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गेलेफू में 108 स्तूपों का भव्य आयोजन
गेलेफू: भूटान के गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में 108 पवित्र बौद्ध स्तूपों की स्थापना से जुड़े भव्य समारोह में शामिल होने के लिए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू भूटान पहुंचे हैं। संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री रिजिजू इस आयोजन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। भूटान के राजा की परिकल्पना पर आधारित इस पहल को महत्वपूर्ण आध्यात्मिक आयोजन के रूप में देखा जा रहा है। रिजिजू ने अपनी यात्रा की जानकारी साझा करते हुए इसे गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व का क्षण बताया। कार्यक्रम में बौद्ध धर्मगुरुओं, श्रद्धालुओं और स्वयंसेवकों की भागीदारी है।
रिजिजू के भूटान पहुंचने पर पारो हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर भूटान के विदेश मंत्री ल्योंपो डीएन ढुंगेल, विदेश सचिव और दोनों देशों के राजदूत भी मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि वह 108 जंगचूब चोर्टेन की स्थापना के समारोह का साक्षी बनने के लिए गेलेफू जा रहे हैं। चोर्टेन बौद्ध स्तूप के लिए इस्तेमाल होने वाला स्थानीय शब्द है। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक सहभागिता का अवसर भी बना है।
यात्रा के दौरान भूटान के प्रधानमंत्री का एक विशेष आतिथ्य भाव भी सामने आया। गेलेफू पहुंचने के बाद शेरिंग तोबगे ने स्वयं कार चलाई। रिजिजू ने इसकी जानकारी साझा करते हुए इसे अपने लिए बड़ा सम्मान बताया। केंद्रीय मंत्री के स्वागत और कार्यक्रम में उनकी भागीदारी से दोनों देशों के बीच आत्मीय संबंधों की झलक दिखाई दी। हालांकि इस यात्रा से संबंधित किसी नए द्विपक्षीय समझौते की घोषणा उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है। यात्रा का मुख्य केंद्र पवित्र स्तूपों की स्थापना का समारोह ही है।
आयोजन को ‘प्रोजेक्ट 108’ नाम दिया गया है। इसकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में प्रत्येक 15 मीटर ऊंचे 108 जंगचूब चोर्टेन को एक ही दिन में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पहले से स्थल तैयार करने और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर काम चल रहा था। वेबसाइट में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की सहभागिता का उल्लेख है। इससे स्पष्ट है कि एक दिन में स्तूपों की स्थापना के मुख्य कार्यक्रम से पहले भी तैयारी की व्यापक प्रक्रिया रही है।
ये स्तूप माओ छू नदी के किनारे विकसित किए जा रहे हैं। आयोजन से संबंधित जानकारी के मुताबिक इन्हें लगभग 12 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में स्थापित किया गया है और स्तूपों के बीच 108 मीटर का अंतर रखा गया है। मुख्य समारोह एक नवंबर को निर्धारित है जबकि प्रार्थना और अन्य धार्मिक अनुष्ठान चार नवंबर तक चलने हैं। इस प्रकार कार्यक्रम केवल मुख्य स्थापना समारोह तक सीमित नहीं है। इसके बाद भी श्रद्धालुओं और धर्मगुरुओं की सहभागिता वाले आयोजन प्रस्तावित हैं।
भूटान ब्रॉडकास्टिंग सर्विस की प्रकाशित कार्यक्रम रूपरेखा के अनुसार मुख्य आयोजन की तैयारियां सूर्योदय से पहले शुरू होनी थीं। स्वयंसेवकों, भिक्षुओं और धर्मगुरुओं के निर्धारित स्थलों पर पहुंचने के बाद प्रार्थनाओं तथा पारंपरिक अनुष्ठानों का कार्यक्रम रखा गया। स्तूपों की स्थापना के अवसर पर पारंपरिक लंबी तुरहियों की ध्वनि और मंत्रोच्चार की व्यवस्था है। मुख्य समारोह में भूटान के राजा, शाही परिवार और धार्मिक नेतृत्व की उपस्थिति का कार्यक्रम भी बताया गया है। इससे आयोजन के धार्मिक और राष्ट्रीय महत्व का संकेत मिलता है।
बौद्ध परंपरा में स्तूप श्रद्धा, स्मरण और आध्यात्मिक साधना के केंद्र माने जाते हैं। प्रोजेक्ट 108 की वेबसाइट में इनके विभिन्न वास्तु तत्वों का प्रतीकात्मक अर्थ बताया गया है। आधार को स्थिरता से, सीढ़ीनुमा हिस्से को आध्यात्मिक मार्ग से और ऊपरी संरचनाओं को ज्ञान तथा करुणा से जोड़ा गया है। स्तूपों के भीतर पवित्र ग्रंथ, प्रार्थनाएं और धार्मिक महत्व की सामग्री स्थापित करने की परंपरा है। इस आयोजन में भी इन्हीं मान्यताओं के अनुरूप धार्मिक प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
समारोह में करुणा से जुड़े मंत्र ‘ओम मणि पद्मे हुम’ के सामूहिक जाप का भी उल्लेख है। आयोजन से संबंधित रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न देशों से प्राप्त पवित्र अवशेष और अन्य धार्मिक सामग्री स्तूपों में स्थापित करने के लिए जुटाई गई है। इसमें भारत, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर और अन्य स्थानों की सहभागिता बताई गई है। इस पहल ने अलग-अलग देशों के बौद्ध समुदायों को एक साझा धार्मिक आयोजन से जोड़ा है। हालांकि संभावित गिनीज रिकॉर्ड को लेकर आई खबरों के बीच इसकी औपचारिक मान्यता की पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
कार्यक्रम की आगे की रूपरेखा में दो नवंबर को स्तूपों के लिए प्रतिष्ठा संबंधी प्रार्थनाएं और तीन नवंबर को परिक्रमा तथा मंत्र जाप शामिल हैं। चार नवंबर को भी धार्मिक अनुष्ठान प्रस्तावित हैं। BBSCL रिजिजू की उपस्थिति इस व्यापक आयोजन में भारत की भागीदारी को रेखांकित करती है। गेलेफू में स्थापित किए जा रहे स्तूपों को शांति, करुणा और सामुदायिक सहभागिता के प्रतीकों के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। मुख्य समारोह के संपन्न होने और आगे के अनुष्ठानों के साथ परियोजना की अगली स्थिति स्पष्ट होगी।
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