
Nicosia निकोसिया : विदेश मंत्री S. Jaishankar ने बुधवार को यूक्रेन के विदेश मंत्री Andrii Sybiha के साथ मुलाकात की, जिसमें रूस-यूक्रेन युद्ध, हालिया घटनाक्रम और स्थायी शांति की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठक साइप्रस में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक के दौरान आयोजित जिमनिच फोरम के मौके पर हुई।
दोनों नेताओं के बीच बातचीत का मुख्य फोकस चल रहे युद्ध की स्थिति और जमीनी स्तर पर हो रहे विकास पर रहा। इस दौरान संघर्ष को समाप्त करने और क्षेत्र में स्थायी एवं व्यापक शांति स्थापित करने के प्रयासों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में यह भी चर्चा हुई कि वर्तमान परिस्थितियों में कूटनीतिक प्रयासों को किस तरह आगे बढ़ाया जा सकता है, ताकि दोनों पक्षों के बीच तनाव कम हो और मानवीय स्थिति में सुधार हो सके। दोनों देशों ने माना कि युद्ध के कारण उत्पन्न मानवीय संकट गंभीर चिंता का विषय है और इसके समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।
A useful meeting with FM @andrii_sybiha of Ukraine.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) May 27, 2026
Exchanged views on the Ukraine conflict. Also discussed our bilateral cooperation.#GymnichForum
🇮🇳 🇺🇦 pic.twitter.com/OGyOHqbz4z
Russo-Ukrainian War को लेकर वैश्विक स्तर पर लगातार कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। इसी क्रम में यह बैठक भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें भारत और यूक्रेन के शीर्ष राजनयिकों ने मौजूदा हालात पर अपने दृष्टिकोण साझा किए।
जिमनिच फोरम, जिसे यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक के रूप में जाना जाता है, वैश्विक कूटनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। इस मंच पर विभिन्न देशों के प्रतिनिधि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय संघर्ष और वैश्विक शांति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हैं।
भारत लगातार यह रुख रखता आया है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। इस बैठक में भी इसी दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
दोनों नेताओं के बीच हुई यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय संघर्ष के समाधान के लिए नए रास्ते तलाशने की कोशिश कर रहा है। बैठक को शांति प्रयासों की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल इस चर्चा के बाद किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन दोनों पक्षों ने संवाद जारी रखने और कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई है।





