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पाकिस्तान के बलूचिस्तान में अपहरण की घटनाएं बढ़ीं, 16 साल का छात्र भी लापता
Ratna Netam
31 Oct 2026 2:18 PM IST

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क्वेटा। पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में जबरन लापता किए जाने के मामलों को लेकर एक बार फिर मानवाधिकार संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। प्रांत के केच जिले में अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों के कथित तौर पर अपहरण या हिरासत में लिए जाने के बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया है। लापता लोगों में 16 वर्षीय एक छात्र भी शामिल है। परिजनों और स्थानीय सूत्रों ने इन घटनाओं के लिए सुरक्षा एजेंसियों तथा सशस्त्र समूहों पर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तीनों घटनाएं केच जिले के अलग-अलग इलाकों में हुई हैं। लापता लोगों की पहचान अकरम, शमशेर अहमद और हनीफ के रूप में की गई है। इन मामलों ने एक बार फिर बलूचिस्तान में लंबे समय से जारी जबरन गुमशुदगी के विवाद को चर्चा में ला दिया है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से स्थानीय लोगों, खासकर युवाओं और छात्रों में डर का माहौल पैदा हो रहा है।
दस्तावेज जमा करने गए अकरम को किया गया लापता
रिपोर्ट के अनुसार, अकरम इस्माइल का बेटा है और केच जिले के मंड क्षेत्र के गोबार्ड का निवासी है। बताया गया है कि उसके परिवार के कई युवा सदस्य पिछले कुछ दिनों से लापता हैं। अकरम के मामले में स्थानीय सूत्रों ने आरोप लगाया कि फ्रंटियर कोर (FC) के अधिकारियों ने परिवार से लापता रिश्तेदारों के राष्ट्रीय पहचान पत्र और स्थानीय निवास प्रमाण पत्र लेकर कैंप में पहुंचने को कहा था।इसके बाद अकरम दो अन्य परिजनों के साथ जरूरी दस्तावेज जमा कराने के लिए कैंप पहुंचा। आरोप है कि दस्तावेज जमा करने के बाद जब वे वहां से वापस लौट रहे थे, तभी काले रंग की कोरोला कार में सवार कुछ लोगों ने अकरम को जबरन अपने साथ ले लिया। उसके साथ मौजूद अन्य दो लोगों को जाने दिया गया।स्थानीय सूत्रों ने आरोप लगाया है कि अकरम को ले जाने वाले लोग खुफिया एजेंसियों से जुड़े थे। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। घटना के बाद से अकरम के परिवार को उसकी स्थिति और ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।
घर में घुसकर 16 वर्षीय छात्र को उठाया
दूसरी घटना केच जिले के तुरबत क्षेत्र के गिबेन में सामने आई है। यहां 16 वर्षीय छात्र शमशेर अहमद, मुनीर अहमद नदील का बेटा है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, रात करीब 2 बजे हथियारबंद लोग उसके घर में दाखिल हुए और बंदूक की नोक पर उसे अपने साथ ले गए।परिवार ने आरोप लगाया है कि इस घटना में शामिल लोग स्थानीय स्तर पर तथाकथित सरकारी समर्थन प्राप्त सशस्त्र समूह से जुड़े हैं, जिन्हें 'डेथ स्क्वॉड' कहा जाता है। हालांकि, इन आरोपों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शमशेर के परिजनों को उसकी सुरक्षा और ठिकाने को लेकर चिंता बनी हुई है। एक नाबालिग छात्र के इस तरह लापता होने की घटना ने इलाके में बच्चों की सुरक्षा और मानवाधिकारों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तीसरे मामले में हनीफ को हिरासत में लेने का आरोप
तीसरी घटना में हनीफ, जो पीर मुहम्मद का बेटा और केच जिले के सोराग का निवासी बताया गया है, कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की हिरासत में लिया गया। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, बुधवार को उसे हिरासत में लेने के बाद किसी अज्ञात स्थान पर भेज दिया गया।इसके बाद से उसके परिवार को उसकी स्थिति और ठिकाने के बारे में जानकारी नहीं मिली है। परिजनों को आशंका है कि उसे भी जबरन लापता किए जाने के मामलों की तरह लंबे समय तक अज्ञात स्थान पर रखा जा सकता है।इन तीनों घटनाओं में पीड़ितों के परिवारों की मुख्य मांग है कि संबंधित अधिकारियों की ओर से उनके परिजनों के बारे में जानकारी दी जाए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी का मुद्दा कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय सामाजिक संगठनों के बीच चर्चा का विषय रहा है। बलूच यकजहती कमेटी (BYC) और अन्य मानवाधिकार संगठन लगातार ऐसे मामलों को दर्ज करते रहे हैं।30 सितंबर 2026 को जारी BYC के मानवाधिकार विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने के 507 कथित मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट में 303 लोगों के लापता रहने और 22 अन्य लोगों की स्थिति की पुष्टि नहीं हो पाने की जानकारी दी गई। संगठन के अनुसार, इस अवधि में 150 लोगों की रिहाई या वापसी दर्ज की गई।रिपोर्ट में लापता किए गए लोगों में 44 नाबालिगों और 135 छात्रों, शिक्षकों तथा शोधकर्ताओं के शामिल होने का दावा किया गया है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ छात्रों को बलूचिस्तान के अलावा इस्लामाबाद, कराची, लाहौर और मुल्तान जैसे शहरों से भी उठाया गया।
क्वेटा और केच में सबसे ज्यादा मामले दर्ज
BYC की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के बीच क्वेटा में जबरन गुमशुदगी के सबसे अधिक 79 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद केच में 77, पंजगुर में 65, ग्वादर में 55 और कराची में 33 मामले सामने आए।रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि लापता लोगों में से 32 की हिरासत के दौरान मौत हुई और बाद में उनके शव अलग-अलग स्थानों पर मिले। इसके अतिरिक्त संगठन ने नागरिकों की हत्याओं और कथित गैर-न्यायिक कार्रवाइयों के मामलों को भी दर्ज किया है।हालांकि, ये आंकड़े संगठन की ओर से एकत्र किए गए हैं और सभी मामलों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन दावों को मानवाधिकार संगठन की रिपोर्ट के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पाकिस्तान में जबरन गुमशुदगी का मुद्दा फिर चर्चा में
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी का मुद्दा पाकिस्तान की राजनीति और मानवाधिकार बहस का संवेदनशील विषय बना हुआ है। लापता लोगों के परिवार लंबे समय से अपने रिश्तेदारों की जानकारी, उनकी सुरक्षित वापसी और मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद उसके परिवार को जानकारी देना और उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत के सामने पेश करना जरूरी है। वहीं, पाकिस्तान में सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मामलों को लेकर सरकारी संस्थानों की भूमिका भी लगातार चर्चा में रहती है। सुरक्षा एजेंसियों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।केच जिले में सामने आए ताजा तीनों मामलों ने एक बार फिर इस गंभीर समस्या को उजागर किया है। खासकर 16 वर्षीय छात्र के लापता होने से नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इन मामलों में क्या कदम उठाते हैं और लापता लोगों के परिवारों को कब तक उनके परिजनों के बारे में जानकारी मिल पाती है।संपादकीय तथ्य-जांच: उपलब्ध 29-30 अक्टूबर की रिपोर्टों में तीन लापता लोगों का उल्लेख है, जिनमें एक 16 वर्षीय छात्र की उम्र स्पष्ट रूप से दर्ज है। दो नाबालिग होने की पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए खबर में एक नाबालिग का ही उल्लेख किया गया है।
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