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इजराइल ने हिजबुल्लाह की 2 किमी लंबी सुरंग उड़ाई, धमाके से कांपी जमीन
jantaserishta.com
11 Sept 2026 1:14 PM IST

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नई दिल्ली: दक्षिणी लेबनान में एक ऐसा धमाका हुआ, जिसने सिर्फ हिजबुल्लाह के ठिकाने को ही नहीं मिटाया, बल्कि आसपास के इलाके में भी तेज झटके महसूस कराए। आखिर इजराइल ने जिस सुरंग को निशाना बनाया, उसके अंदर क्या था और यह सुरंग इतनी अहम क्यों मानी जा रही थी? इजराइली सेना के दावे के मुताबिक यह कोई सामान्य सुरंग नहीं, बल्कि हिजबुल्लाह के सैन्य ढांचे का बड़ा हिस्सा थी। धमाके के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इसे मिशन की सफलता बताया।
इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह की 2 किलोमीटर से ज्यादा लंबी भूमिगत सुरंग को विस्फोट कर तबाह कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के क्षेत्रों में जमीन हिलने जैसी स्थिति महसूस हुई। लेबनान की सरकारी न्यूज एजेंसी ने भी इलाके में तेज झटकों की जानकारी दी। इन झटकों को 4.1 तीव्रता के भूकंप जैसा बताया गया।
इस कार्रवाई के बाद इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ऑपरेशन को पूरा बताते हुए कहा, “मिशन पूरा हुआ। हैप्पी न्यू ईयर।”
सुरंग के अंदर मिला हथियारों का बड़ा जखीरा
इजराइली सेना के अनुसार, इस भूमिगत परिसर में ईरान में बने कई रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन मौजूद थे। इसके अलावा मशीनगन, एंटी-टैंक मिसाइल और बड़ी संख्या में बारूदी सुरंगें तथा दूसरे विस्फोटक भी मिलने का दावा किया गया है।
सेना का कहना है कि इसी परिसर में हिजबुल्लाह की ‘बद्र’ यूनिट का कमांड सेंटर भी मौजूद था। यानी यह जगह सिर्फ हथियार रखने के लिए इस्तेमाल नहीं हो रही थी, बल्कि संगठन की सैन्य गतिविधियों के संचालन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है।
20 साल में तैयार हुआ था नेटवर्क
नेतन्याहू के मुताबिक इस पूरे भूमिगत नेटवर्क को तैयार करने में करीब 20 साल लगे थे और इसके लिए ईरान की तरफ से फंडिंग किए जाने का दावा किया गया है। इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने इस नेटवर्क को आतंकी ढांचे के तौर पर बताया है।
यह सुरंग दक्षिणी लेबनान में अली अल-ताहेर पहाड़ी के इलाके में स्थित थी। इजराइल का कहना है कि उसने इस क्षेत्र में जमीन के ऊपर और नीचे दोनों स्तरों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। पिछले सप्ताह भी इजराइली सेना ने इस इलाके पर कब्जे का दावा किया था। सेना के एक अधिकारी के मुताबिक, हिजबुल्लाह के कई लड़ाके हवाई हमलों में मारे गए, जबकि कुछ वहां से निकलने में कामयाब रहे।
हिजबुल्लाह की ‘बद्र’ यूनिट क्यों अहम है?
‘बद्र’ यूनिट को दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह की प्रमुख सैन्य इकाइयों में गिना जाता है। यह लिटानी नदी के उत्तर के इलाके में सक्रिय बताई जाती है। इस यूनिट का नाम 624 ईस्वी में हुई बद्र की लड़ाई से जुड़ा है।
फिर क्यों बढ़े इजराइल के हमले?
पिछले कुछ दिनों में दक्षिणी लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई फिर तेज हुई है। जून में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत के बाद इजराइल और लेबनान के बीच समझौते की बात सामने आई थी और कुछ समय के लिए हमले कम हुए थे।
AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत के दौरान अमेरिका की ओर से अली अल-ताहेर पहाड़ी का नियंत्रण लेबनानी सेना को देने का प्रस्ताव भी रखा गया था। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार हिजबुल्लाह ने इसे स्वीकार नहीं किया।
लेबनान के अधिकारियों के मुताबिक मार्च से अब तक इजराइली हमलों में 4,300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। वहीं इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान के एक हिस्से में बनाए गए सुरक्षा क्षेत्र में अभी भी मौजूद है।
2006 के बाद क्यों बढ़ा सुरंगों का इस्तेमाल?
2006 के इजराइल-हिजबुल्लाह युद्ध के बाद हिजबुल्लाह ने अपने सैन्य ढांचे को ज्यादा सुरक्षित रखने के लिए भूमिगत नेटवर्क पर जोर दिया। इजराइली हवाई हमलों ने उस युद्ध के दौरान संगठन के कई ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद हथियारों, कमांड सेंटर और लड़ाकों की आवाजाही के लिए जमीन के नीचे ढांचे विकसित करने पर जोर बढ़ा।
सुरंगों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि वे ऊपर से होने वाली निगरानी और हवाई हमलों से सैन्य ढांचे को छिपाने में मदद करती हैं। इनके जरिए हथियारों को सुरक्षित रखने, लड़ाकों की आवाजाही और कमांड सिस्टम को संचालित करने की कोशिश की जा सकती है।
इन्हीं वजहों से सुरंगों को खोजकर उनका पूरा नेटवर्क नष्ट करना किसी भी सेना के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इजराइल ऐसी जगहों का पता लगाने के लिए खुफिया जानकारी, सिग्नल इंटेलिजेंस, ड्रोन और अन्य निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल करता है।
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