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जयशंकर ने संभाली भारत रूस बैठक कारोबार से कनेक्टिविटी तक चर्चा
Ratna Netam
3 Oct 2026 3:07 PM IST

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नई दिल्ली/कोच्चि। भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा और समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। रूसी नौसेना के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में केरल का दौरा किया। कैप्टन फर्स्ट रैंक सर्गेई वी. सैतोव के नेतृत्व में पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिणी नौसेना कमान और भारतीय नौसेना अकादमी का दौरा किया। भारतीय नौसेना के मुताबिक, यह यात्रा दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग, प्रशिक्षण और पेशेवर संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से की गई।भारतीय नौसेना ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस दौरे की जानकारी साझा की। नौसेना के अनुसार, रूसी प्रतिनिधिमंडल ने 27 सितंबर से 1 अक्टूबर तक केरल में विभिन्न संस्थानों और प्रशिक्षण सुविधाओं का निरीक्षण किया। यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण ढांचे, भौतिक बुनियादी ढांचे और ट्रेनिंग सुविधाओं को करीब से देखा।
दक्षिणी नौसेना कमान का किया दौरा
रूसी प्रतिनिधिमंडल ने केरल स्थित भारतीय नौसेना की दक्षिणी नौसेना कमान का दौरा किया। दक्षिणी नौसेना कमान भारतीय नौसेना के प्रमुख प्रशिक्षण केंद्रों में से एक है। यहां नौसैनिक अधिकारियों और कर्मियों को विभिन्न स्तरों पर प्रशिक्षण दिया जाता है।दौरे के दौरान रूसी प्रतिनिधिमंडल को भारतीय नौसेना की प्रशिक्षण व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशिक्षण से जुड़े बुनियादी ढांचे और संस्थागत व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। इस दौरान दोनों पक्षों के अधिकारियों के बीच पेशेवर स्तर पर विचार-विमर्श भी हुआ।रूसी प्रतिनिधिमंडल का दक्षिणी नौसेना कमान पहुंचना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के प्रमुख हिस्सों में शामिल हैं। लंबे समय से भारत और रूस के रक्षा संबंध केवल सैन्य उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और संयुक्त गतिविधियों तक भी उनका विस्तार हुआ है।
भारतीय नौसेना अकादमी में प्रशिक्षण व्यवस्था का निरीक्षण
प्रतिनिधिमंडल ने केरल के एझिमाला स्थित भारतीय नौसेना अकादमी का भी दौरा किया। भारतीय नौसेना अकादमी में नौसेना के अधिकारियों की बुनियादी और पेशेवर ट्रेनिंग होती है। यहां कैडेट्स को समुद्री संचालन, नेतृत्व, तकनीकी कौशल और सैन्य अनुशासन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण दिया जाता है।भारतीय नौसेना के मुताबिक, रूसी प्रतिनिधिमंडल ने अकादमी की प्रशिक्षण सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचे का निरीक्षण किया। प्रतिनिधिमंडल को संस्थान में चलने वाली प्रशिक्षण गतिविधियों और सुविधाओं की जानकारी दी गई। इस तरह की यात्राएं दोनों देशों की सैन्य प्रशिक्षण प्रणालियों के बीच आपसी समझ बढ़ाने में मदद करती हैं।
समुद्री सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा
भारतीय नौसेना ने कहा कि यात्रा के दौरान दोनों पक्षों के बीच समुद्री सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा हुई। इसके अलावा इंटरऑपरेबिलिटी यानी दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने और संस्थागत तथा पेशेवर संबंधों को मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।नौसैनिक अभियानों में इंटरऑपरेबिलिटी का मतलब अलग-अलग देशों की सेनाओं के बीच ऐसी क्षमता विकसित करना है, जिससे वे संयुक्त अभ्यास या किसी साझा अभियान के दौरान प्रभावी ढंग से एक-दूसरे के साथ काम कर सकें। इसके लिए संचार, प्रक्रियाओं, प्रशिक्षण और संचालन संबंधी समझ का होना जरूरी होता है।भारत और रूस के बीच पहले भी विभिन्न स्तरों पर सैन्य अभ्यास और रक्षा सहयोग देखने को मिला है। समुद्री क्षेत्र में होने वाले संवाद और प्रशिक्षण यात्राएं दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच प्रक्रियात्मक समझ को बेहतर बनाने में भूमिका निभाती हैं।
