विश्व
हूतियों के खिलाफ जंग में उतरना चाहता है इजराइल, सऊदी अरब से मांगी इजाजत
jantaserishta.com
14 Oct 2026 3:46 PM IST

x
नई दिल्ली: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कथित तौर पर सऊदी अरब से हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य अभियान में इजराइली सेना को शामिल करने की अनुमति मांगी है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव अमेरिका के माध्यम से भेजा गया है। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इस पहल के पक्ष में नहीं बताए जा रहे हैं। इजराइल की दिलचस्पी के पीछे सऊदी अरब से संबंध बेहतर करना, ईरान के प्रभाव को कमजोर करना और सैन्य सहयोग बढ़ाना जैसे कारण बताए गए हैं।
हूतियों के खिलाफ अभियान में शामिल होना चाहता है इजराइल
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सऊदी अरब के सामने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिससे पश्चिम एशिया में सैन्य समीकरण बदल सकते हैं। इजराइली अखबार हारेत्ज की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू चाहते हैं कि हूती विद्रोहियों के खिलाफ चल रही लड़ाई में इजराइल भी हिस्सा ले। इसके लिए उन्होंने अमेरिका के माध्यम से सऊदी अरब तक अपना प्रस्ताव पहुंचाया है।
हालांकि, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इस प्रस्ताव से सहमत नहीं बताए जा रहे हैं। उन्हें आशंका है कि संघर्ष में इजराइली सेना की भागीदारी से सऊदी अरब और दूसरे अरब देशों में नाराजगी बढ़ सकती है। इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की संभावना है।
सऊदी अरब से रिश्ते बेहतर करने की कोशिश
इजराइल की इस पहल के पीछे एक अहम मकसद सऊदी अरब के साथ अपने संबंध मजबूत करना बताया जा रहा है। सऊदी अरब लंबे समय से यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों के खिलाफ संघर्ष कर रहा है। ऐसे में इजराइल को लगता है कि सऊदी अरब की सैन्य मदद करने से दोनों देशों के बीच नजदीकी बढ़ सकती है।
इस सहयोग से भविष्य में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित करने की संभावनाएं भी बन सकती हैं। फिलहाल, ईरान के विरोध जैसे कुछ साझा हित होने के बावजूद इजराइल और सऊदी अरब के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं।
ईरान के प्रभाव को कमजोर करना भी मकसद
इजराइल की दिलचस्पी की दूसरी बड़ी वजह ईरान और हूती विद्रोहियों के बीच संबंध हैं। सऊदी अरब और अमेरिका का आरोप रहा है कि ईरान हूतियों को हथियार, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता देता है। उनके मुताबिक, इसी मदद से हूती ड्रोन और मिसाइलों के जरिए हमले करने में सक्षम हुए हैं।
हूती विद्रोही लाल सागर और बाब अल-मंदेब के आसपास जहाजों को निशाना बनाते रहे हैं। उन्होंने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच इजराइल पर भी हमले किए हैं। ऐसे में इजराइल हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान में शामिल होकर उनकी ताकत कम करना चाहता है। इससे ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव को चुनौती देने की उसकी कोशिश को भी मदद मिल सकती है।
सैन्य सहयोग बढ़ाने के साथ बढ़ सकते हैं खतरे
इजराइल के लिए सऊदी अरब के साथ सैन्य तालमेल बढ़ाना भी इस प्रस्ताव का एक अहम उद्देश्य माना जा रहा है। सऊदी अरब हूतियों को अपनी सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती मानता है। इजराइल की भागीदारी से दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधी सहयोग बढ़ने की संभावना हो सकती है।
लेकिन इस कदम के साथ राजनीतिक जोखिम भी जुड़े हैं। सऊदी अरब के सैन्य अभियान में इजराइली सेना के शामिल होने पर देश के भीतर और व्यापक अरब जगत में विरोध हो सकता है। यही चिंता सऊदी नेतृत्व के सामने एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
फिलिस्तीन का मुद्दा दोनों देशों के संबंधों में बाधा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहले भी सऊदी अरब से इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने की अपील कर चुके हैं। इस दिशा में अब्राहम समझौते का उदाहरण भी दिया जाता है। वर्ष 2020 में संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन सहित कई अरब देशों ने इस समझौते के तहत इजराइल के साथ अपने संबंध सामान्य किए थे।
हालांकि, सऊदी अरब का रुख अलग रहा है। उसका कहना है कि इजराइल के साथ रिश्ते सुधारने के लिए फिलिस्तीन के मुद्दे का समाधान जरूरी है। इस कारण दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य करने की कोशिशों में यह मुद्दा अब भी अहम बना हुआ है।
यमन में करीब एक दशक से जारी है संघर्ष
यमन में हूती विद्रोहियों ने 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब ने कई देशों के साथ मिलकर उनके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। सऊदी गठबंधन का उद्देश्य यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को दोबारा सत्ता में लाना और हूतियों का नियंत्रण खत्म करना था।
कई वर्षों तक हवाई हमले और सैन्य कार्रवाई जारी रहने के बावजूद सऊदी नेतृत्व हूतियों को पूरी तरह पीछे हटाने में सफल नहीं हुआ। हूती अब भी यमन के बड़े हिस्से में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। उनका प्रभाव और जहाजों पर हमलों से जुड़ी गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे हालात में इजराइल की संभावित भागीदारी का प्रस्ताव सऊदी अरब के लिए सैन्य सहयोग के साथ-साथ राजनीतिक फैसले की भी परीक्षा बन सकता है।
jantaserishta.com
भारत के भले ही किसी कोने में आप रह रहे हों, जनता से रिश्ता वेबसाइट पर आपके राज्य की हर छोटी-बड़ी खबर मिलेगी। राजनीति, खेल, चुनाव, बिजनेस, सिनेमा, इस प्लैटफॉर्म पर बस एक क्लिक करते ही हमेशा पाएं ताजा खबरें। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों और शहरों की कोई जानकारी हो, हम आपको देते हैं। सियासी रण हो या बजट का मौसम, कहां चल रहा क्या सियासी दांव-पेच, आपके गांव में किसकी सरकार, हर अपडेट यहां आपको मिलेंगे। तो फिर अपने राज्य की हर हलचल के लिए जुड़े रहिए जनता से रिश्ता के साथ।
Next Story





