विश्व

जाने पाकिस्तानी सेना का क्या है इरादा, राजस्थान बॉर्डर के पास बरसा रहे है बम-गोला

Kajal Dubey
14 Feb 2021 2:00 PM GMT
जाने पाकिस्तानी सेना का क्या है इरादा, राजस्थान बॉर्डर के पास बरसा रहे है बम-गोला
x
पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच महीनों से चले आ रहे सीमा विवाद पर कुल हल निकलता हुआ दिखाई दे रहा है।

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच महीनों से चले आ रहे सीमा विवाद पर कुल हल निकलता हुआ दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच पैंगोंग सो झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे पर डिसइंगेजमेंट को लेकर समझौते हुए हैं, जिसे अब जमीन पर उतारा जा रहा है। चीन के साथ विवाद के बीच पाकिस्तान ने राजस्थान बॉर्डर के पास अपनी सीमा में बम-गोले बरसाने शुरू कर दिए हैं। पाकिस्तानी सेना संघर्ष की तैयारी के लिए सिंध प्रांत में थार डेजर्ट में एक महीने तक चलने वाला युद्धाभ्यास कर रही है। यह जानकारी खुद सेना ने एक बयान जारी कर दी।

सेना ने बीती रात जारी बयान में कहा है कि 28 फरवरी को शुरू हुआ 'जीदार-उल-हदीद' कूटनाम वाला यह अभ्यास 28 फरवरी को खत्म होगा। बयान में कहा गया है, ''चार सप्ताह तक चलने वाले इस अभ्यास का उद्देश्य रेगिस्तानों में अभ्यास की अवधारणा को मान्यता देना है।'' कराची कोर के सैनिक इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं। सिंध के हैदराबाद से 165 किलोमीटर दूर चोर में सेना का मरूस्थलीय युद्ध विद्यालय है। युद्ध के प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए साल 1987 में इस विद्यालय की स्थापना की गई थी।
थार डेजर्ट 200,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जो भारत और पाकिस्तान के बीच सक्रिय सीमा बनाता है। शुक्रवार को पाकिस्तान की मेजबानी में अरब सागर में एक सप्ताह तक चलने वाला बहुराष्ट्रीय नौसेना अभ्यास शुरू हुआ था। मीडिया में आईं खबरों के अनुसार 11 फरवरी को शुरू हुए अमन-2021 नामक इस अभ्यास में अमेरिका, रूस, चीन और तुर्की समेत करीब 45 देश हिस्सा ले रहे हैं। यह अभ्यास 16 फरवरी तक चलेगा।
बता दें कि हाल ही में चीन ने भी पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर सैन्य अभ्यास किया था। इसके लिए उसने गुजरात सीमा के पास बने पाकिस्तानी एयरबेस के लिए फाइटर जेट्स और सैनिकों को भेजा था। चीन ने इसका ऐलान करते हुए कहा था कि वायु सेना की कवायद का उद्देश्य दोनों सेनाओं के 'वास्तविक युद्ध प्रशिक्षण' में सुधार करना है। बयान में आगे कहा गया था कि यह चीन-पाकिस्तान के सैन्य-से-सैन्य रिश्तों के विकास को बढ़ावा देगा, दो वायु सेनाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग को गहरा करेगा और दोनों पक्षों के वास्तविक-युद्ध प्रशिक्षण स्तर में सुधार करेगा।


Next Story