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नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान प्रशांत द्वीप देशों और कैरिबियाई क्षेत्र के कई नेताओं एवं प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें कीं। इन मुलाकातों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय और बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर बातचीत हुई। जयशंकर ने अपनी इन बैठकों की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर भी साझा की।न्यूयॉर्क में अपने व्यस्त कूटनीतिक कार्यक्रम के दौरान जयशंकर ने पापुआ न्यू गिनी के विदेश मंत्री जस्टिन डब्ल्यू. टकाचेंको, फिजी के विदेश मंत्री साकियासी डिटोका और सेंट लूसिया के विदेश मंत्री अल्वा रोमनस बैप्टिस्ट से मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने वानुअतु के स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट बोहन और कैरिबियन समुदाय (CARICOM) की महासचिव कार्ला बार्नेट के साथ भी बातचीत की।
पापुआ न्यू गिनी के विदेश मंत्री से मुलाकात
जयशंकर ने पापुआ न्यू गिनी के विदेश मंत्री जस्टिन टकाचेंको के साथ बैठक की। यह मुलाकात भारत के प्रशांत द्वीप देशों के साथ लगातार बढ़ते संपर्क की पृष्ठभूमि में हुई।पापुआ न्यू गिनी भारत के Forum for India-Pacific Islands Cooperation यानी FIPIC ढांचे का महत्वपूर्ण भागीदार है। भारत इस मंच के जरिए प्रशांत द्वीप देशों के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, क्षमता निर्माण और विकास सहयोग सहित कई क्षेत्रों में संबंध आगे बढ़ा रहा है।इससे पहले 2023 में पापुआ न्यू गिनी में तीसरा FIPIC शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था। उस दौरान भारत ने प्रशांत द्वीप देशों के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए 12-सूत्रीय कार्ययोजना की घोषणा की थी। 2026 की बैठकों में उस कार्ययोजना के तहत हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई।
फिजी के साथ सहयोग पर चर्चा
विदेश मंत्री ने फिजी के विदेश मंत्री साकियासी डिटोका के साथ भी मुलाकात की। फिजी के विदेश मंत्रालय के अनुसार, UNGA के दौरान आयोजित FIPIC विदेश मंत्रियों की बैठक में दोनों देशों के बीच लंबे संबंधों और प्रशांत क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा हुई।फिजी ने भारत के साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय स्तर पर साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक में जलवायु परिवर्तन और उससे निपटने के लिए प्रशांत देशों की जरूरतों का विषय भी प्रमुख रहा।प्रशांत द्वीप देशों के लिए जलवायु परिवर्तन, समुद्र के बढ़ते स्तर और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की क्षमता प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। भारत ने भी FIPIC के तहत इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है।
सेंट लूसिया के विदेश मंत्री से बातचीत
जयशंकर ने सेंट लूसिया के विदेश मंत्री अल्वा रोमनस बैप्टिस्ट से भी मुलाकात की। सेंट लूसिया कैरिबियाई क्षेत्र का एक द्वीपीय देश है। इस मुलाकात को भारत की कैरिबियाई देशों के साथ जारी बातचीत की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।संयुक्त राष्ट्र महासभा जैसे बहुपक्षीय मंचों के दौरान होने वाली द्विपक्षीय बैठकें विभिन्न देशों को अलग से उच्चस्तरीय दौरे आयोजित किए बिना कई मुद्दों पर सीधे बातचीत का अवसर देती हैं। जयशंकर ने UNGA के दौरान यूरोप, प्रशांत और अन्य क्षेत्रों के कई देशों के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठकें की हैं।
वानुअतु के स्वास्थ्य मंत्री से मिले जयशंकर
विदेश मंत्री ने वानुअतु के स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट बोहन के साथ भी बातचीत की। स्वास्थ्य सेवा भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है।इससे पहले FIPIC विदेश मंत्रियों की बैठक में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु कार्रवाई, आपदा से निपटने की क्षमता और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।वानुअतु के स्वास्थ्य मंत्री ने भी FIPIC की बैठक में भाग लिया। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को प्रशांत देशों के साथ भारत की साझेदारी के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में रेखांकित किया गया।
CARICOM महासचिव कार्ला बार्नेट से मुलाकात
जयशंकर ने कैरिबियन समुदाय यानी CARICOM की महासचिव कार्ला बार्नेट से भी मुलाकात की। CARICOM कैरिबियाई देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग का प्रमुख मंच है।इस बैठक के जरिए भारत और कैरिबियाई समुदाय के बीच संस्थागत स्तर पर बातचीत को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। भारत कैरिबियाई देशों के साथ विकास सहयोग, क्षमता निर्माण और विभिन्न बहुपक्षीय मुद्दों पर संपर्क बनाए हुए है।जयशंकर और कार्ला बार्नेट की मुलाकात की तस्वीर भी सामने आई है। दोनों की बैठक UNGA के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में हुई।
FIPIC बैठक की भी जयशंकर ने की अध्यक्षता
इन द्विपक्षीय बैठकों से पहले जयशंकर ने न्यूयॉर्क में FIPIC के विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में भारत और प्रशांत द्वीप देशों ने अपनी साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।बैठक में नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु कार्रवाई, आपदा प्रतिरोधक क्षमता, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने पिछले FIPIC शिखर सम्मेलनों के बाद हुई प्रगति और 2023 में घोषित 12-सूत्रीय कार्ययोजना के क्रियान्वयन की समीक्षा भी की।FIPIC बैठक में समोआ के उपप्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री के अलावा फिजी, मार्शल आइलैंड्स, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन आइलैंड्स और तुवालु के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। टोंगा, माइक्रोनेशिया, वानुअतु और नाउरू के मंत्री एवं वरिष्ठ प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए। Pacific Islands Forum के महासचिव ने भी बैठक में भाग लिया।
प्रशांत देशों के साथ संबंधों पर भारत का फोकस
प्रशांत द्वीप देशों के साथ भारत का सहयोग FIPIC के जरिए संस्थागत रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। यह मंच भारत और प्रशांत द्वीप देशों को साझा विकास चुनौतियों और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत का अवसर देता है।विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं प्रशांत क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। इसी कारण भारत और इन देशों के बीच बातचीत में नवीकरणीय ऊर्जा, आपदा प्रतिरोधक क्षमता और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी जा रही है।
UNGA के दौरान कूटनीतिक बैठकों का दौर
संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान जयशंकर ने अलग-अलग देशों और संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ कई द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय बैठकें की हैं। इससे पहले उन्होंने व्यापार, निवेश, जलवायु परिवर्तन, तकनीक और भू-राजनीतिक मुद्दों को लेकर यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों से भी बातचीत की।प्रशांत द्वीप देशों और CARICOM के प्रतिनिधियों के साथ गुरुवार की बैठकों में भारत का फोकस इन क्षेत्रों के साथ राजनीतिक संवाद और विकास साझेदारी को आगे बढ़ाने पर रहा। UNGA जैसे वैश्विक मंच पर एक साथ कई देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने भारत को द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय मंचों पर भी अपनी बातचीत आगे बढ़ाने का अवसर दिया।
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