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बांग्लादेश में भड़का मजदूर आंदोलन, 12 प्लाटून तैनात, ड्रोन से कड़ी निगरानी
Ratna Netam
3 Nov 2026 5:41 PM IST

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ढाका। बांग्लादेश में वेतन बढ़ाने और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर कपड़ा उद्योग के मजदूरों का विरोध-प्रदर्शन लगातार जारी है। देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) की 12 प्लाटून को गाजीपुर, नारायणगंज और आसपास के औद्योगिक इलाकों में तैनात किया गया है। इसके साथ ही संवेदनशील स्थानों पर ड्रोन और बॉडी कैमरों की मदद से निगरानी बढ़ाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और कारखानों में उत्पादन बाधित होने से रोकना है।बांग्लादेश में पिछले कुछ दिनों से रेडीमेड गारमेंट उद्योग के कर्मचारी न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। प्रदर्शनकारी मजदूरों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के कारण मौजूदा वेतन में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। खाने-पीने की वस्तुओं, मकान किराए, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते खर्च ने उनकी आर्थिक परेशानियां बढ़ा दी हैं।मजदूरों की प्रमुख मांग न्यूनतम मासिक वेतन को मौजूदा 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 टका करना है। इसके अलावा कर्मचारी बेहतर कामकाजी सुविधाएं, नौकरी की सुरक्षा और बर्खास्त मजदूरों की बहाली की भी मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान कई औद्योगिक क्षेत्रों में यातायात बाधित हुआ और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की घटनाएं सामने आईं।बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश की ओर से मंगलवार, 3 नवंबर को जारी जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों की 10 प्लाटून गाजीपुर के शफीपुर, कालियाकैर और कोनाबाड़ी इलाकों में तैनात की गई हैं। वहीं, नारायणगंज के चाषाड़ा इलाके में दो प्लाटून तैनात हैं। इसके अलावा आशुलिया, मीरपुर और आसपास के दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।BGB मुख्यालय के जनसंपर्क अधिकारी मोहम्मद शरीफुल इस्लाम के अनुसार, तैनात जवान स्थानीय प्रशासन और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर काम कर रहे हैं। सुरक्षा बलों को निर्देश दिया गया है कि वे नागरिकों की सुरक्षा के साथ औद्योगिक गतिविधियों को सामान्य बनाए रखने में सहयोग करें।
इस बार सुरक्षा व्यवस्था में आधुनिक तकनीक का भी व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है। BGB ने प्रमुख सड़कों, चौराहों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और संवेदनशील स्थानों पर ड्रोन की सहायता से निगरानी बढ़ा दी है। ड्रोन से मिलने वाली तस्वीरों के जरिए अधिकारी विभिन्न इलाकों की स्थिति का वास्तविक समय में आकलन कर पा रहे हैं।ड्यूटी पर तैनात जवानों को बॉडी-वॉर्न कैमरे भी उपलब्ध कराए गए हैं। इन कैमरों से रिकॉर्ड होने वाले वीडियो की निगरानी BGB मुख्यालय में स्थापित केंद्रीय निगरानी कक्ष से की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इससे किसी भी तनावपूर्ण स्थिति में संबंधित इकाइयों तक तत्काल सूचना पहुंचाने और आवश्यक निर्देश देने में मदद मिलती है।BGB के अनुसार, बॉडी कैमरों का इस्तेमाल सुरक्षा अभियानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी किया जा रहा है। बल ने कहा है कि उसके जवान पेशेवर तरीके से और संयम बरतते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।मजदूरों के आंदोलन का असर बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग पर भी दिखाई दे रहा है। बीते दिनों विरोध-प्रदर्शनों और झड़पों के कारण बड़ी संख्या में कारखानों में कामकाज रोकना पड़ा। एक नवंबर को 500 से अधिक कारखानों के बंद होने की खबर सामने आई थी। इसके अगले दिन भी कई औद्योगिक क्षेत्रों में तनाव बना रहा और उत्पादन प्रभावित हुआ।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, दो नवंबर को विरोध-प्रदर्शनों के कारण 679 कारखानों में कामकाज रोकना पड़ा। कई स्थानों पर मजदूरों ने सड़कें अवरुद्ध कीं, जबकि पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इस दौरान कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं।बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में रेडीमेड गारमेंट उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह क्षेत्र देश के प्रमुख निर्यात उद्योगों में शामिल है और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है। ऐसे में लंबे समय तक उत्पादन प्रभावित होने से कारखाना मालिकों, मजदूरों और निर्यात कारोबार पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।मौजूदा विवाद का समाधान निकालने के लिए बांग्लादेश सरकार ने एक नवंबर को छह सदस्यीय वेतन बोर्ड गठित किया है। यह बोर्ड कपड़ा उद्योग के कर्मचारियों के वेतन की समीक्षा करेगा। इसमें मजदूरों और नियोक्ताओं के प्रतिनिधियों के साथ सरकारी तथा स्वतंत्र सदस्य को भी शामिल किया गया है। हालांकि, बोर्ड के गठन के बाद भी विरोध-प्रदर्शन पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।इस बीच गाजीपुर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अलग-अलग प्रशासनिक अपडेट सामने आए हैं। जिला प्रशासन ने मंगलवार को जिले में BGB की तैनाती बढ़ाकर 11 प्लाटून और कार्यकारी मजिस्ट्रेटों की संख्या 25 करने की जानकारी दी। वहीं, BGB मुख्यालय की व्यापक औद्योगिक सुरक्षा संबंधी विज्ञप्ति में गाजीपुर और नारायणगंज में कुल 12 प्लाटून की तैनाती बताई गई है।प्रशासन का कहना है कि उसकी प्राथमिकता औद्योगिक क्षेत्रों में शांति बहाल करना और लोगों की आवाजाही सामान्य बनाए रखना है। दूसरी ओर मजदूर अपनी वेतन संबंधी मांगों पर ठोस निर्णय चाहते हैं। अब सबकी नजर सरकार, मजदूर संगठनों और कारखाना मालिकों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी है।बांग्लादेश में जारी यह आंदोलन केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं, बल्कि बढ़ती महंगाई और श्रमिकों की आय के बीच गहराते अंतर को भी सामने ला रहा है। फिलहाल सुरक्षा बलों की तैनाती और तकनीकी निगरानी बढ़ने के बावजूद मजदूरों की मांगों पर सहमति बनना शांति बहाली के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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