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जानें उस 'बैक्टीरिया' के बारे में, जो करता है हमारे ब्रेन को हेल्दी रखने का काम

Gulabi
24 Jun 2021 4:53 PM GMT
जानें उस बैक्टीरिया के बारे में, जो करता है हमारे ब्रेन को हेल्दी रखने का काम
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हमारे शरीर की कोशिकाओं में कुछ हिस्से ऐसे हैं जो पहले बैक्टीरिया (Bacteria) से बने थे

हमारे शरीर की कोशिकाओं में कुछ हिस्से ऐसे हैं जो पहले बैक्टीरिया (Bacteria) से बने थे. इनमें से एक है माइटोकांड्रिया (mitochondria). कोशिकाओं का पॉवर हाउस कहे जाने वाले इस हिस्से की सेहत हमारे मस्तिष्क (Brain)की सेहत बिगाड़ सकती है. बहुत से वैज्ञानिक अब मस्तिष्क की सेहत से माइटोकांड्रिया से संबंध का गहराई से अध्ययन कर रहे हैं. उन्होंने पाया है कि माइटोकांड्रिया मस्तिष्क की सेहत का कायम रखने में अहम भूमिका निभाता है. यहां तक कि इसका अवसाद से लेकर पार्किंसन्स बीमारी तक दिमाग की लगभग हर बीमारी (Disease) से गहरा संबंध है.

करीब एक अरब साल पहले एक पुरतान बैक्टीरिया (Bacteria) को एक कोशिका (Cell) ने एक तरह से निगल ही लिया था. दोनों मिल कर एक दूसरे की शक्ति बन गए. कोशिका ने जहां इस बैक्टीरिया को नया घर दिया तो बैक्टीरिया अपने नए रूप में कोशिका को शक्ति प्रदान करने वाला केंद्र बन गया. यह नया रूप ही माइटोकांड्रिया (Mitochondria) कहलाता है. माइटोकॉन्ड्रिया की उत्पत्ति बारे में यही सबसे प्रचलित मत है. माइटोकांड्रिया अपने ऐतिहासिक बैक्टीरिया के अवशेष अपने साथ लेकर चलता है जिसका अपना खुद का डीएनए है.

इस वजह से माइटोकांड्रिया (Mitochondria) कई समस्या का स्रोत भी है. जिस तरह हमारी कोशिकाओं के केंद्रकों (Nuclei of Cells) में डीएनए और मानव जीनोम (Human Genome) मौजूद है, माइटोकांड्रिया का डीएनए में भी म्यूटेशन (DNA Mutation) हो सकते हैं बदलाव हो सकते हैं. उम्र, तनाव, और अन्य कारक उसके कार्यों में बाधा डाल सकते हैं. इसके अलावा माइटोकांड्रिया चोटिल होने पर कई तरह के पदार्थ निकालता है जिन्हें बैक्टीरिया से मिलते जुलते होने के कारण हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली बाहरी आक्रमणकारी समझ लेती हैं जिससे नुकसान पहुंचाने वाली प्रतिक्रिया शरीर की ही कोशिकाओं को झेलनी पड़ती है.

माइटोकांड्रिया (Mitochondria) को सबसे ज्यादा नुकसान मस्तिष्क (Brain) को हो सकता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि कोशिका (Cells) में जितने ज्यादा माइटोकांड्रिया होंगे, स्वास्थ्य के लिए उतने ही ज्यादा नुकसानदेह होते हैं. न्यूरॉन यानि मस्तिष्क की हर कोशिका में करीब 20 लाख माइटोकांड्रिया होते हें. ऐसे में वैज्ञानिकों ने अपना ध्यान मस्तिष्क के लिहाज से माइटोकांड्रिया पर लगाया है. इसमें खास तरह के जेनेटिक पदार्थ होते हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि माइटोकांड्रिया के डीएनए एक चक्रीय तंतु बनाता है जिसमें केवल 37 जीन्स होते हैं. जो जीनोम में पाए जाने वाले हजारों की तुलना में काफी कम हैं

इसके बाद 1970 में यूनिवर्सिटी से डगलस वालेस ने तर्क दिया कि चूंकि माइटोकांड्रिया (Mitochondria) शरीर में ऊर्जा पैदा करने वाला प्राथमिक उत्पादक होते हैं, उनके डीएनए में म्यूटेशन (DNA Mutation) बीमारी दे सकता है. 1988 में यह संबंध पहली बार पता चला जब लेबर्स हेरिडिचरी ऑफ न्यूरोपैथी बीमारी के बारे में पता चला. यह स्थिति अचानक अंधापन ला देती है. तब से वालेस के विचार को गंभीरता से लिया जाने लगा. शोधकर्ताओं ने दर्जनों विकारों का माइटोकांड्रिया के डीएनए में बदलाव से संबंध पाया. वालेस का कहना है कि मस्तिष्क शरीर का केवल 2 प्रतिशत भार है, लेकिन वह शारीरिक ऊर्जा (Body Energy) का पांचवा हिस्सा उपयोग में लाता है. माइटोकांड्रिया के कार्यों में हलकी सी कमी का दिमाग पर गहरा असर होता है

कई अध्ययनों में पाया गया है कि माइटोकांड्रिया (Mitochondria) के कारण होने वाली बीमारियों (Disorders) में ऑटिज्म जैसी बीमारियां ज्यादा है. 30 से 50 प्रतिशत ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों ने माइटोकांड्रिया विकार दिखाए हैं. जीन के स्तर पर सटीक कारण पता करना एक बहुत ही जटिल कार्य है. ऑटिज्म जैसी बीमारियों में केवल जेनेटिक (Genetic) बदलाव ही कारण नहीं है जिसके जरिए माइटोकांड्रिया योगदान दे सकता है. वायुप्रदूषण जैसे कारक भी माइटोकांड्रिया की सेहत पर असर डाल सकते हैं जिससे ऑटिज्म के मरीज प्रभावित होते हैं.

इतना ही नहीं साल 2010 में हुए एक शोध में यह भी पाया गया है कि जब माइटोकांड्रिया (Mitochondria) की स्थिति खराब होती है वे ऐसे पदार्थ निकालता है जिसे प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system)बाहरी आक्रमणकारी पदार्थ समझ कर उस पर हमला करती है और कोशिका तक को नुकसान पहुंचाती है. वहीं माइटोकांड्रिया ऐसा कार्य भी करता है जो दिमाग (Brain) की सेहत का कायम रखने के काम आते हैं. और इनमें गड़बड़ होने से दिमाग की सेहत पर सीधा असर होता है.वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि एक दिन माइटोकांड्रिया को आधार बना कर वे बहुत सी बीमरियों का इलाज खोज लेंगे.


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