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कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो रहा कराची सैटेलाइट रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

Ratna Netam
22 Oct 2026 3:29 PM IST
कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो रहा कराची सैटेलाइट रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
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कराची। पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में तेजी से बढ़ते शहरीकरण ने पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। पिछले 15 वर्षों में शहर के निर्मित क्षेत्र में लगभग 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान कृषि भूमि, पशुओं के चरने के मैदान और खुले स्थान लगातार इमारतों, सड़कों तथा अन्य निर्माण कार्यों की भेंट चढ़ते गए। तेजी से फैलते कंक्रीट के जंगल ने पाकिस्तान की शहरी नियोजन व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।पाकिस्तानी समाचार पत्र 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2010 से 2025 के बीच कराची का निर्मित क्षेत्र बढ़कर लगभग 1,400 वर्ग किलोमीटर से अधिक हो गया है। यह खुलासा पाकिस्तान के अंतरिक्ष एवं ऊपरी वायुमंडल अनुसंधान आयोग (SUPARCO) के सैटेलाइट आधारित विश्लेषण में हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अनियंत्रित शहरी विस्तार के कारण शहर और उसके आसपास की प्राकृतिक भूमि के स्वरूप में व्यापक बदलाव आया है।
15 वर्षों में बदली कराची की तस्वीर
SUPARCO के अनुसार, कराची में पिछले डेढ़ दशक के दौरान तेजी से आवासीय और व्यावसायिक निर्माण हुए हैं। बढ़ती आबादी, आवास की मांग और बुनियादी ढांचे के विस्तार के कारण शहर लगातार बाहरी इलाकों की ओर फैल रहा है।इस विस्तार का सबसे ज्यादा असर कृषि भूमि, चारागाहों और प्राकृतिक खुले क्षेत्रों पर पड़ा है। पहले जिन इलाकों में खेती होती थी या बारिश का पानी जमीन में समा जाता था, वहां अब बड़ी इमारतें, सड़कें और कंक्रीट की संरचनाएं दिखाई देने लगी हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि बिना उचित योजना के हो रहा शहरी विस्तार भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा कर सकता है।
बढ़ते तापमान से लोगों की मुश्किलें बढ़ेंगी
रिपोर्ट में कराची में बढ़ते 'अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव को लेकर विशेष चिंता जताई गई है। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें घनी आबादी वाले शहरी इलाकों का तापमान आसपास के ग्रामीण और हरियाली वाले क्षेत्रों की तुलना में अधिक हो जाता है।कंक्रीट की इमारतें, डामर की सड़कें और पक्की सतहें दिन में गर्मी सोखती हैं और धीरे-धीरे उसे वातावरण में छोड़ती हैं। इससे शहर का तापमान अधिक बना रहता है।SUPARCO के विश्लेषण के अनुसार, निर्मित क्षेत्रों का लगातार विस्तार इस समस्या को और गंभीर बना रहा है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य, काम करने की क्षमता और बिजली की मांग पर पड़ सकता है।विशेष रूप से खुले में काम करने वाले मजदूरों, बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए अत्यधिक गर्मी गंभीर खतरा बन सकती है।
मानसून में बाढ़ का खतरा भी बढ़ा
तेजी से हो रहे निर्माण कार्यों के कारण कराची में बारिश के पानी का प्राकृतिक निकास प्रभावित हो रहा है। जहां पहले मिट्टी और खुले मैदान बारिश के पानी को सोख लेते थे, वहां अब सीमेंट और कंक्रीट की सतहों के कारण पानी तेजी से सड़कों पर जमा होने लगता है।विशेषज्ञों के अनुसार, जमीन में पानी समाने की क्षमता कम होने से भारी बारिश के दौरान शहरी बाढ़ का जोखिम बढ़ जाता है।वर्ष 2020 में कराची में हुई भीषण बारिश और जलभराव ने इस खतरे को सामने ला दिया था। रिकॉर्ड बारिश और अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था के कारण शहर के कई इलाके प्रभावित हुए थे।
बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अनियोजित शहरीकरण का असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहेगा। इससे बिजली, पेयजल, जल निकासी और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।गर्मी बढ़ने के कारण एयर कंडीशनर और अन्य शीतलन उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ सकता है, जिससे बिजली की मांग में वृद्धि होगी। दूसरी ओर, लगातार घटते खुले स्थान और प्राकृतिक जल पुनर्भरण वाले क्षेत्रों से जल संकट भी गंभीर हो सकता है।बढ़ते तापमान के कारण श्रमिकों की उत्पादकता में कमी और गर्मी से संबंधित बीमारियों के इलाज पर खर्च बढ़ने की आशंका है।
बेहतर शहरी नियोजन की जरूरत
विशेषज्ञों ने कराची में टिकाऊ शहरी विकास की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि प्राकृतिक भूमि और हरित क्षेत्रों का संरक्षण, बेहतर जल निकासी व्यवस्था, वर्षा जल संचयन और योजनाबद्ध निर्माण भविष्य की चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकते हैं।तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच कराची के सामने सबसे बड़ी चुनौती विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो बढ़ती गर्मी, जलभराव और प्राकृतिक संसाधनों की कमी शहरवासियों की मुश्किलें और बढ़ा सकती है।
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