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Tokyo टोक्यो। जापान की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) 8 फरवरी को होने वाले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचला सदन) के चुनाव में बहुमत हासिल करने की ओर बढ़ रही है। स्थानीय मीडिया ने गुरुवार को दो प्रमुख मीडिया संस्थानों द्वारा कराए गए जनमत सर्वेक्षणों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी। इन सर्वेक्षणों के अनुसार, एलडीपी खास तौर पर उन निर्वाचन क्षेत्रों में मजबूत स्थिति में है, जहां रूढ़िवादी मतदाताओं की संख्या अधिक है। बुधवार को जारी निक्केई सर्वेक्षण में संकेत दिया गया कि प्रधानमंत्री साने ताकाइची द्वारा 23 जनवरी को निचला सदन भंग किए जाने से पहले एलडीपी के पास जो 198 सीटें थीं, उनसे अधिक सीटों पर पार्टी जीत दर्ज कर सकती है। यह संख्या 465 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए जरूरी 233 सीटों के आंकड़े से अधिक होगी। द जापान टाइम्स ने यह रिपोर्ट दी।
सर्वेक्षण के मुताबिक, जापान के 289 एकल-सीट वाले निर्वाचन क्षेत्रों में से लगभग 40 प्रतिशत में एलडीपी के उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं। कुमामोटो, यामागुची और तोकुशिमा प्रांतों में पार्टी का दबदबा देखा जा रहा है। हालांकि, 150 से अधिक सीटों पर मुकाबला कड़ा बना हुआ है, जहां एलडीपी को अन्य राजनीतिक दलों से कड़ी चुनौती मिल रही है। विपक्षी सेंट्रिस्ट रिफॉर्म एलायंस (सीआरए) के बारे में अनुमान है कि वह संसद भंग होने से पहले उसके पास मौजूद 167 सीटों से कम पर सिमट सकती है और कुल सीटों की संख्या 100 से नीचे रह सकती है।
अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत एलडीपी को 70 या उससे अधिक सीटें मिलने का अनुमान है, जो पिछले निचले सदन चुनाव में मिली 59 सीटों से अधिक होंगी। जापान इनोवेशन पार्टी (जेआईपी) के साथ मिलकर एलडीपी के नेतृत्व वाला गठबंधन कुल 261 सीटें जीत सकता है, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन को संसद की सभी समितियों में भी बहुमत बनाने में मदद मिलेगी। सीआरए के केवल कुछ ही उम्मीदवार एकल-सीट वाले क्षेत्रों में मजबूत स्थिति में हैं। पार्टी को लगभग 40 निर्वाचन क्षेत्रों में ज्यादा वोट मिलने की उम्मीद है और करीब 100 सीटों पर जीत की संभावना जताई जा रही है, जबकि अनुपातिक प्रतिनिधित्व के जरिए उसे लगभग 40 सीटें मिल सकती हैं।
इस बीच, योमियूरी शिंबुन के जनमत सर्वेक्षण में भी संकेत मिला है कि एलडीपी आगामी चुनाव में बहुमत हासिल कर सकती है। सर्वे के अनुसार, चुगोकू और क्यूशू क्षेत्रों में पार्टी की मजबूत बढ़त है और जिन क्षेत्रों में उसका पारंपरिक समर्थन आधार मजबूत है, वहां वह सभी सीटें जीत सकती है। जापान इनोवेशन पार्टी (निप्पॉन इशिन नो काई) ओसाका में अपने गढ़ में मजबूत बनी हुई है, लेकिन अनुपातिक प्रतिनिधित्व वोटों में उसे संघर्ष करना पड़ रहा है। योमियूरी शिंबुन के सर्वेक्षण के अनुसार भी सीआरए को संसद भंग होने से पहले की तुलना में कम सीटें मिलने का अनुमान है।
संसद भंग होने से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन के पास निचले सदन में बेहद मामूली बहुमत था और ऊपरी सदन (हाउस ऑफ काउंसिलर्स) में वह अल्पमत में था। ऐसे में किसी भी विधेयक को पारित कराने के लिए उसे विपक्षी दलों के सांसदों के समर्थन की जरूरत पड़ती थी। गौरतलब है कि 23 जनवरी को प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने अचानक चुनाव की घोषणा करते हुए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स को भंग कर दिया था और चुनाव 8 फरवरी को कराने का फैसला लिया गया। ताकाइची मंत्रिमंडल ने 465 सदस्यीय सदन को भंग करने की योजना को मंजूरी दी थी। क्योदो न्यूज़ के अनुसार, यह पिछले छह दशकों में पहली बार है जब नियमित सत्र की शुरुआत में निचला सदन भंग किया गया है। प्रधानमंत्री ताकाइची ने कहा है कि उन्होंने चुनाव कराने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि अक्टूबर में पद संभालने के बाद से अब तक उन्हें अपनी सरकार के लिए जनता का स्पष्ट समर्थन प्राप्त नहीं हुआ है।
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