
UKRAIN उक्रैन : रूस के क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने यूरोपीय शांति सेना के संभावित तैनाती और यूक्रेन में शांति समझौते पर मोलिक चर्चा के सवाल पर कहा कि "हम इस तरह की चर्चाओं को नकारात्मक रूप में देखते हैं।" पेस्कोव ने जोर देकर कहा कि पश्चिमी सैनिकों की उपस्थिति को रूस कभी स्वीकार नहीं करेगा और यही वजह थी कि फरवरी 2022 में उसने पूर्ण पैमाने पर आक्रमण किया। यूक्रेन ने बार-बार सुरक्षा गारंटी की मांग की है ताकि भविष्य में किसी भी युद्ध से बचा जा सके। पेस्कोव ने कहा कि सुरक्षा गारंटियां अभी भी "सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक" हैं, लेकिन उन्होंने नए विवरण साझा नहीं किए। रूस की मांग है कि यूक्रेन अपने पूर्वी क्षेत्रों में अतिरिक्त क्षेत्र छोड़ दे, जबकि यूक्रेन पश्चिमी ताकतों से कड़े सुरक्षा उपाय चाहता है।
क्रेमलिन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के बीच जल्द मिलने की संभावना को सीमित किया। पेस्कोव ने कहा कि ऐसी वार्ता तभी संभव होगी जब यह "सही तरीके से तैयार" की जाए और इसके ठोस परिणाम सामने आएँ। उन्होंने बताया कि रूसी और यूक्रेनी मध्यस्थ संपर्क में हैं, लेकिन अगली बैठक की तारीख अभी तय नहीं हुई है। वहीं, ज़ेलेंस्की ने रूस पर बैठक स्थगित करने और वार्ता में बाधा डालने का आरोप लगाया। अपने शाम के वीडियो संदेश में यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि रूस जानबूझकर बैठक से बचने की कोशिश कर रहा है, जबकि अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश यूक्रेन-रूस वार्ता में मध्यस्थता कर रहे हैं।
ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कहा, "वर्तमान रूस-यूक्रेन संघर्ष स्पष्ट रूप से अनुचित है। वे मिलने की आवश्यकता से बचने की कोशिश कर रहे हैं। वे इस युद्ध को समाप्त नहीं करना चाहते।" विशेषज्ञों के अनुसार, यूरोपीय शांति सेना की तैनाती को लेकर रूस का रुख यूक्रेन और पश्चिमी देशों के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है। पेस्कोव के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि रूस पश्चिमी सैनिकों की उपस्थिति को कभी स्वीकार नहीं करेगा और वार्ता की शर्तें पूरी तरह रूस की प्राथमिकताओं पर आधारित हैं। दूसरी ओर, ज़ेलेंस्की का रुख यह दर्शाता है कि यूक्रेन वार्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन चाहता है और रूस पर दबाव डालना चाहता है ताकि जल्द से जल्द शांति प्रक्रिया शुरू हो सके। हालाँकि, दोनों पक्षों के बीच सुरक्षा गारंटियों, क्षेत्रीय विवाद और तैनाती के मुद्दों पर मतभेद अभी भी गंभीर हैं।
यूक्रेन और रूस के बीच बातचीत की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष शर्तों और सुरक्षा उपायों पर सहमति बनाने के लिए कितने तैयार हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वार्ता में दोनों पक्ष समझौते के लिए गंभीर नहीं हैं, तो संघर्ष की अवधि और बढ़ सकती है। रूस का रुख और यूक्रेन की मांगें दर्शाती हैं कि शांति वार्ता में कई जटिल मुद्दे हैं जिनका समाधान करना आसान नहीं होगा। वर्तमान में स्थिति तनावपूर्ण है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार मध्यस्थता और समर्थन के प्रयास कर रहा है।





