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किम जोंग उन की बहन ने कथित ड्रोन घुसपैठ पर दक्षिण कोरिया से मांगा स्पष्टीकरण

jantaserishta.com
11 Jan 2026 2:08 PM IST
किम जोंग उन की बहन ने कथित ड्रोन घुसपैठ पर दक्षिण कोरिया से मांगा स्पष्टीकरण
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सोल: उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन की बहन किम यो-जोंग ने दक्षिण कोरिया से ड्रोन घुसपैठ के बारे में विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। उत्तर कोरिया का दावा है कि ड्रोन दक्षिण कोरिया से उसकी सीमा में घुसा था।
योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार, वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया के सेंट्रल कमेटी की वाइस डिपार्टमेंट डायरेक्टर किम यो-जोंग ने यह टिप्पणी की। किम यो-जोंग ने कहा, "आरओके की सेना ने बुद्धिमानी से यह घोषणा की कि यह उनकी तरफ से नहीं किया गया और उनका कोई उकसाने का इरादा नहीं है, लेकिन फिर भी ड्रोन के मामले पर विस्तृत जानकारी दी जानी चाहिए, चाहे वह सैन्य हो या नागरिक।"
उनका ये बयान उत्तर कोरिया की न्यूज एजेंसी केसीएनए ने जारी किया। आरओके, रिपब्लिक ऑफ कोरिया का संक्षिप्त रूप है और दक्षिण कोरिया का आधिकारिक नाम है। किम ने चेतावनी दी कि यदि कोई और उकसावा हुआ तो 'भयानक परिणाम' भुगतने होंगे।
किम ने कहा, "यह साफ है कि आरओके के ड्रोन ने हमारे देश के एयरस्पेस का उल्लंघन किया है। अगर आरओके भविष्य में फिर से हमारे खिलाफ उकसावे की कार्रवाई करेगा, तो उसे भयानक परिणाम भुगतने होंगे।"
उत्तर कोरिया का दावा है कि ड्रोन से बरामद वीडियो में एक यूरेनियम खदान, कैसोंग में बंद अंतर-कोरियाई औद्योगिक परिसर और उत्तर कोरियाई सीमा चौकियों की छवियां थीं। किम ने यह भी चेतावनी दी, "अगर वे इसे किसी सिविलियन संगठन का काम बताते हैं और फिर यह थ्योरी देने की कोशिश करते हैं कि यह संप्रभुता का उल्लंघन नहीं है, तो वे डीपीआरके के सिविलियन संगठन की ओर से भेजे गए भारी तादाद में यूएवी देखेंगे।"
डीपीआरके का मतलब 'डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया' है, जो उत्तर कोरिया का आधिकारिक नाम है। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि ड्रोन उनके सैन्य मॉडल का नहीं है और जांच चल रही है कि क्या कोई निजी संस्था इसमें शामिल थी। यह घटना दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ा रही है, और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने जांच के आदेश दिए हैं।
दक्षिण कोरिया में कंगनम्ह विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट फॉर फार ईस्टर्न स्टडीज के प्रोफेसर लिम ईउल-चुल ने किम के बयान को पुराने ढर्रे से अलग न होने का संकेत माना है। उनके मुताबिक, वे जताना चाहती हैं कि उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच कुछ भी बदलेगा नहीं, दुश्मनी जैसी थी वैसी ही रहेगी। इसके साथ ही, यह बयान सोल की शांति कोशिशों को नकारने के सरकार के नजरिए को स्पष्ट करने का तरीका भी है।
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