।
क्या सच में ऐप से बंद हो सकता है ATM?
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि वायरल वीडियो की जांच के बिना यह कहना मुश्किल है कि इसमें दिखाया गया दावा सही है या नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह वीडियो फर्जी भी हो सकता है। संभव है कि एटीएम मशीन किसी तकनीकी प्रक्रिया के तहत रीबूट हो रही हो और उसी समय मोबाइल स्क्रीन दिखाकर लोगों को भ्रमित करने के लिए वीडियो बनाया गया हो। फिलहाल किसी भी बैंक, एटीएम सेवा प्रदाता या सुरक्षा एजेंसी ने यह नहीं कहा है कि किसी मोबाइल ऐप की मदद से एटीएम मशीनों को बंद किया जा सकता है। इसलिए लोगों को ऐसे वायरल दावों पर भरोसा करने से पहले उनकी पुष्टि जरूर करनी चाहिए।
BAT-BMS ऐप ने पहले भी मचाई थी हलचल
कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें दावा किया गया था कि मोबाइल ऐप की मदद से सड़क पर चलते ई-रिक्शा को कुछ ही सेकंड में बंद किया जा सकता है। इन वीडियो ने लोगों को हैरान कर दिया था। दरअसल, BAT-BMS ऐप मूल रूप से लिथियम बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ा एक टूल था। इसका इस्तेमाल बैटरी की स्थिति, वोल्टेज, तापमान और चार्जिंग स्तर की निगरानी के लिए किया जाता था। लेकिन कुछ मामलों में कमजोर सुरक्षा व्यवस्था के कारण इसके गलत इस्तेमाल की आशंका सामने आई थी। ई-रिक्शा और अन्य आधुनिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली कई लिथियम बैटरियों में ब्लूटूथ कनेक्टिविटी होती है। अगर बैटरी सिस्टम की सुरक्षा मजबूत नहीं हो तो सीमित दूरी में मौजूद व्यक्ति मोबाइल के जरिए उससे कनेक्ट होने की कोशिश कर सकता है।
कैसे होता है ब्लूटूथ सिस्टम का दुरुपयोग?
आधुनिक मशीनों और वाहनों में लगी स्मार्ट बैटरियां कई बार मोबाइल ऐप के जरिए नियंत्रित होती हैं। इनमें बैटरी की जानकारी देखने से लेकर कुछ सेटिंग बदलने तक की सुविधा होती है। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि किसी डिवाइस का पासवर्ड कमजोर हो या सुरक्षा मानकों का पालन न किया गया हो तो उसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर मशीन या एटीएम को आसानी से मोबाइल ऐप से बंद किया जा सकता है। एटीएम मशीनें बैंकिंग सुरक्षा के कई स्तरों से जुड़ी होती हैं। इनमें अलग-अलग सुरक्षा प्रणाली, निगरानी व्यवस्था और नेटवर्क कंट्रोल मौजूद होते हैं। इसलिए केवल किसी ऐप की मदद से एटीएम को बंद कर देना आसान नहीं माना जाता।
सरकार ने पहले लिया था सख्त कदम
ई-रिक्शा बंद करने वाले वीडियो वायरल होने के बाद सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया था। सुरक्षा और संभावित खतरे को देखते हुए कई संदिग्ध ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने की कार्रवाई की गई थी। अब एटीएम बंद करने वाले वीडियो के वायरल होने के बाद एक बार फिर साइबर सुरक्षा को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर आने वाले तकनीकी दावों की जांच किए बिना उन्हें सच नहीं मानना चाहिए।
फिलहाल एटीएम ऐप से बंद होने का दावा केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित है। इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही साफ हो पाएगी। सुरक्षा एजेंसियां और संबंधित विभाग इस तरह के मामलों पर नजर बनाए हुए हैं।





