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BEIRUT बेरूत: लेबनान ने इज़राइल से पत्रकारों और पैरामेडिक्स पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकने की अपील करने का निर्णय लिया है। यह मुद्दा वॉशिंगटन में अमेरिका की मध्यस्थता में होने वाली बातचीत के दौरान उठाया जाएगा। यह कदम दक्षिणी लेबनान में हाल ही में हुए एक हमले के बाद सामने आया है, जिसमें एक पत्रकार की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया।
एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि यह मांग अमेरिका के विदेश विभाग में लेबनानी और इज़राइली प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के एजेंडा में शामिल की गई है। इस बैठक में संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे मीडिया कर्मियों और आपात सेवाओं से जुड़े लोगों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं पर चर्चा की गई।
सूत्रों के अनुसार, लेबनान ने इस मुद्दे को प्राथमिकता देते हुए यह स्पष्ट किया है कि पत्रकारों और पैरामेडिक्स को किसी भी प्रकार के हमलों से बचाया जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत संघर्ष क्षेत्रों में काम करने वाले इन लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक माना जाता है।
यह मामला उस घटना के बाद और गंभीर हो गया, जिसमें स्थानीय अखबार में काम करने वाले पत्रकार अमल खलील की जान चली गई। इसके अलावा, उसी हमले में फोटो जर्नलिस्ट ज़ैनब फराज घायल हो गईं। यह घटना बिंट जेबिल जिले के बॉर्डर क्षेत्र टायरी की सड़क पर हुई थी, जिसने मीडिया और राहत कार्यों में लगे लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस घटना के बाद लेबनान में व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। मीडिया संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने भी इस तरह के हमलों की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
लेबनानी अधिकारियों का कहना है कि संघर्ष के दौरान भी अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन किया जाना जरूरी है। पत्रकार और पैरामेडिक्स ऐसे वर्ग हैं, जो संघर्ष क्षेत्रों में भी अपनी सेवाएं देते हैं और उन्हें निशाना बनाना गंभीर चिंता का विषय है।
अमेरिका की मध्यस्थता में हो रही बातचीत को दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में लेबनान इस मंच का उपयोग करते हुए अपने मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मुद्दे पर ठोस सहमति बनती है, तो इससे संघर्ष क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सकारात्मक बदलाव आ सकता है।
हालांकि, इस मामले पर इज़राइल की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन आने वाले दिनों में इस विषय पर और स्पष्टता आने की संभावना है।
कुल मिलाकर, लेबनान द्वारा उठाया गया यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बातचीत के दौरान इस पर क्या निर्णय लिया जाता है।
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