
x
JERUSALEM यरूशलेम : जेरूसलम में इज़राइल सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए सरकार को निर्देश दिया कि वह उन अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदियों को मिलने वाले वित्तीय लाभों को कम करे, जो सैन्य भर्ती से इनकार कर रहे हैं। यह फैसला देश में लंबे समय से चल रहे भर्ती विवाद को एक बार फिर चर्चा में ले आया है।
कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि भर्ती को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, इसलिए व्यावहारिक उपाय अपनाना आवश्यक हो गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा स्थिति में केवल कानूनी प्रावधानों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है।
इज़राइल में अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी पुरुषों को, जो पूर्णकालिक धार्मिक अध्ययन में संलग्न रहते हैं, राष्ट्रीय सेवा से छूट देने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। यह व्यवस्था 1948 में इज़राइल की स्थापना के समय से लागू है और इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जाता है।
हालांकि, इज़राइल सुप्रीम कोर्ट ने इस छूट को लेकर पिछले कई वर्षों में लगातार सवाल उठाए हैं। अदालत का मानना रहा है कि सभी नागरिकों के लिए समान दायित्व होना चाहिए और रक्षा सेवा से छूट के नियमों की समीक्षा आवश्यक है।
इस मुद्दे पर 2024 में आए एक महत्वपूर्ण फैसले में कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पुरुषों की भर्ती सुनिश्चित की जाए। यह निर्णय देश की सुरक्षा और सामाजिक समानता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना गया था।
वहीं दूसरी ओर, बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार इस मुद्दे पर जटिल राजनीतिक स्थिति का सामना कर रही है। उनकी सरकार का राजनीतिक समर्थन काफी हद तक अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स दलों पर निर्भर करता है, जिसके कारण वे इस छूट को पूरी तरह समाप्त करने के पक्ष में नहीं रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला इज़राइल में कानून, धर्म और राजनीति के बीच संतुलन की चुनौती को दर्शाता है। एक ओर सुप्रीम कोर्ट समानता और राष्ट्रीय सेवा के सिद्धांत पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के दबाव में है।
इस फैसले के बाद देश में फिर से बहस तेज हो गई है कि क्या सभी नागरिकों के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य होनी चाहिए या धार्मिक समुदायों को विशेष छूट मिलती रहनी चाहिए। यह मुद्दा सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील बना हुआ है।
सरकारी प्रतिक्रिया में अभी तक कोई बड़ा बदलाव घोषित नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद नीति स्तर पर नई चर्चाएं शुरू होंगी।
कुल मिलाकर, इज़राइल सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय देश में भर्ती नीति, धार्मिक स्वतंत्रता और राजनीतिक संतुलन के बीच चल रहे लंबे विवाद को एक बार फिर केंद्र में ले आया है, जिसका प्रभाव आने वाले समय में नीतिगत फैसलों पर देखा जा सकता है।
Tagsइज़राइल सुप्रीम कोर्टअल्ट्रा ऑर्थोडॉक्सभर्ती विवादबेंजामिन नेतन्याहूराष्ट्रीय सेवाजेरूसलमकानूनIsrael Supreme CourtUltra Orthodoxconscription controversyBenjamin Netanyahunational serviceJerusalemlawजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





