
न्यूयॉर्क: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के उच्च-स्तरीय कार्यक्रमों के बीच न्यूयॉर्क में कई देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ यूक्रेन संघर्ष, खाड़ी क्षेत्र की स्थिति, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार, व्यापार, ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और बहुपक्षीय सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई। जयशंकर रविवार को न्यूयॉर्क पहुंचे थे और UNGA के 81वें सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।
फ्रांस के विदेश मंत्री के साथ हुई पहली बैठक
सोमवार को जयशंकर के कूटनीतिक कार्यक्रम की शुरुआत फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट के साथ बैठक से हुई। दोनों नेताओं ने भारत-फ्रांस संबंधों की प्रगति की समीक्षा करने के साथ कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा किए।
जयशंकर ने बैठक के बाद कहा कि दोनों देशों के बीच नियमित बैठकें और टेलीफोन पर होने वाली बातचीत विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की गति बनाए रखने में मदद करती हैं। दोनों मंत्रियों के बीच यूक्रेन और खाड़ी संकट पर चर्चा हुई। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार सहित बहुपक्षीय मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा रहे।
फ्रांस के विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय कानून और प्रभावी बहुपक्षवाद के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने यूक्रेन में युद्धविराम तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप व्यापक और स्थायी शांति के समर्थन की बात भी कही।
होर्मुज और बाब-अल-मंदेब पर भी चर्चा
भारत और फ्रांस के विदेश मंत्रियों की बातचीत में समुद्री सुरक्षा का मुद्दा भी सामने आया। फ्रांस के आधिकारिक बयान के अनुसार दोनों पक्षों ने होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब में नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया।
फ्रांसीसी विदेश मंत्री बैरोट ने इस विषय पर भारत के साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव रखा। दोनों समुद्री मार्ग एशिया और यूरोप के बीच व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
भारत और फ्रांस ने रक्षा, नई प्रौद्योगिकी और उच्च शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अपनी विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति का भी स्वागत किया।
इक्वाडोर के विदेश मंत्री से आर्थिक संबंधों पर बात
जयशंकर ने इक्वाडोर के विदेश मंत्री रॉबर्टो कुरी के साथ भी बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
जयशंकर के अनुसार बातचीत में ऊर्जा और फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ लोगों की आवाजाही, कर्मियों के प्रशिक्षण, विकास साझेदारी और संयुक्त राष्ट्र सहित बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के नए अवसर तलाशने पर जोर दिया गया। भारत विभिन्न क्षेत्रों में लैटिन अमेरिकी देशों के साथ अपने संबंधों को विस्तार देने पर काम कर रहा है और UNGA जैसे मंच द्विपक्षीय संवाद के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराते हैं।
स्लोवाकिया के विदेश मंत्री से मुलाकात
विदेश मंत्री जयशंकर ने स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार के साथ भी बातचीत की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय एजेंडे की समीक्षा करने के साथ बहुपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।
यह बैठक ऐसे समय हुई जब भारत और मध्य यूरोप के देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में बातचीत बढ़ रही है।
हंगरी की विदेश मंत्री के साथ पहली बैठक
जयशंकर ने हंगरी की उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री अनीता ओरबान के साथ भी बैठक की। उन्होंने इसे दोनों के बीच पहली अच्छी बैठक बताया।
दोनों पक्षों ने भारत और हंगरी के संबंधों को और गहरा करने तथा द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
स्विट्जरलैंड के साथ आर्थिक साझेदारी की समीक्षा
जयशंकर ने स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री इग्नाजियो कैसिस से भी अलग बैठक की। इस दौरान भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी EFTA के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते के लागू होने के बाद आर्थिक संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की गई।
EFTA में स्विट्जरलैंड के अलावा नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। भारत इस समझौते के जरिए व्यापार और निवेश संबंधों के विस्तार पर काम कर रहा है।
जयशंकर ने नाउरू के राष्ट्रपति डेविड एडियांग से भी मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों तथा बहुपक्षीय विषयों पर बातचीत की।
V4 देशों के साथ भी हुई अहम बैठक
न्यूयॉर्क में जयशंकर ने भारत और विसेग्राद समूह यानी V4 देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक में भी हिस्सा लिया। V4 में पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य शामिल हैं।
बैठक में राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी, रक्षा, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठक और वार्षिक बिजनेस फोरम स्थापित करने पर भी सहमति जताई।
Pleasure to meet FM @jnbarrot of France #UNHighLevelWeek
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) September 21, 2026
Our regular meetings and telecons enable us to maintain the momentum of our Special Global Strategic Partnership.
Regional and global issues, specifically the Ukraine & Gulf crisis were discussed. Also exchanged views on… pic.twitter.com/KkZuYlnS13
चर्चा में प्रौद्योगिकी और नवाचार, रक्षा, अंतरिक्ष, कनेक्टिविटी और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों के अलावा यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति जैसे वैश्विक विषय शामिल रहे।
UNSC सुधार भारत के एजेंडे में प्रमुख
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार जयशंकर की कई बैठकों के दौरान महत्वपूर्ण विषय के रूप में सामने आया। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग करता रहा है।
फ्रांस के साथ हुई बैठक में भी दोनों देशों ने सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर अपना रुख दोहराया।
न्यूयॉर्क में चल रहे उच्च-स्तरीय सप्ताह के दौरान वैश्विक संघर्ष, बहुपक्षीय व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय कानून, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठ रहे हैं। जयशंकर ने ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रॉस्पेरिटी’ शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लिया, जहां उन्होंने मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत बहुपक्षीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
26 सितंबर को UNGA को संबोधित करेंगे जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का न्यूयॉर्क में कूटनीतिक कार्यक्रम आगे भी जारी रहेगा। वह 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस में भारत की ओर से विश्व नेताओं को संबोधित करेंगे।
उनकी अब तक की बैठकों में भारत के द्विपक्षीय संबंधों के साथ संयुक्त राष्ट्र सुधार, यूक्रेन संघर्ष, खाड़ी संकट, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा, व्यापार और तकनीकी सहयोग प्रमुख मुद्दे रहे हैं। UNGA के मंच और उसके इतर हो रही इन बैठकों के जरिए भारत विभिन्न क्षेत्रों के देशों के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक सहयोग के एजेंडे को आगे बढ़ा रहा





