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इसरो का एनवीएस-03 लॉन्च सफल, स्वदेशी नाविक को मिलेगी नई ताकत

nidhi
31 Oct 2026 6:58 AM IST
इसरो का एनवीएस-03 लॉन्च सफल, स्वदेशी नाविक को मिलेगी नई ताकत
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श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने स्वदेशी उपग्रह आधारित नौवहन प्रणाली ‘नाविक’ को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट ने एनवीएस-03 उपग्रह को निर्धारित भू-तुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। इसरो के प्रक्षेपण रिकॉर्ड के अनुसार, मिशन 30 अक्टूबर 2026 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया। अगली पीढ़ी का यह उपग्रह देश की स्वतंत्र नेविगेशन क्षमता और सेवाओं की निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण है।
एनवीएस-03 को अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से प्रक्षेपित किया गया। यह भारत के भू-तुल्यकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान जीएसएलवी की 20वीं उड़ान थी। इसरो ने मिशन की सफलता की जानकारी देते हुए पुष्टि की कि रॉकेट ने उपग्रह को इच्छित स्थानांतरण कक्षा में पहुंचा दिया है। एनवीएस-03 अगली पीढ़ी की नौवहन उपग्रह प्रणाली का तीसरा उपग्रह है। इसे भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली की सेवाओं को आगे जारी रखने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
नाविक का पूरा नाम ‘नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन’ है। यह भारत की अपनी क्षेत्रीय उपग्रह नौवहन प्रणाली है, जिसका उद्देश्य स्थिति, दिशा और सटीक समय संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसकी प्राथमिक सेवा का क्षेत्र भारत और देश की सीमा से लगभग 1,500 किलोमीटर बाहर तक फैला है। इसलिए इसकी भूमिका भारत तथा आसपास के क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्धारित की गई है। उपग्रहों से मिलने वाले संकेतों का इस्तेमाल संगत रिसीवर अपनी स्थिति निर्धारित करने के लिए करते हैं। इस प्रणाली का रणनीतिक महत्व विदेशी उपग्रह सेवाओं पर निर्भरता कम करने से जुड़ा है। इसरो के अनुसार, नाविक की परिकल्पना मुख्य रूप से भारत के लिए स्वतंत्र नौवहन व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से की गई थी, विशेषकर रणनीतिक क्षेत्र की जरूरतों के लिए। अपने नियंत्रण वाली प्रणाली होने से देश को नौवहन सेवाओं के मामले में अधिक स्वायत्तता मिलती है। एनवीएस-03 की सफलता इसी दीर्घकालिक प्रयास का हिस्सा है। हालांकि, एक सफल प्रक्षेपण को सभी विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता तत्काल समाप्त होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
एनवीएस-03 की प्रमुख विशेषताओं में स्वदेशी परमाणु घड़ी शामिल है। इसरो के मिशन विवरण के मुताबिक, उपग्रह में बाहर से प्राप्त परमाणु घड़ियों के साथ स्वदेश में विकसित घड़ी भी लगाई गई है। नौवहन तकनीक में समय का अत्यधिक सटीक मापन महत्वपूर्ण होता है। इसरो की तकनीकी जानकारी में उपग्रह घड़ी से संबंधित त्रुटियों को स्थिति निर्धारण की सटीकता प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में गिना गया है। ऐसे में घड़ी संबंधी स्वदेशी क्षमता विकसित करना कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उपग्रह में मौजूदा एल5 और एस बैंड संकेतों के अतिरिक्त एल1 संकेत की सुविधा भी शामिल है। इसरो के अनुसार, नाविक का एल1 संकेत दूसरी वैश्विक नौवहन उपग्रह प्रणालियों के संकेतों के साथ काम करने के अनुकूल है। इसका महत्व उपकरणों और उपयोगकर्ता तकनीक के व्यापक विकास से जुड़ा है। हालांकि, किसी मोबाइल फोन या अन्य उपकरण में नाविक का लाभ लेने के लिए उसमें संबंधित संकेत प्राप्त करने वाला उपयुक्त हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर समर्थन होना आवश्यक है। केवल उपग्रह लॉन्च होने से हर उपकरण अपने आप नाविक समर्थित नहीं हो जाता। नाविक के तहत दो प्रकार की सेवाओं की व्यवस्था है। सामान्य नागरिक उपयोगकर्ताओं के लिए स्टैंडर्ड पोजिशनिंग सर्विस उपलब्ध कराने का प्रावधान है। दूसरी ओर, अधिकृत रणनीतिक उपयोगकर्ताओं के लिए रिस्ट्रिक्टेड सर्विस है, जिसमें संकेत एन्क्रिप्टेड होते हैं। इस तरह प्रणाली नागरिक और रणनीतिक आवश्यकताओं को अलग-अलग स्तर पर पूरा करने के लिए विकसित की गई है। स्थान की जानकारी देने वाली सेवाओं का उपयोग संबंधित एप्लिकेशन और संगत उपकरणों के माध्यम से किया जाता है।
यह मिशन नाविक के सामने आई परिचालन चुनौतियों के कारण भी अहम है। जुलाई 2026 में सार्वजनिक किए गए सरकारी जवाब के अनुसार, उस समय तीन उपग्रह स्थिति, नौवहन और समय यानी पीएनटी सेवाओं के लिए उपलब्ध थे। स्वतंत्र स्थिति निर्धारण के लिए कम से कम चार उपग्रह आवश्यक होने के कारण प्रणाली उस समय अकेले यह सेवा नहीं दे पा रही थी, जबकि समय संबंधी सेवा काम कर रही थी। इस पृष्ठभूमि में एनवीएस-03 का सफल प्रक्षेपण उपग्रह समूह को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इससे पहले एनवीएस-02 को 29 जनवरी 2025 को स्थानांतरण कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचाया गया था, लेकिन उसकी कक्षा ऊंची करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसरो की जांच समिति ने पाया कि संबंधित इंजन की ऑक्सीडाइजर लाइन के पाइरो वाल्व तक ड्राइव सिग्नल नहीं पहुंचा था। समिति ने भविष्य के मिशनों में विश्वसनीयता और वैकल्पिक सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की सिफारिशें कीं। इसरो ने कहा था कि लागू होने के अनुसार इन सुझावों का आगे के मिशनों में पालन किया जाएगा। फिलहाल एनवीएस-03 के बारे में इसरो ने निर्धारित स्थानांतरण कक्षा में सफल स्थापना की पुष्टि की है। इसे पूर्ण परिचालन सेवा शुरू होने की घोषणा से अलग समझना जरूरी है। उपग्रह की आगे की स्थिति और सेवाओं में शामिल किए जाने संबंधी आधिकारिक अपडेट महत्वपूर्ण होंगे। सफल प्रक्षेपण ने भारत की स्वदेशी नौवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में नई प्रगति दर्ज की है और नाविक की सेवाओं की निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है।
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