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New Delhi नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र के मंच और अंतरराष्ट्रीय बहुपक्षीय चर्चा के अवसर पर, केंद्रीय मंत्री किर्ति वर्धन सिंह ने ग्लोबल साउथ के देशों के वैध और न्यायसंगत आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए समान और निष्पक्ष वैश्विक प्रथाओं की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने नोन्-अलाइनड मूवमेंट (NAM) की बैठक में कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उद्देश्य केवल शक्ति संतुलन या राजनीतिक हित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका मूल आधार समानता, विकास और अंतरराष्ट्रीय न्याय होना चाहिए।
सिंह ने अपने संबोधन में वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक असमानताओं पर प्रकाश डाला और कहा कि विकासशील देशों के पास अक्सर वैश्विक मंचों पर अपनी आवाज़ उठाने का अवसर सीमित होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि NAM देशों को एकजुट होकर समान व्यापार, प्रौद्योगिकी तक पहुंच और सतत विकास पहलों के लिए वकालत करनी चाहिए। यह कदम न केवल विकासशील देशों को उनके आर्थिक और सामाजिक लक्ष्यों की प्राप्ति में मदद करेगा, बल्कि वैश्विक न्याय और संतुलन की दिशा में भी महत्वपूर्ण होगा।
केंद्रीय मंत्री ने साउथ-साउथ सहयोग (South-South Cooperation) को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि NAM देशों के बीच संसाधनों, ज्ञान और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान आर्थिक विकास और सामाजिक उन्नति को गति देने में मदद कर सकता है। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि वैश्विक नीतियां सभी देशों के लिए समावेशी और न्यायसंगत होनी चाहिए, जिससे कोई देश वैश्विक निर्णय प्रक्रिया से वंचित न रहे। सिंह ने वैश्विक सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य और तकनीकी नवाचार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को इन क्षेत्रों में सहयोग और समर्थन की आवश्यकता है, ताकि वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहें और अपने नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार ला सकें।
सिंह ने भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया कि देश बहुपक्षीयता, शांतिपूर्ण सहयोग और न्यायसंगत विकास के सिद्धांतों के प्रति कटिबद्ध है। उन्होंने NAM देशों से अपील की कि वे मिलकर वैश्विक शासन, आर्थिक न्याय और समान अवसरों के लिए एक मजबूत और संतुलित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाने में योगदान दें। इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक व्यापार और वित्तीय प्रणाली में सुधार, तकनीकी हस्तांतरण और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के पालन के लिए साझा प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि NAM देशों को एकजुट होकर अपने हितों की रक्षा करते हुए, वैश्विक मंच पर अपने दृष्टिकोण को मजबूती से प्रस्तुत करना चाहिए। सिंह के इस भाषण को अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंचों पर विकासशील देशों की आवाज़ और उनके हितों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके विचार वैश्विक सुसंगति, न्याय और विकासशील देशों के सशक्तिकरण के संदेश को मजबूती देते हैं।
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