लंबे समय से चली आ रही नौसैनिक साझेदारी
भारतीय नौसेना ने अपने X पोस्ट में इस यात्रा को भारत और रूस के बीच “लंबे समय से चली आ रही नौसैनिक साझेदारी” का उदाहरण बताया। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग कई दशकों पुराना है और नौसैनिक क्षेत्र में भी इसका व्यापक आधार रहा है।रूस और भारत के बीच रक्षा संबंधों में युद्धपोतों, पनडुब्बियों, मिसाइल प्रणालियों, विमानन तकनीक और अन्य सैन्य क्षमताओं से जुड़े सहयोग का इतिहास रहा है। भारतीय नौसेना के कई प्लेटफॉर्म रूसी मूल की या रूसी सहयोग से विकसित तकनीक पर आधारित रहे हैं। इस वजह से दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच तकनीकी और परिचालन स्तर पर भी लंबे समय से संपर्क बना हुआ है।
प्रशिक्षण और पेशेवर संपर्क की अहम भूमिका
रक्षा सहयोग को स्थायी और प्रभावी बनाए रखने में केवल उपकरण या तकनीक ही महत्वपूर्ण नहीं होते। सैन्य संस्थानों के बीच नियमित संपर्क, प्रशिक्षण आदान-प्रदान और अधिकारियों की एक-दूसरे की प्रणालियों को समझना भी जरूरी माना जाता है।रूसी प्रतिनिधिमंडल की केरल यात्रा इसी व्यापक सहयोग का हिस्सा दिखाई देती है। प्रशिक्षण संस्थानों का दौरा करने से दोनों पक्षों को एक-दूसरे की प्रशिक्षण प्रणालियों, सुविधाओं और प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिलता है। इसके साथ ही भविष्य में प्रशिक्षण सहयोग और संस्थागत संपर्क की नई संभावनाएं भी सामने आ सकती हैं।
भारत-रूस संबंधों में समुद्री आयाम
भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों में ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष, रक्षा और तकनीकी सहयोग के साथ समुद्री क्षेत्र का भी महत्व है। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भौगोलिक स्थिति और रूस की व्यापक समुद्री क्षमताएं दोनों देशों के लिए रणनीतिक दृष्टि से प्रासंगिक हैं।हाल के वर्षों में समुद्री सुरक्षा, नौसैनिक प्रशिक्षण और संयुक्त अभ्यासों को लेकर भी दोनों देशों के बीच संवाद जारी रहा है। ऐसे में वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल की यात्राएं आपसी संपर्क को संस्थागत स्तर पर बनाए रखने में मदद करती हैं।
आगे बढ़ सकता है सहयोग
रूसी नौसेना के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की 27 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चली यात्रा के दौरान दक्षिणी नौसेना कमान और भारतीय नौसेना अकादमी का निरीक्षण और अधिकारियों के साथ बातचीत ने भविष्य के समुद्री सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया है।भारतीय नौसेना ने स्पष्ट किया कि चर्चाओं का केंद्र समुद्री सहयोग को गहरा करना, इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना और संस्थागत तथा पेशेवर संबंधों को मजबूत करना था। यह सहयोग भविष्य में प्रशिक्षण, विशेषज्ञ आदान-प्रदान और संयुक्त गतिविधियों के नए अवसरों का आधार बन सकता है।कुल मिलाकर, रूसी नौसेना प्रतिनिधिमंडल की केरल यात्रा भारत-रूस के पारंपरिक रक्षा संबंधों में समुद्री आयाम को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम के रूप में सामने आई है। दक्षिणी नौसेना कमान और भारतीय नौसेना अकादमी का दौरा दोनों देशों के बीच प्रशिक्षण और पेशेवर संवाद को बढ़ाने के महत्व को भी दर्शाता है। भारतीय नौसेना के अनुसार, यह यात्रा दोनों देशों की लंबे समय से चली आ रही नौसैनिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और भविष्य में अधिक प्रभावी सहयोग की संभावनाएं तलाशने का अवसर बनी।
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