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बाकू : 23 अक्टूबर 2026। भारत और अज़रबैजान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में शुक्रवार को महत्वपूर्ण कूटनीतिक बातचीत हुई। अज़रबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक के बाद भरोसा जताया कि दोनों देशों के संबंध आने वाले समय में और मजबूत होंगे। इस दौरान ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, व्यापार, निवेश और अंतरराष्ट्रीय परिवहन गलियारों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।अज़रबैजान की राजधानी बाकू में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक को बायरामोव ने बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जयशंकर के साथ बातचीत व्यापक, रचनात्मक और फलदायी रही। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया।
भारत-अज़रबैजान के रिश्तों को नई दिशा देने पर जोर
बैठक के बाद आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में जेहुन बायरामोव ने कहा कि भारत और अज़रबैजान के बीच पिछले कुछ वर्षों में कुछ मुद्दों पर मतभेद रहे हैं। इनका असर दोनों देशों के संबंधों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग पर भी पड़ा।हालांकि, उन्होंने बताया कि शुक्रवार की बैठक में इन मुद्दों पर खुले और रचनात्मक वातावरण में चर्चा की गई।बायरामोव ने विश्वास जताया कि यह बातचीत दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर पैदा करेगी और संबंधों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
ऊर्जा, कृषि और दवा उद्योग में सहयोग की संभावनाएं
दोनों विदेश मंत्रियों ने आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया। बैठक में व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन, शिक्षा, विज्ञान तथा सांस्कृतिक सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई।भारत और अज़रबैजान के बीच ऊर्जा क्षेत्र पहले से ही आर्थिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। दोनों देशों के लिए दवा उद्योग, कृषि और आधुनिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं मौजूद हैं।बायरामोव ने बताया कि इस वर्ष के शुरुआती छह महीनों में दोनों देशों का व्यापार लगभग 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यापार दोनों देशों की वास्तविक आर्थिक क्षमताओं को पूरी तरह नहीं दर्शाता।
अंतरराष्ट्रीय परिवहन गलियारों पर विशेष चर्चा
बैठक का एक प्रमुख विषय अंतरराष्ट्रीय परिवहन और लॉजिस्टिक कॉरिडोर रहा।दोनों पक्षों ने उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम परिवहन गलियारों के विकास तथा उनसे मिलने वाले व्यापारिक अवसरों पर चर्चा की।अज़रबैजान ने बाकू-त्बिलिसी-कार्स रेलवे, बाकू बंदरगाह और अलात मुक्त आर्थिक क्षेत्र में मौजूद सुविधाओं की जानकारी भी साझा की।बायरामोव ने कहा कि भारत इन परिवहन गलियारों में गहरी दिलचस्पी दिखा रहा है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों की संख्या बढ़ाने की संभावनाओं पर भी संबंधित एजेंसियां चर्चा कर रही हैं।
मोदी और अलीयेव की मुलाकात का भी जिक्र
बायरामोव ने कहा कि विदेश मंत्री जयशंकर की बाकू यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के बीच बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान हुई बातचीत का अगला चरण है।जयशंकर ने शुक्रवार को राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं।अलीयेव ने भारत के साथ राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।
क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श
बैठक में दक्षिण काकेशस क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति, अज़रबैजान और आर्मेनिया के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचार किया गया।इसके अलावा मध्य पूर्व की स्थिति, रूस-यूक्रेन संघर्ष और इनके अंतरराष्ट्रीय प्रभावों पर भी चर्चा हुई।दोनों विदेश मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग जारी रखने के महत्व को रेखांकित किया।
जयशंकर ने दिया भारत आने का निमंत्रण
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जेहुन बायरामोव को निकट भविष्य में पारस्परिक सुविधा के अनुसार भारत की यात्रा करने का निमंत्रण दिया।दोनों देशों ने व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों और अन्य क्षेत्रों के अधिकारियों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी सहमति जताई।जयशंकर ने कहा कि बैठक से द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा स्पष्ट हुई है। उन्होंने क्षेत्रीय संकट के दौरान ईरान से भारतीय नागरिकों, विशेषकर छात्रों की निकासी में अज़रबैजान की सहायता के लिए आभार भी व्यक्त किया।इस उच्चस्तरीय बातचीत को दोनों देशों के संबंधों में सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, बैठक के बाद किसी नए औपचारिक व्यापार या निवेश समझौते की घोषणा नहीं हुई है। आगे की प्रगति दोनों देशों के बीच होने वाली बैठकों और संयुक्त पहलों पर निर्भर करेगी।
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